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कौन हैं AMU में पुरानी परंपरा तोड़ पहली महिला उपाध्यक्ष बनीं नशरा नईम? गोरखपुर से क्या है कनेक्शन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए छात्रसंघ चुनाव में गोरखपुर की 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट नशरा नईम ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने उपाध्यक्ष पद पर 1,273 वोटों से जीत दर्ज की. AMU छात्रसंघ के तीन शीर्ष पदों में से किसी एक पर निर्वाचित होने वाली वह पहली महिला हैं. जानिए कौन हैं नशरा, उनके परिवार का AMU से क्या रिश्ता है और छात्र राजनीति को लेकर उनका क्या विजन है.

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कौन हैं नशरा नईम जो बनीं एएमयू की वाइस प्रेस‍िडेंट (Photo: Instagram)
कौन हैं नशरा नईम जो बनीं एएमयू की वाइस प्रेस‍िडेंट (Photo: Instagram)

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और बदलाव लाने का जज्बा हो, तो रास्ते की मुश्किलें भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की 22 वर्षीय छात्रा नशरा नईम ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. आठ साल के लंबे इंतजार के बाद 5 नवंबर 2026 को हुए AMU छात्रसंघ चुनाव में नशरा ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मीं नशरा ने 7,091 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी साकिब अली खान को 1,273 वोटों से हराया. खास बात यह है कि AMU छात्रसंघ के तीन शीर्ष पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव में से किसी एक पर निर्वाचित होने वाली वह पहली महिला हैं. उनकी इस जीत ने विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है.

यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है. नशरा का AMU से रिश्ता भी काफी पुराना है. उनके पिता इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और नशरा ने खुद AMU के वीमेंस कॉलेज से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई की है. अब इसी विश्वविद्यालय में वह छात्रसंघ की शीर्ष निर्वाचित पदाधिकारी बनी हैं.

कौन हैं नशरा नईम?

नशरा नईम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली हैं. 22 साल की नशरा AMU की फैकल्टी ऑफ लॉ में BA LLB की छात्रा हैं. उनके पिता AMU के पूर्व छात्र हैं और आईटी सेक्टर में बिजनेस करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं.

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नशरा का विश्वविद्यालय से जुड़ाव केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा. वह कैंपस में छात्र राजनीति और छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर हुए आंदोलन में भी सक्रिय रही हैं. वह Fraternity Movement की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य भी हैं.

नशरा ने The Indian Express को दिए इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का विचार किया था. लेकिन उनके पिता को लगा कि छात्रसंघ की बहाली के तुरंत बाद कैंपस में किसी महिला का अध्यक्ष चुना जाना मुश्किल हो सकता है. इसके बाद नशरा ने उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उनका परिवार पूरे चुनाव के दौरान उनके साथ खड़ा रहा.

कैसा रहा AMU छात्रसंघ चुनाव और नशरा की जीत का आंकड़ा?

AMU में छात्रसंघ चुनाव करीब आठ साल के अंतराल के बाद कराए गए. 5 नवंबर को विश्वविद्यालय के 13 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए. इसके बाद रातभर चली मतगणना के नतीजे 6 नवंबर की सुबह घोषित हुए.

उपाध्यक्ष पद के लिए कुल सात उम्मीदवार मैदान में थे. मुकाबला नशरा नईम और साकिब अली खान के बीच रहा.

नशरा नईम: 7,091 वोट
साकिब अली खान: 5,818 वोट
जीत का अंतर: 1,273 वोट

वहीं अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ ने 7,797 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. मानद सचिव के पद पर मोहम्मद हमदान 8,385 वोटों के साथ निर्वाचित हुए.

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इस चुनाव में महिलाओं की भागीदारी भी खास रही. छात्रसंघ की 10 सदस्यीय कैबिनेट में पांच महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. इसके अलावा AMU Court के लिए भी दो महिला छात्र प्रतिनिधि चुनी गईं.

छोटी टीम, सीमित संसाधन और बड़ी जीत... नशरा ने किसे दिया श्रेय?

अपनी जीत के बाद नशरा ने इसका श्रेय अपनी छोटी टीम और उसके समर्पण को दिया. The New Indian Express से बातचीत में उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और कम समय के बावजूद यह कामयाबी इसलिए मिली क्योंकि उनके साथ जुड़े लोगों में समर्पण, साहस और ईमानदारी थी.

नशरा के मुताबिक, यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने इस चुनाव में उनका साथ दिया.

कोरोना के बाद युवाओं की सोच में क्या बदलाव आया? नशरा ने बताई अपनी चिंता

नशरा का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद युवाओं में सामूहिक सोच और कम्युनिटी की भावना कमजोर हुई है. अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि युवा अब पहले की तुलना में ज्यादा व्यक्तिगत सोच की ओर बढ़ रहे हैं. वे अपने आसपास के बड़े सामाजिक संदर्भ और समुदाय के बारे में कम सोच रहे हैं.

उनका मानना है कि राजनीति को केवल चुनाव लड़ने या सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए. छात्र राजनीति युवाओं को अपने अधिकारों, प्रशासन के फैसलों और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का मौका देती है.

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छात्रसंघ बहाली के आंदोलन में भी रही हैं सक्रिय

नशरा की जीत के पीछे एक लंबा छात्र आंदोलन भी रहा है. AMU में 2018-19 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए थे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2019 से छात्रसंघ की गतिविधियां निलंबित कर रखी थीं.

चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्रों ने कई वर्षों तक विरोध प्रदर्शन किए. सितंबर 2026 में यह आंदोलन तेज हुआ और छात्रों ने लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिया. MA के छात्र यासिर फहद ने भूख हड़ताल भी की. करीब 19 दिनों तक चले आंदोलन और प्रशासन के साथ बातचीत के बाद विश्वविद्यालय ने चुनाव कराने पर सहमति जताई.

नशरा भी इस आंदोलन में सक्रिय रहीं. उनका मानना है कि विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति का जिंदा रहना जरूरी है, क्योंकि इससे छात्रों को अपनी समस्याएं और अधिकार प्रशासन के सामने रखने का मंच मिलता है.

AMU में महिला नेतृत्व का नया अध्याय

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1920 में हुई थी. वहीं AMU छात्रसंघ की शुरुआत का इतिहास 1884 से जोड़ा जाता है, जब Siddons Union Club का गठन हुआ था. ऐसे में छात्रसंघ के इतिहास में नशरा की जीत एक अहम पड़ाव है.

अब तक छात्रसंघ के तीन शीर्ष निर्वाचित पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव पर किसी महिला के चुने जाने का रिकॉर्ड नहीं था. नशरा इस परंपरा को तोड़ने वाली पहली महिला बनी हैं. इस चुनाव में पांच महिला कैबिनेट सदस्यों और दो महिला AMU Court प्रतिनिधियों का चुना जाना भी कैंपस में महिला प्रतिनिधित्व की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है.

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नशरा की जीत से यह सवाल भी सामने आया है कि विश्वविद्यालयों की छात्र राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को कितनी जगह मिल रही है. फिलहाल नशरा के सामने अपने चुनावी वादों को पूरा करने और छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है. उनकी जीत ने AMU की छात्र राजनीति में महिला नेतृत्व के लिए एक नया रास्ता जरूर खोला है.

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