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5 भाई-1 बहन और पिता थे गैस हॉकर... 10वीं पास रिंकू सिंह बनेंगे सरकारी अफसर, भाई ने सुनाई संघर्ष की कहानी

रिंकू का सफर एक साधारण परिवार से शुरू होकर क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने तक प्रेरणादायक रहा है. उनके पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी करते थे और रिंकू ने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट में भी मेहनत की. अब वे सरकारी पद पर तैनात होकर युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं. इस समारोह में अन्य 14 खिलाड़ियों को भी सरकारी पद दिए गए.

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क्र‍िकेटर रिंकू सिंह अपने पिता के साथ, अब वो दुन‍िया में नहीं रहे, Image Credit: Rinku Singh Instagram Account
क्र‍िकेटर रिंकू सिंह अपने पिता के साथ, अब वो दुन‍िया में नहीं रहे, Image Credit: Rinku Singh Instagram Account

अलीगढ़ की गलियों से निकलकर क्र‍िकेट वर्ल्ड में नाम चमकाने वाले रिंकू सिंह को आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद नियुक्ति पत्र सौंपेंगे. रिंकू अब सिर्फ 'क्रिकेट स्टार' नहीं, बल्कि यूपी सरकार में RSO (रीजनल स्पोर्ट्स ऑफ‍िसर) के पद पर तैनात होकर 'अफसर' बनेंगे. aajtak.in ने रिंकू सिंह के बड़े भाई सोनू सिंह से खास बातचीत की और जाना कि कैसे एक गैस हॉकर का बेटा, जो कभी पढ़ाई में औसत था, आज पूरे देश का गौरव बन गया है.

तीन स्कूलों का सफर और 10वीं की पढ़ाई

रिंकू सिंह की पढ़ाई की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. भाई सोनू सिंह बताते हैं कि रिंकू का मन किताबों से ज्यादा मैदान पर लगता था. रिंकू ने शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ के मॉडर्न कॉन्वेंट स्कूल (गूबला गैस गोदाम) से अपनी शिक्षा शुरू की. फिर शानदार क्रिकेट के हुनर की वजह से उनका दाखिला दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में हो गया. फिर क्रिकेट की व्यस्तता और अभ्यास के चलते उन्होंने ओपन स्कूल से अपनी 10वीं की परीक्षा पास की.

सोनू सिंह कहते हैं कि रिंकू का मन क्र‍िकेट में लगता था, यही वजह थी कि पढ़ाई में हमेशा से एवरेज स्टूडेंट रहे, लेकिन 7-8 साल की उम्र से ही जब उन्होंने बैट पकड़ा तो हमें समझ आ गया था कि उनकी असली डिग्री मैदान पर ही मिलेगी.

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घर-घर गैस पहुंचाते थे पिता

रिंकू का परिवार बेहद साधारण है. उनके पिता खानचंद सिंह बरसों तक गैस सिलेंडर की डिलीवरी का काम करते थे. पांच भाइयों और एक छोटी बहन के भरे-पूरे परिवार में आर्थिक तंगी ने कई बार रास्ता रोका, लेकिन रिंकू का हौसला नहीं डिगा. रिंकू के बड़े भाई सोनू सिंह खुद एक क्रिकेटर रहे हैं और फिलहाल मउआ खेड़ा में अपनी क्रिकेट एकेडमी चलाते हैं.

सबसे छोटा भाई जीतू सिंह भी रिंकू के नक्शेकदम पर चलते हुए डिस्ट्रिक्ट लेवल पर क्रिकेट खेल चुका है. बाकी भाई प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां करके परिवार का हाथ बंटाते हैं.

सोनू सिंह भावुक होकर कहते हैं कि मुझे भी क्रिकेट में बहुत दिलचस्पी थी, लेकिन उस वक्त हमें ट्रायल्स और प्रक्रियाओं के बारे में ज्यादा पता नहीं था. जो सपना मैं पूरा नहीं कर सका, उसे छोटे भाई ने जी कर दिखा दिया.

जानकारी के मुताबिक एक वक्त था जब रिंकू को घर चलाने के लिए एक कोचिंग सेंटर में सफाई कर्मचारी की नौकरी का ऑफर मिला था. आज वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सीएम योगी उन्हें RSO (क्षेत्रीय खेल अधिकारी) की राजपत्रित पोस्ट सौंप रहे हैं. लखनऊ में आयोजित होने वाले समारोह में रिंकू के साथ अन्य 14 खिलाड़ियों को भी सरकारी पदों पर नियुक्ति दी जा रही है.
 

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