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AIIMS से डीम्ड यूनिवर्सिटीज तक... NEET UG काउंसलिंग के बाद क्यों खाली रह गईं MBBS सीटें?

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए NEET UG परीक्षा पास करना ही आधी चुनौती है, असली जंग इसके बाद शुरू होती है. हाल ही में नीट यूजी के फाइनल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के डीम्ड मेडिकल संस्थानों में 800 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं. क्या इसके पीछे भारी-भरकम फीस एक बड़ी वजह है?

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NEET UG काउंसलिंग खत्म होने के बाद भी 800 से ज्यादा MBBS सीटें खाली
NEET UG काउंसलिंग खत्म होने के बाद भी 800 से ज्यादा MBBS सीटें खाली

डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले मेडिकल छात्रों के लिए नीट यूजी (NEET UG) पास करना एक बड़ी सफलता होती है, लेकिन इसके बाद कॉलेज की फीस चुकाना अपने आप में किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, खासकर तब जब प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल यूनिवर्सिटीज की सालाना ट्यूशन फीस लाखों-करोड़ों में हो.

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा जारी कॉलेज-वाइज आंकड़ों के मुताबिक, नीट यूजी 2026 के स्ट्रे वैकेंसी राउंड के पूरा होने के बाद भी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में एमबीबीएस की 837 सीटें खाली रह गई हैं.

इन खाली सीटों में तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड मेडिकल विश्वविद्यालयों की 824 सीटें, एम्स मदुरई (AIIMS Madurai) की 1 सीट और कर्नाटक के कोलार स्थित चेट्टिनाड हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की 12 सीटें शामिल हैं. काउंसलिंग का आखिरी दौर खत्म होने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

इन 4 कॉलेजों में खाली हैं 350 से ज्यादा सीटें

श्री सत्य साईं मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (चेन्नई): 188 सीटें खाली
मीनाक्षी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (कांचीपुरम): 117 सीटें खाली
महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (पुडुचेरी): 92 सीटें खाली
श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (चेन्नई): 82 सीटें खाली

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क्या फीस बनी इतनी बड़ी सीटों के खाली रहने की वजह?

इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि छात्र अपनी फाइनेंशियल स्थिति और बाकी विकल्पों को तौलने के बाद इन संस्थानों में एडमिशन लेने से पीछे हट रहे हैं.

श्री बालाजी विद्यापीठ द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, श्री सत्य साईं मेडिकल कॉलेज में सालाना ट्यूशन फीस 21 लाख रुपये और महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में 24 लाख रुपये है. वहीं, मीनाक्षी मेडिकल कॉलेज के ब्रोशर के मुताबिक वहां की ट्यूशन फीस 23 लाख रुपये सालाना है. ये सिर्फ ट्यूशन फीस हैं, जिनमें हॉस्टल, मेस या अन्य खर्चे शामिल नहीं हैं. ऐसे में इन डीम्ड यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई का सालाना खर्च 21 लाख से 30 लाख रुपये (या उससे भी ज्यादा) तक पहुंच जाता है.

हालांकि, केवल खाली सीटों के आधार पर यह पूरी तरह नहीं कहा जा सकता कि फीस ही इकलौता कारण थी, लेकिन कॉलेज के चुनाव में फीस एक बहुत बड़ा और निर्णायक फैक्टर जरूर साबित हुई है.

क्या अब होगा कोई स्पेशल काउंसलिंग राउंड?

इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के बाद छात्रों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन्हें भरने के लिए कोई स्पेशल काउंसलिंग राउंड आयोजित किया जा सकता है?

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MCC अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्ट्रे वैकेंसी राउंड के फाइनल अलॉटमेंट रिजल्ट जारी कर चुका है. जानकारों के मुताबिक, सरकारी मंजूरी मिलने पर इन खाली सीटों को भरने के लिए आगे किसी विशेष दौर पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, नीट यूजी क्वालिफाई कर चुके छात्रों को यह मानकर नहीं बैठना चाहिए कि सीटें खाली हैं तो एडमिशन अपने आप मिल जाएगा. कोई भी नया मौका सरकार के आधिकारिक फैसले और उसके नियमों पर ही निर्भर करेगा.

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