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न रटी किताबें, न छोड़ा संगीत, NEET में AIR 7 लाने वाले आर्यन दुबे की सफलता की कहानी

वाराणसी के आर्यन दुबे ने NEET UG 2026 में 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की है. उन्होंने कक्षा 9 में ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था. कॉन्सेप्ट के साथ पढ़ाई, नियमित मेहनत, गाने से तनाव दूर करना और परिवार के सहयोग ने उन्हें इस बड़ी सफलता तक पहुंचा दिया है. 

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NEET UG 2026 टॉपर आर्यन दूबे.
NEET UG 2026 टॉपर आर्यन दूबे.

आर्यन दुबे ने NEET UG 2026 में 720 में से 710 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल कर ली है. डीपीएस वाराणसी के छात्र आर्यन ने पिछले दो साल आकाश इंस्टीट्यूट से तैयारी की. हालांकि, उनका कहना है कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने नौवीं कक्षा में ही तय कर लिया था. इसी लक्ष्य ने उन्हें शुरू से सही दिशा में मेहनत करने के लिए प्रेरित किया और आखिरकार उन्हें यह बड़ी सफलता मिली. अपनी सफलता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जब हम किसी चीज के लिए अपना आराम त्याग देते हैं तो परिणाम अपने आप ही दिखने लगता है. 

किसने किया उन्हें प्रेरित?

आर्यन की सफलता में उनके दादाजी का सबसे बड़ा योगदान रहा है. उनके दादाजी सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) थे. बचपन से ही आर्यन उन्हें और परिवार के अन्य डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करते हुए देखते थे. मरीजों को ठीक होते देख डॉक्टरों को मिलने वाली खुशी ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया. 

आर्यन का कहना है कि उनके लिए डॉक्टर बनना सिर्फ एक करियर नहीं बल्कि समाज की सेवा करने का माध्यम है. परिवार के मुताबिक, जहां बाकी लोग उन्हें टॉप 5,000 रैंक तक पहुंचने लायक मानते थे, वहीं उनके दादाजी को पूरा भरोसा था कि वह टॉप 100 में जगह बनाएंगे.  आखिरकार उनका यह विश्वास सच साबित हुआ और आर्यन ने ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की. 

क्या है आर्यन के सफलता का रास्ता? 

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आर्यन का मानना है कि NEET की तैयारी में रटने से ज्यादा जरूरी कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझना है. उनका कहना है कि जब किसी विषय की मूल बातें समझ में आ जाती हैं, तो उसे याद रखना आसान हो जाता है और गलतियों की संभावना भी कम रहती है. उन्होंने अपनी तैयारी में लंबे समय तक पढ़ने के बजाय नियमित और लगातार पढ़ाई पर ध्यान दिया. इसी प्लानिंग ने उन्हें सभी विषयों में आत्मविश्वास बढ़ाने और शानदार प्रदर्शन करने में मदद की. 

अपने लिए भी निकालते हैं समय 

कड़ी पढ़ाई के बावजूद आर्यन ने अपनी पसंदीदा चीजों को पूरी तरह नहीं छोड़ा.  पढ़ाई के बीच वह गाना सुनकर खुद को तरोताजा रखते थे. आर्यन बताते हैं कि उनकी प्लेलिस्ट करीब 11 घंटे लंबी है और जब भी उन्हें ब्रेक की जरूरत होती थी, वह गाने सुनते थे. उनका मानना है कि किसी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए कुछ समय तक अपनी सुविधाओं और शौक में संतुलन बनाना पड़ता है. आर्यन कहते हैं कि जब आपकी मेहनत का परिणाम इतना अच्छा मिलता है, तो हर त्याग सार्थक लगता है. 

परीक्षा रिजल्ट से पहले परिवार को था विश्वास 

आर्यन पढ़े-लिखे परिवार से आते हैं.  उनके पिता IIT BHU में काम करते हैं, उनकी मां गृहिणी हैं और उनकी छोटी बहन, जो अभी कक्षा 11 में है, NEET की तैयारी कर रही है. परिवार के समर्थन ने आर्यन को अपनी तैयारी के दौरान आत्मविश्वास और ध्यान बनाए रखने में मदद की. आर्यन की सफलता किसी असाधारण प्लानिंग या कठिन दिनचर्या की कहानी नहीं है. यह सही समय पर लक्ष्य तय करने, विषयों को समझकर पढ़ने, जरूरत के अनुसार ब्रेक लेने और परिवार के भरोसे की कहानी है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए आर्यन का सफर एक संदेश देता है कि सफलता किसी एक दिन की मेहनत से नहीं, बल्कि हर दिन छोटे-छोटे प्रयासों को लगातार जारी रखने से मिलती है.  
 

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