दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शनों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के दौरान चर्चा में आए सौरव दास और आशुतोष रांका एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन से जुड़ा है. दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. पुलिस ने उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन क्षेत्र में प्रवेश करने और पहले शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
इस घटनाक्रम के बाद दोनों युवा नेताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है. लेकिन आखिर ये दोनों कौन हैं? कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने से पहले क्या करते थे, इनकी पढ़ाई कहां हुई और इनका प्रोफेशनल सफर कैसा रहा है? आइए जानते हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी से पहले क्या करते थे आशुतोष रांका?
आशुतोष रांका कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल हैं. इंजीनियरिंग और पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कंसल्टिंग के क्षेत्र में काम किया. छात्र राजनीति से लेकर युवाओं के आंदोलनों तक का उनका सफर उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आया है.
IIT कानपुर से B.Tech, LSE से की मास्टर डिग्री
आशुतोष रांका की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी अलग है. उन्होंने IIT कानपुर से मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) से मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MPA) की पढ़ाई की.
रांका छात्र जीवन में भी सक्रिय रहे. वह IIT कानपुर में स्टूडेंट्स जिमखाना के अध्यक्ष रहे. इंजीनियरिंग और सार्वजनिक प्रशासन की पढ़ाई के बाद उन्होंने कंसल्टिंग के क्षेत्र में काम किया. उनके पेशेवर अनुभव में एक नामी कंसल्टिंग फर्म से जुड़ाव का भी उल्लेख मिलता है.
छात्र राजनीति से युवा आंदोलन तक का सफर
आशुतोष रांका की पहचान अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में होती है. पार्टी के साथ जुड़ने के बाद वह युवाओं, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय नजर आए हैं. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी ने उन्हें चर्चा में ला दिया.
उनकी तकनीकी शिक्षा, पब्लिक पॉलिसी की समझ और कंसल्टिंग का अनुभव उनके पेशेवर सफर के अहम हिस्से हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में हिरासत और न्यायिक कार्रवाई के बाद उनकी भूमिका एक बार फिर सुर्खियों में है.
सौरव दास कौन हैं, क्या है उनकी पढ़ाई-लिखाई?
कॉकरोच जनता पार्टी के दूसरे चर्चित चेहरे सौरव दास का पेशेवर सफर आशुतोष रांका से अलग रहा है. उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की और खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया. CJP के प्रवक्ता के रूप में वह संगठन की बात रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं.
एमिटी यूनिवर्सिटी से की पत्रकारिता की पढ़ाई
India Today की 30 जुलाई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट और सौरव दास की LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2016 से 2019 के बीच एमिटी यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.
कॉलेज के दौरान उन्होंने दिसंबर 2018 से जनवरी 2019 तक एक मीडिया संस्थान के न्यूज डेस्क पर इंटर्नशिप की. इसके बाद अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 तक उन्होंने पोस्ट वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में काम किया. मई 2022 से मार्च 2023 तक वह GLG में कंटेंट एसोसिएट रहे.
सौरव दास 2020 से स्वतंत्र पत्रकारिता भी कर रहे हैं. उनकी निजी वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्टों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दाखिल आवेदनों का रिकॉर्ड मौजूद है. उनकी पत्रकारिता में सरकारी संस्थानों की जवाबदेही, सूचना की पारदर्शिता और सार्वजनिक महत्व के मुद्दे शामिल रहे हैं.
खोजी पत्रकारिता से CJP के प्रवक्ता तक
सौरव दास ने पत्रकारिता के दौरान सरकारी कामकाज और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े सवालों पर रिपोर्टिंग की. RTI के जरिए जानकारी जुटाना और दस्तावेजों के आधार पर मुद्दे उठाना उनके काम का अहम हिस्सा रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान उनके भाषणों, इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई. अब CJP के प्रवक्ता के रूप में वह संगठन के प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल हैं.
क्यों चर्चा में हैं सौरव दास और आशुतोष रांका?
कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने के बाद दोनों युवाओं के मुद्दों और सरकारी जवाबदेही से संबंधित अभियानों के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यह मुद्दा प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक स्थलों पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति को लेकर बहस का हिस्सा बन गया है.
फिलहाल, इस मामले में पुलिस के आरोपों और पार्टी की प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है. न्यायिक हिरासत में भेजा जाना अपने आप में आरोपों का दोष सिद्ध होना नहीं है.