लंदन में रहने वाली पोलिश इन्फ्लुएंसर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. पश्चिमी देशों में काम करने वाले भारतीयों को लेकर चल रही पुरानी बहस को एक बार हवा मिल गई है. सवाल है कि क्या भारतीय सच में स्थानीय लोगों की नौकरियां ले रहे हैं? इन्फ्लुएंसर ने इस आलोचना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसे सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है. वहीं, बढ़ती लागत और सख्त इमीग्रेशन नियमों के बावजूद भारतीय छात्र और प्रोफेशनल्स अब भी ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर रहे हैं.
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब यूनाइटेड किंगडम अंतरराष्ट्रीय प्रवासन और छात्र भर्ती पर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है. यूसीएएस और यूके गृह मंत्रालय के नए आंकड़ों से भारतीय छात्रों की रुचि का पता चलता है, जबकि नए नियमों से विश्वविद्यालयों पर वीजा, नामांकन और पाठ्यक्रम पूरा करने के लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव बढ़ेगा.
क्या कहा इन्फ्लुएंसर ने ?
वहीं, इस दौरान लंदन में रहने वाली पोलिश इन्फ्लुएंसर माया, जिनकी सगाई एक भारतीय से हुई है का एक इंस्टाग्राम वीडियो वायरल होने के बाद भारतीयों के नौकरियां छीनने को लेकर बहस फिर शुरू हो गई है. वीडियो को 12 घंटे से भी कम समय में 5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले और कई लोगों ने माया की बात की तारीफ की है. स्थानीय लोगों की नौकरियां छीनने के आरोपों पर माया ने कहा कि बेबी, वे ऐसी नौकरी नहीं छीन सकते जिसके लिए आप योग्य नहीं हैं.
उन्होंने भारतीयों के सभी अच्छी नौकरियां ले जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए डॉक्टर, इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल्स का उदाहरण दिया. उन्होंने पूछा कि क्या आरोप लगाने वाले लोगों के पास इन नौकरियों के लिए जरूरी योग्यता है. माया ने भारतीयों के उबर, डिलीवरी और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में नौकरियां लेने के दावे को भी खारिज किया. उनका कहना था कि ये नौकरियां सभी के लिए खुली हैं और इनमें काम करने का मौका किसी के लिए भी उपलब्ध है.
'प्रवासियों को दोष देना आसान है'
माया ने व्यक्तिगत या आर्थिक समस्याओं के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराने की सोच पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सुबह 5 बजे उठकर मेहनत करने वाला कोई भारतीय मजदूर किसी दूसरे व्यक्ति की परेशानियों के लिए जिम्मेदार नहीं है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि किसी भारतीय का सुबह 5 बजे काम पर जाना आपकी जिंदगी खराब होने की वजह न हो. लेकिन उसे दोष देना ज्यादा आसान है, है ना?
माया की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब ब्रिटेन अपने इमीग्रेशन नियमों को सख्त कर रहा है. इसके बावजूद भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन का रुख कर रहे हैं. यह स्थिति प्रवासन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और छात्रों व प्रोफेशनल्स के ब्रिटेन जाने के फैसले के बीच अंतर को भी दिखाती है.