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जून के तीसरे हफ्ते तक आएगी NCERT की 8वीं की सोशल साइंस की बुक, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था बैन

सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रतिबंधित NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड जून के तीसरे सप्ताह तक संशोधित संस्करण में वापस आने वाली है. इंडिया टुडे को एनसीईआरटी के शीर्ष सूत्रों से यह जानकारी दी है.

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NCERT Class 8 Social Science revised book (Photo: ITG)
NCERT Class 8 Social Science revised book (Photo: ITG)

सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्ण प्रतिबंध झेलने के बाद NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' एक बार फिर वापसी के लिए तैयार है. एनसीईआरटी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस किताब का नया संशोधित संस्करण जून 2026 के तीसरे सप्ताह तक जारी कर दिया जाएगा. जारी शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए, किताब के नए ड्राफ्ट को आंतरिक मंजूरी मिलने के बाद छपने के लिए भेज दिया गया है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाने और सभी फिजिकल और डिजिटल प्रतियों को तत्काल जब्त करने का आदेश देने के बाद फरवरी 2026 में पुस्तक को दुकानों से हटा दिया गया था. न्यायालय ने अध्याय 4 के उन अनुच्छेदों पर कड़ी आपत्ति जताई थी जिनमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और अदालतों में लंबित मामलों के भारी बैकलॉग का जिक्र था. 

NCERT ने मांगी थी माफी 

इसके बाद से NCERT ने बिना शर्त माफी जारी करते हुए पुस्तक को वापस ले लिया था और विवादित मुद्दों को गलती बताया था. 2.25 लाख में से केवल 38 कॉपियां ही बिकी थीं. परिषद ने न्यायालय की चिंताओं को दूर करने के लिए एक विशेषज्ञ समीक्षा समिति का गठन किया. अदालत की चिंताओं को दूर करने के लिए परिषद ने एक विशेषज्ञ समीक्षा समिति का गठन किया था. नए संशोधित संस्करण में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार से जुड़े सभी संदर्भों को हटा दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि संशोधित कॉपी को आंतरिक मंजूरी मिल गई है और चालू शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए छपने के लिए भेज दिया गया है. 

क्या था पुराना विवाद?

इस पाठ्यपुस्तक को फरवरी 2026 में उस वक्त विवादों का सामना करना पड़ा था, जब देश की सर्वोच्च अदालत ने इसपर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए आदेश दिया था कि इस किताब की सभी डिजिटल और फिजिकल कॉपियों को तुरंत जब्त किया जाए. कोर्ट का ये फैसला उस समय आया था जब किताब के अध्याय 4 में लिखे कुछ पैराग्राफों पर गहरा ऐतराज था.   

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अब नए संस्करण में क्या बदला?

अदालत की आपत्तियों और चिंताओं को दूर करने के लिए एनसीईआरटी ने तुरंत एक विशेषज्ञ समीक्षा समिति का गठन किया था. इस समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए नए संशोधित संस्करण में से न्यायपालिका और अदालती भ्रष्टाचार से जुड़े उन सभी संदर्भों और टिप्पणियों को पूरी तरह से हटा दिया गया है, जिन पर कोर्ट ने आपत्ति जताई थी. 

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