दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों में ABVP ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर अपना हक जमाया है. यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छावड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर कब्जा जमाया. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे. चुनाव में NOTA भी चर्चा में रहा. चारों पदों पर कुल 23,942 छात्रों ने NOTA चुना, जिसमें अध्यक्ष पद पर 4,310, उपाध्यक्ष पर 4,359, सचिव पर 7,884 और संयुक्त सचिव पर 7,389 वोट पड़े.
अध्यक्ष पद पर NOTA के 4,310 वोट
अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले और उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोटों के साथ पीछे छोड़ा. इस पद पर AISA-SFI की अनन्या रतूड़ी को 5,377 वोट मिले, जबकि NOTA के खाते में 4,310 वोट गए. पिछले साल 2025 में इसे 3,175 मत मिले थे. यानी 1135 वोटों का उछाल आया.
उपाध्यक्ष पद पर 4,359 NOTA वोट
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन 30,615 वोटों के साथ विजयी रहे. ABVP के इशु मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले. AISA-SFI के अक्षत शिखर को 2,383 वोट मिले, जबकि NOTA ने 4,359 वोट हासिल किए, जो पिछले साल 5,820 थे. यानी आंकड़े बताते हैं कि वामपंथी गठबंधन (AISA-SFI) के अक्षत शिखर को मिले 2,883 वोटों से कहीं अधिक छात्रों ने अकेले नोटा का बटन दबाया.
सचिव पद पर NOTA के 7,884 वोट
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी 21,650 वोटों के साथ विजयी रहीं. NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 और AISA-SFI की स्टैनजिन डेस्क्यॉन्ग को 8,734 वोट मिले. इस पद पर NOTA को 7,884 वोट मिले, जबकि ASAP के पंकज कुमार को 7,639 वोट हासिल हुए.
संयुक्त सचिव पद पर भी NOTA आगे
वहीं, संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले. AISA-SFI के बी. पारिजात को 5,837 वोट मिले, जबकि NOTA को 7,389 वोट प्राप्त हुए. यानी इस पद पर NOTA के वोट AISA-SFI उम्मीदवार से अधिक रहे.
NOTA के आंकड़े क्या बताते हैं?
चारों पदों के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में छात्रों ने किसी भी उम्मीदवार को चुनने के बजाय NOTA का विकल्प इस्तेमाल किया. खास तौर पर सचिव और संयुक्त सचिव पद पर NOTA का आंकड़ा कुछ प्रमुख उम्मीदवारों से ऊपर रहा. हालांकि, केवल NOTA के वोटों के आधार पर छात्रों की पसंद या चुनाव के पीछे उनकी वजहों को तय नहीं किया जा सकता.