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हैदराबाद के इस इंजीनियर को 27 बार विश्वविद्यालय ने किया रिजेक्ट, META में कैसे मिल गई नौकरी?

कहते हैं कि जब हौसले बुलंद हो, तो आपको कुछ भी पीछे नहीं खींच सकता है. ऐसा ही कुछ हुआ है हैदराबाद के सौमिथ चिंतला के साथ. उन्होंने किसी IIT या NIT से पढ़ाई नहीं की. अमेरिका के 27 विश्वविद्यालयों ने उन्हें एडमिशन देने से मना कर दिया. इतना ही  उन्हें वीजा से जुड़े कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेकिन आज के वह प्रभावशाली नामों में से एक हैं. 

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27 यूनिवर्सिटी से मिला रिजेक्शन, अब मेटा में कर रहे काम. (Photo: LinkedIn)
27 यूनिवर्सिटी से मिला रिजेक्शन, अब मेटा में कर रहे काम. (Photo: LinkedIn)

जिस तरह से आज की जॉब मार्केट बदल रही है उस हिसाब से लोगों को लगता है कि नौकरी में रिजेक्शन मिलने के बाद मौके खत्म हो जाते हैं. लेकिन सौमिथ चिंतला की कहानी ने लोगों को सोचने का अलग नजरिया दिया है. हैदराबाद में पले-बढ़े सौमिथ के घर में बचपन में कंप्यूटर भी नहीं था. उन्होंने पहली बार कंप्यूटर पड़ोसी के घर पर देखा और वहीं से उनकी रुचि बढ़ी. उन्होंने हैदराबाद पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की और 2009 में वीआईटी वेल्लोर से बीटेक की डिग्री हासिल की.  ​​

उनके रिज्यूमे में किसी आईआईटी या एनआईटी की डिग्री का जिक्र नहीं था, लेकिन इससे उनके उच्च लक्ष्य रखने का इरादा कभी नहीं रुका. लेकिन जब उन्होंने हायर एजुकेशन पाने के लिए अमेरिका के विश्वविद्यालयों में आवेदन किया तो, उन्हें लगातार रिजेक्शन मिला.

सौमिथ चिंतला के मुताबिक, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलने से पहले उन्हें 27 विश्वविद्यालयों से रिजेक्शन मिला था. इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिला, जहां उन्होंने मशहूर AI विशेषज्ञ लेकुन के साथ काम किया, जो डीप लर्निंग के क्षेत्र के बड़े नामों में से एक हैं. 

नौकरी की तलाश भी नहीं थी आसान 

यूनिवर्सिटी में एडमिशन तो बस एक छोटी सी परेशानी थी लेकिन असली परेशानी तो पढ़ाई पूरे करने के बाद सामने आई. सौमिथ चिंतला को AI इंडस्ट्री में कदम रखने के दौरान कई बार नौकरी के लिए रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. वीजा की समस्या के कारण उन्हें कुछ समय के लिए अमेरिका भी छोड़ना पड़ा, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार सीखते रहे, आवेदन करते रहे और खुद को बेहतर बनाते रहे. आखिरकार 2014 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें META  AI की फंडामेंटल एआई रिसर्च (FAIR) टीम में काम करने का मौका मिला. 

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फिर शुरू हुआ असली सफर 

मेटा में काम करते हुए सौमिथ चिंतला ने PyTorch बनाने में अहम भूमिका निभाई. यह एक ऐसा टूल है, जिसने AI रिसर्च को आसान और बेहतर बनाने में मदद की. PyTorch की मदद से डेवलपर्स और शोधकर्ता आसानी से AI मॉडल बना और उन पर काम कर सकते हैं. कुछ ही समय में यह दुनिया भर की यूनिवर्सिटी, रिसर्च लैब और बड़ी टेक कंपनियों में लोकप्रिय हो गया. चिंतला ने करीब 8 साल तक इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया और इसे दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले AI फ्रेमवर्क में शामिल कर दिया. 

शुरू हुआ नया किस्सा 

मेटा में करीब 11 साल काम करने और वाइस प्रेसिडेंट तक पहुंचने के बाद सौमिथ चिंतला ने एक नई चुनौती लेने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने OpenAI की पूर्व CTO मीरा मुराती की AI कंपनी थिंकिंग मशीन्स लैब से जुड़ गए, जहां वह अब मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) के पद पर काम कर रहे हैं. 

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