अच्छी सैलरी वाली नौकरी का ऑफर मिले तो ज्यादातर लोग उसे करियर में आगे बढ़ने का मौका मानते हैं. लेकिन क्या केवल सैलरी मिलने से आपकी जिंदगी बेहतर हो जाती है? इसी सवाल को उठाती एक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. इसमें एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उसके दोस्त को टियर-2 शहर में हर महीने 84 हजार रुपये मिलते हैं. लेकिन अब उसे पुणे में 1.25 लाख रुपये महीने की नौकरी का ऑफर मिला है. हालांकि, इसके बावजूद दोस्त ने उसे तुरंत नौकरी बदलने के बजाय मौजूदा शहर में ही सैलरी बढ़वाने की कोशिश करने की सलाह दी. लेकिन क्यों?
क्यों दोस्त ने पुणे जाने से किया मना?
जयदीप नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने दोस्त की नौकरी के ऑफर के बारे में पोस्ट किया. उन्होंने बताया कि उनका दोस्त फिलहाल एक टियर-2 सिटी में रहता है और हर महीने 84 हजार रुपये की कमाई करता है. वहां पर उसके पास अपना घर है, इसलिए उसे किराये पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते. जयदीप के मुताबिक, मौजूदा शहर में उसके दोस्त का रहन-सहन भी कम खर्चीला है. यहां खाने-पीने, किराने और बच्चों की पढ़ाई पर कम खर्च होता है. इसके अलावा ट्रैफिक में कम समय बर्बाद होता है और हर महीने ज्यादा सेविंग हो पाती है.
पुणे में रहने का बढ़ेगा खर्च
जयदीप ने अपनी पोस्ट में आगे बताया कि अगर उसका दोस्त पुणे वाले जॉब ऑफर को एक्सेप्ट करता है, तो वहां रहने का खर्च बढ़ेगा, जो टियर-2 सिटी में नहीं देना पड़ रहा था. उनके अनुमान के मुताबिक, वहां एक अच्छे 2 BHK फ्लैट का किराया 20 से 30 हजार रुपये तक हो सकता है. वहीं, किराने और खाने-पीने पर 12 से 20 हजार रुपये, बिजली-पानी, इंटरनेट और मोबाइल बिल पर 3 से 5 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं. इसके अलावा आने-जाने और ईंधन पर 5 से 10 हजार रुपये, जबकि बाहर खाने, मनोरंजन और दूसरे छोटे-मोटे खर्चों पर 8 से 15 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं. इस तरह इनपर हर महीने करीब 50 हजार से 80 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं. हालांकि, वास्तविक खर्च इलाके और रहन-सहन के तरीके के हिसाब से अलग हो सकता है.
ज्यादा सैलरी का मतलब ज्यादा बचत नहीं
जयदीप का कहना है कि नौकरी बदलने का फैसला केवल सैलरी देखकर नहीं करना चाहिए. पुणे में 1.25 लाख रुपये मिलने पर दोस्त की कमाई जरूर 41 हजार रुपये बढ़ जाएगी, लेकिन नए शहर में रहने का खर्च भी बढ़ेगा. ऐसे में यह जरूरी नहीं कि महीने के आखिर में उसकी बचत भी उतनी ही बढ़ जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौजूदा कंपनी में 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी बढ़ोतरी मिल सकती है, तो शहर बदले बिना भी कमाई बढ़ाने का रास्ता निकल सकता है. उनके मुताबिक, नौकरी बदलने से पहले यह हिसाब लगाना जरूरी है कि ज्यादा सैलरी मिलने के बाद खर्च काटकर हाथ में कितने पैसे बचेंगे.
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया?
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी है. कुछ लोगों ने जयदीप की बात से सहमति जताई और कहा कि नौकरी बदलते समय रहने का खर्च और बचत दोनों देखना जरूरी है. वहीं, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि पुणे में मिलने वाले बेहतर करियर विकल्पों और भविष्य में सैलरी बढ़ने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए.