भारतीय वायु सेना (IAF) को अपना नया सेनापति मिल गया है. देश के सबसे अनुभवी और जांबाज सैन्य अफसरों में शुमार एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के नए चीफ (CAS) के रूप में कमान संभाल ली है.
6 दिसंबर 1986 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन होने वाले आशुतोष दीक्षित का पूरा करियर वीरता, सटीक प्लानिंग और अदम्य साहस की मिसाल रहा है. फ्रांस से मिराज-2000 विमानों को भारत लाने से लेकर कारगिल के आसमान में दुश्मन को धूल चटाने तक, उनका इतिहास उपलब्धियों से भरा हुआ है.
एनडीए से कॉकपिट तक: शानदार एकेडमिक और फ्लाइंग बैकग्राउंड
आशुतोष दीक्षित नेशनल डिफेंस एकेडमी (69 NDA) के पूर्व छात्र हैं. उन्हें 6 दिसंबर 1986 को वायु सेना में बतौर फाइटर पायलट कमीशन मिला था. उन्होंने बांग्लादेश से स्टाफ कोर्स और नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस कॉलेज (57 NDC) से स्नातक की डिग्री हासिल की.
3300+ घंटे की उड़ान
एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में उनके पास मिराज-2000, फाइटर, ट्रेनर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स पर 3300 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है.
जब फ्रांस से उड़ा लाए 10 मिराज, कारगिल में भी दिखाया दम
नए वायु सेना प्रमुख के नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं, जिन्होंने भारतीय वायु सेना का मस्तक ऊंचा किया है. इनमें ऑपरेशन सफेद सागर व रक्षक उनके नाम है. इसमें कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) और सीमा पर तनाव के दौरान चले ऑपरेशन रक्षक में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
फिर विंग कमांडर रहते हुए उन्हें फ्रांस से 10 नए मिराज-2000 विमानों को सुरक्षित भारत लाने का जिम्मा मिला. बिना किसी चूक के उन्होंने दो बैच में इस मिशन को अंजाम दिया. यही नहीं, उन्होंने पश्चिमी सीमा पर मिराज-2000 के 9वें स्क्वाड्रन की कमान संभाली और उसे सबसे कम समय में कॉम्बैट-रेडी बनाया. ग्रुप कैप्टन रहते हुए उन्होंने 6 बड़ी विदेशी कंपनियों के फाइटर जेट्स का बेहद जटिल और बारीक फील्ड ट्रायल व टेक्निकल इवैल्यूएशन लीड किया था.
मिले हैं ये मेडल
वायु सेना मेडल: मिराज स्क्वाड्रन के संचालन, फ्रांस से एयरक्राफ्ट फेरी और मिशन प्लानिंग सिस्टम (MIPSY) में सुधार के लिए (26 जनवरी 2006).
विशिष्ट सेवा मेडल: MMRCA प्रोजेक्ट के बेमिसाल नेतृत्व और फाइटर जेट्स के इंडिजिनियस अपग्रेड प्रोजेक्ट्स के लिए (26 जनवरी 2011).
अति विशिष्ट सेवा मेडल: वायु सेना में उनकी अति विशिष्ट सेवाओं के लिए (26 जनवरी 2023).
टॉप कमांड से लेकर चीफ बनने तक का सफर
अपने 38 से अधिक सालों के करियर में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर और कमान स्तर पर कई शीर्ष रणनीतिक पद संभाले हैं. आइए जानते हैं वो किन महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं.
कमांडिंग ऑफिसर: फाइटर टेस्ट स्क्वाड्रन (ASTE बेंगलुरु) और 9वें स्क्वाड्रन (ग्वालियर).
डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ (DCAS): वायु सेना में प्रोजेक्ट्स और प्लानिंग का काम संभाला.
AOC-in-C मध्य वायु कमान: प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमान के चीफ रहे.
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CIDS): तीनों सेनाओं के तालमेल को मजबूत करने वाली एकीकृत रक्षा स्टाफ समिति के प्रमुख रहे.
वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ (VCAS): उप वायु सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद अब वे वायु सेना प्रमुख (Chief of Air Staff) की सर्वोच्च कुर्सी पर आसीन हुए हैं.