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JEE में 53/360 नंबर, फिर दुनिया के टॉप यूनिवर्सिटी में मिला एडमिशन, दूसरों को भी दे रहे काम

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र जस्टिन सातो ने लिंक्डइन पर बताया कि उन्हें JEE में 360 में से सिर्फ 53 नंबर मिले थे. लेकिन उनका यह पोस्ट कुछ देर में ही वायरल हो गया, जिसके बाद भारत की JEE आधारित IIT प्रवेश प्रणाली और अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों में एडमिशन प्रक्रिया को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई. इतने कम नंबर आने के बावजूद छात्र को प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में एडमिशन मिल गया है. 

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कम नंबर के बाद भी मिल गया एडमिशन.
कम नंबर के बाद भी मिल गया एडमिशन.

संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) में 360 में से सिर्फ 53 अंक आने पर ज्यादातर छात्रों का IIT में पढ़ने का सपना अधूरा रह जाता है. लेकिन जस्टिन सातो के साथ ऐसा नहीं हुआ. उन्हें दुनिया की तीन सबसे प्रतिष्ठित विश्ववद्यालयों स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, प्रिंसटन विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) में एडमिशन मिल गया. जस्टिन ने हाल ही में लिंक्डइन पर अपना JEE स्कोर शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो गया. इसके बाद भारत की JEE आधारित प्रवेश प्रणाली और अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों में एडमिशन प्रक्रिया को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई. 

शेयर की जेईई का स्कोर

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में फिजिक्स और मैथ्स की पढ़ाई कर रहे जस्टिन सातो ने बताया कि उन्हें JEE में 360 में से सिर्फ 53 अंक (करीब 15%) मिले थे. इसके बावजूद उन्हें स्टैनफोर्ड, प्रिंसटन और कैलटेक जैसे दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एडमिशन मिल गया. उन्होंने कहा कि यह स्कोर किसी छात्र की पूरी पढ़ाई की क्षमता नहीं बताता. यह सिर्फ इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाता है. 

आईआईटी में एडमिशन लेना है मुश्किल 

सातो ने आगे कहा कि आईआईटी में एडमिशन पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि यहां एक प्रतिशत से भी कम छात्रों का चयन होता है. इससे पता चलता है कि यह परीक्षा कितनी कठिन और प्रतिस्पर्धी है. उन्होंने यह भी कहा कि इस अनुभव से उन्हें भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा को करीब से समझने का मौका मिला. उनके मुताबिक, भारत में तकनीकी प्रतिभा बहुत शानदार है और यहां इंजीनियर बनने की चाह रखने वाले छात्रों के बीच मुकाबला दुनिया में सबसे कठिन है. 

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कैसे होता है अमेरिका में मूल्यांकन 

सातो की पोस्ट ने भारत और अमेरिका के परीक्षा प्रणाली पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जहां एक ओर भारत में IIT में एडमिशन काफी हद तक जेईई स्कोर पर निर्भर करता है. वहीं, स्टैनफोर्ड, प्रिंसटन और कैलटेक जैसे विश्वविद्यालय सिर्फ परीक्षा के अंकों के आधार पर एडमिशन नहीं देते हैं. वे पढ़ाई के साथ-साथ रिसर्च, दूसरी गतिविधियों, छात्र के उपलब्धियों को भी देखते हैं. 

केवल नंबर ही नहीं हैं जरूरी 

सातो ने बताया कि उनका स्टार्टअप स्कार्मी भारत में अपना काम बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत इंजीनियरिंग प्रतिभाओं का बड़ा केंद्र है. स्टूडेंट और एंटरप्रेन्योर जस्टिन सातो ने हाल ही में स्टार्टअप 'स्कार्मी'की सह-स्थापना की है. इसके लिए उन्होंने भारत से काम शुरू करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप के मौके के लिए जुड़ने का भी इनविटेशन दिया है. उन्होंने छात्रों और युवा इनोवेटर्स को कंपनी से जुड़ने का न्योता दिया और बताया कि स्कार्मी में इंटर्न की हायरिंग चल रही है. इस पोस्ट के बाद इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि अलग-अलग शिक्षा प्रणालियां छात्रों की प्रतिभा को कैसे पहचानती हैं. आईआईटी में प्रवेश मुख्य रूप से परीक्षा के अंकों पर आधारित होता है, जबकि अमेरिका के बड़े विश्वविद्यालय छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी उपलब्धियों और अन्य क्षमताओं को भी महत्व देते हैं. 

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