देशभर के लाखों छात्र अगले एक हफ्ते से भी कम समय में नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 की री-एग्जामिनेशन (पुनः परीक्षा) में बैठने जा रहे हैं. ऑल इंडिया मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के बड़े कोचिंग हब 'सीकर' के ही एक व्हिसलब्लोअर (भंडाफोड़ करने वाले) ने सबसे पहले पुलिस का दरवाजा खटखटाया था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पत्र लिखकर मई में हुए पेपर लीक की जानकारी दी थी.
सीकर के ही एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार का मानना है कि इस बार पेपर लीक होने की गुंजाइश 'ना के बराबर' है. हालांकि, 'इंडिया टुडे डिजिटल' ने जिन छात्रों से बात की, वे उम्मीद तो जता रहे हैं लेकिन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. 'इंडिया टुडे डिजिटल' से खास बातचीत में व्हिसलब्लोअर शशिकांत सुथार ने कहा कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के चलते 21 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह लीक-प्रूफ होने की उम्मीद है.
सुथार ने कहा कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि री-एग्जाम का पेपर दोबारा लीक हो जाए. सरकार ने अब जो कड़े कदम उठाए हैं, अगर वे पहले ही उठा लिए जाते तो छात्रों को इस तरह की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता. उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में इस बात की कड़ी निगरानी रखनी होगी ताकि फिर कभी पेपर लीक न हों और छात्रों को मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े.
बता दें कि 3 मई को नीट-यूजी की परीक्षा खत्म होने के बाद, सुथार को पेपर लीक होने का गहरा शक हुआ था, जिसके बाद वह आधी रात को ही सीकर के एक पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे. इसके बाद उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था NTA को पत्र लिखा था. सुथार राजस्थान के सीकर में स्थित सबसे पुराने और बड़े संस्थानों में से एक 'गुरुकृपा कोचिंग इंस्टीट्यूट' में केमिस्ट्री पढ़ाते हैं.
भले ही शिक्षक सुथार को सरकार के इंतजामों पर पूरा भरोसा है और वे पेपर लीक की संभावना शून्य मान रहे हैं, लेकिन सीकर में री-टेस्ट की तैयारी कर रहे छात्र अभी भी संशय में हैं. उनका कहना है कि असल हकीकत 21 जून को परीक्षा होने के बाद ही साफ होगी.
कैसे खुला था महाघोटाले का खेल?
3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा में देशभर के 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे. सुथार के आरोपों और शुरुआती जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई. जांच में एक मल्टी-स्टेट पेपर लीक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जिसने परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही 'गेस पेपर' के नाम पर लीक सवालों को बाजार में घुमा दिया था.
CBI की जांच के मुताबिक इस लीक की कड़ियां सीधे महाराष्ट्र में NTA के पेपर-सेटिंग प्रोसेस (प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया) से जुड़े अंदरूनी लोगों से जुड़ी थीं. वहां से पेपर तैयार होने के दौरान ही लीक किया गया और फिर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए इसे महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के कोचिंग नेटवर्क्स में फैला दिया गया.
केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार ने सोशल मीडिया पर घूम रही एक पीडीएफ फाइल और वास्तविक प्रश्नपत्र के बीच भारी समानताएं पकड़ी थीं, जिसके बाद उन्होंने 3 मई से 7 मई के बीच अधिकारियों से इसकी शिकायत की. इस बड़ी साजिश और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही एजेंसियों ने अब तक पेपर सेट करने वाले कथित एक्सपर्ट्स, कोचिंग संचालकों और दलालों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है.
पेपर लीक रोकने के लिए क्या कर रही सरकार
इस बड़े घोटाले के जवाब में सरकार और NTA ने 21 जून की री-एग्जाम के लिए ऐसे सुरक्षा इंतजाम किए हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए. इसके साथ ही यह भी एलान किया गया है कि ओएमआर (OMR) शीट आधारित व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए साल 2027 से NEET पूरी तरह कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में शिफ्ट हो जाएगा.
री-एग्जाम के लिए मुख्य सुरक्षा इंतजाम
अज्ञात जगहों पर आइसोलेशन: पेपर सेट करने वाले, मॉडरेटर्स और ट्रांसलेटर्स (अनुवादक) को पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग (आइसोलेट) कर गुप्त स्थानों पर रखा गया है. उनके पास फोन, लैपटॉप या इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं है. पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है ताकि किसी भी एक व्यक्ति या एजेंसी के पास पेपर बनने से लेकर बंटने तक की पूरी चेन की जानकारी न हो.
भारतीय वायुसेना की मदद: प्रश्नपत्रों को सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा CRPF, CISF और राज्यों की पुलिस मिलकर मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा तैयार करेंगी.
हाई-टेक निगरानी: परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए 5 लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. साथ ही बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान), एआई (AI) आधारित सर्विलांस और 1 लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी. आईबी (IB) और सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियां इसकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करेंगी.
पेपर सेंटर्स को अलग रखना गेम-चेंजर साबित होगा
सुथार ने पेपर सेट करने वालों को आइसोलेट (अलग) करने के सरकार के फैसले की तारीफ की. उन्होंने कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था, लेकिन अब इससे पेपर लीक करने वाले नेक्सस (गठजोड़) की कमर टूट जाएगी.
सुथार ने कहा कि सरकार और NTA के तमाम कदमों में सबसे बड़ा 'गेम-चेंजर' पेपर सेटर्स को आइसोलेट करना है. इस एक कदम से परीक्षा पूरी तरह लीक-प्रूफ हो जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि मैं अभी भी मानता हूं कि ये कदम बहुत पहले उठने चाहिए थे क्योंकि यह देश के भविष्य और हमारे होने वाले डॉक्टरों के करियर का सवाल है. खैर, देर आए दुरुस्त आए, यह बिल्कुल सही कदम है.
इसके साथ ही उन्होंने अगले साल से ओएमआर शीट की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) कराने के फैसले को भी सराहा और कहा कि जेईई (JEE) जैसी परीक्षाओं का उदाहरण देखें तो कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में गड़बड़ियों की आशंका बेहद कम होती है.
कोचिंग हब के छात्रों के दिलों में अब भी है घबराहट
एक तरफ जहां शिक्षक सुथार को भरोसा है कि अब लीक की गुंजाइश नहीं है, वहीं नीट के सबसे बड़े गढ़ 'सीकर' में पढ़ाई कर रहे छात्र परीक्षा की शुचिता को लेकर अंदर से डरे हुए हैं.
री-नीट परीक्षा में बैठने जा रहे छात्र प्रशांत ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि दोबारा पेपर लीक नहीं होगा. प्रशांत ने कहा कि मुझे कोई भरोसा नहीं है कि दोबारा पेपर लीक नहीं हो सकता. मैं दावे के साथ कुछ नहीं कह सकता. मैं बस यही उम्मीद कर सकता हूं कि ऐसा कुछ न हो और सभी छात्रों को बराबरी का मौका मिले.
हालांकि, प्रशांत ने यह भी माना कि परीक्षा रद्द होने से उन्हें अपना स्कोर सुधारने का एक मौका मिल गया है, क्योंकि पिछली बार उनकी तैयारी पूरी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मैं पेपर लीक से पूरी तरह निराश नहीं हूं. पिछली बार मेरी तैयारी कम थी, इस बार मैं बेहतर नंबर लाने के लिए ज्यादा मेहनत कर रहा हूं. जिंदगी हमेशा दूसरा मौका नहीं देती.
सीकर के छात्रों का हाल 'दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है' जैसा है. री-एग्जाम देने जा रहे 20 साल के छात्र प्रकाश का कहना है कि अधिकारियों द्वारा घोषित किए गए कदम छात्रों का खोया भरोसा पूरी तरह बहाल करने के लिए नाकाफी हैं.
प्रकाश ने कहा कि NTA जिसे 'स्टूडेंट-फ्रेंडली' कदम कह रहा है, उससे हमें कोई खास फर्क नहीं पड़ता. सरकार और NTA के दावों से हमें यह पूरी गारंटी नहीं मिलती कि इस बार पेपर लीक होने के चांस बिल्कुल जीरो हैं. छात्रों का साफ कहना है कि ये इंतजाम कितने पुख्ता और 'फूलप्रूफ' हैं, यह तो 21 जून को परीक्षा होने के बाद ही पता चलेगा.
वैसे जहां नीट-यूजी पेपर लीक का पर्दाफाश करने वाले शिक्षक शशिकांत सुथार को भरोसा है कि री-एग्जाम पूरी तरह सुरक्षित होगी, वहीं मई में परीक्षा रद्द होने का झटका झेल चुके छात्र अब भी गहरे तनाव और भरोसे की कमी से जूझ रहे हैं. सीकर के छात्र फिलहाल अपनी उंगलियां दबाए (फिंगर्स क्रॉस्ड) सिर्फ बेहतर की उम्मीद कर रहे हैं.