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नौकरी पर AI का खतरा! ServiceNow CEO का दावा, 30% छात्रों को नहीं मिलेगी नौकरी

सर्विसनाउ (ServiceNow) के सीईओ बिल मैकडरमॉट (Bill McDermott) ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में AI की वजह से युवाओं के लिए नौकरी पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. उनका कहना है कि जैसे-जैसे कंपनियां काम करने के लिए AI और ऑटोमेशन का यूज कर रही हैं, वैसे-वैसे फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल जॉब्स के मौके कम होते जा रहा हैं. 

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ServiceNow के सीईओ का कहना है कि 30% छात्रों को नौकरी नहीं मिलेगी क्योंकि अब ज्यादातर काम AI करेगा. (Photo : Pexels)
ServiceNow के सीईओ का कहना है कि 30% छात्रों को नौकरी नहीं मिलेगी क्योंकि अब ज्यादातर काम AI करेगा. (Photo : Pexels)

कई सालों से छात्रों को यह बताया जाता रहा है कि अच्छी डिग्री एक स्थिर नौकरी पाने का सबसे सुरक्षित रास्ता है. लेकिन अब यह धारणा सवालों के घेरे में आ गई है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उन कामों को संभालने लगी है जिनके लिए पहले नए कर्मचारियों की जरूरत होती थी. इसके लिए बड़े टेक कंपनियों के सीईओ इसे लेकर अपनी राय रखते आए हैं. लेकिन इस बार चेतावनी सर्विसनाउ के सीईओ बिल मैकडरमॉट ने दी है. उन्होंने कहा है कि नौकरी चाहने वाले युवाओं को आने वाले समय में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने अनुमान लगाया है कि लगभग 30 प्रतिशत कॉलेज छात्रों को नौकरी नहीं मिलेगी, जिसका कारण है AI. 

बिल मैकडरमॉट ने भविष्य को लेकर चिंता जताया है. उन्होंने कहा कि आज के समय में कॉलेज से निकलने वाले युवाओं में करीब 9% बेरोजगारी है, लेकिन आने वाले कुछ सालों में यह बढ़कर करीब 30% तक पहुंच सकती है. साफ शब्दों में कहे तो, उनका मानना है कि भविष्य में एक-तिहाई (करीब 30 प्रतिशत) युवा ग्रेजुएट को नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि कंपनियां अब एंट्री-लेवल पर लोगों को रखने के बजाय AI सिस्टम से काम कर रही हैं.

इन कामों के लिए हो रहा है AI का इस्तेमाल 

इस चिंता की सबसे बड़ी वजह है AI एजेंट. ये ऐसे स्मार्ट टूल है जो, अपने आप कई काम कर सकते हैं. आजकल इनका इस्तेमाल कोड लिखने, सॉफ्टवेयर टेस्ट करने, ग्राहकों के सवालों का जवाब देने और डेटा संभालने जैसे कामों में तेजी से बड़ रहे हैं. ये वही काम हैं जो पहले नई नौकरी शुरू करने वाले (फ्रेशर्स) करते थे और वहीं से सीखते थे. लेकिन अब AI ये काम खुद करने लगा है, इसलिए एंट्री-लेवल जॉब्स कम होती जा रही हैं. 

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युवाओं को करना होगा मुश्किलों का सामना 

बिल मैकडरमॉट ने इसपर बात करते हुए साफ कहा है कि लगातार हो रहे बदलाव के चलते युवाओं के लिए अपनी काबिलियत दिखाना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने बताया कि जब ज्यादातर काम AI एजेंट करने लगेंगे, तो कंपनियों में युवाओं को खुद को साबित करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाएगा. वहीं, दूसरी ओर कंपनियां एआई के यूज को कम करने का नाम नहीं ले रही. सर्विसनाउ ने अच्छे एआई टूल बनाने के लिए पहले ही ओपनएआई के साथ साझेदारी कर ली है. इससे पता चलता है कि कंपनियां एआई को कम लोगों के साथ अधिक काम करने के तरीके के रूप में देखती है, जिससे कम लोगों के साथ ज्यादा काम किया जा सके. AI की मदद से कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इससे यह सवाल उठ रहा है कि नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के मौके कहां और कैसे मिलेंगे?

फायदेमंद है AI

बिल मैकडरमॉट ने AI की क्षमता को लेकर पॉजिटिव राय जताई है. उन्होंने कहा है कि आने वाले कुछ सालों में कंपनियां बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच बना सकती हैं, जो पहले केवल मानव संसाधनों से संभव नहीं है. इसी दौरान इंटरव्यू के बाद कंपनी के शेयरों में हल्की बढ़ोतरी भी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक AI आधारित विकास को लेकर काफी उत्साहित हैं. 

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कई नौकरियां अभी हैं सुरक्षित 

तमाम चिंताओं के बीच कुछ राहत भरी खबर भी सामने आई है. एंथ्रोपिक की ओर से की गई एक रिसर्च से पता चलता है कि कई पेशे अभी भी एआई के लिए आसानी से संभालने योग्य नहीं हैं. रिपोर्ट में इस बात का विश्लेषण किया गया कि वर्कप्लेस में एआई का किस तरह यूज किया जा रहा और पाया कि इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है. उदाहरण के लिए, कंप्यूटर और गणित से संबंधित कामों में, एआई कई कामों में मदद कर सकता है. लेकिन वास्तविकता में इसका उपयोग केवल लगभग एक तिहाई कामों में ही किया जा रहा है. इससे भी खास बात यह है कि कई काम ऐसे हैं, जो सिर्फ इंसान ही कर सकता हैं क्योंकि उनमें हाथ से काम करना और परिस्थितियों को समझकर फैसला लेना जरूरी होता है. यहां तक कि कानून जैसे सेक्टर में, अदालत में किसी व्यक्ति की तरफ से बहस करना या उसका प्रतिनिधित्व करना AI के लिए संभव नहीं है. 

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रिपोर्टर- अंकिता गर्ग
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