संडे की सुबह तक वीकेंड काफी अच्छा लग रहा होता है. नींद पूरी करना, दोस्तों से मिलना, बाहर जाना या घर पर आराम करना, सब ठीक चलता है. लेकिन जैसे-जैसे संडे की शाम होती है, दिमाग में मंडे घूमने लगता है. कल ऑफिस जाना है, काम पूरा करना है, मीटिंग है, जल्दी उठना है… और देखते ही देखते छुट्टी का आखिरी दिन भी स्ट्रेस में बदल जाता है. इसी एहसास को 'संडे स्केयरीस' कहा जाता है.
छुट्टी खत्म होने का डर
संडे स्केयरीस सिर्फ मंडे पसंद न करने की बात नहीं है. संडे शाम को दिमाग आराम के मोड से निकलकर आने वाले कामों के बारे में सोचने लगता है. अगले दिन की जिम्मेदारियां, काम की लंबी लिस्ट और ऑफिस का दबाव छुट्टी खत्म होने की बेचैनी बढ़ा देते हैं. कई लोगों को शनिवार की शाम ज्यादा अच्छी लगती है, क्योंकि तब अगले दिन सुबह ऑफिस जाने की टेंशन नहीं होती.
YouGov के अगस्त 2021 के एक सर्वे में भी इस एहसास को लेकर जानकारी सामने आई थी. अमेरिका में काम या पढ़ाई की जिम्मेदारी वाले जेन जी के 39% लोगों ने बताया कि उन्हें हर हफ्ते या ज्यादातर हफ्तों में संडे स्केयरीस फील होता है. मिलेनियल्स में ये आंकड़ा 38% था. इससे पता चलता है कि काम या पढ़ाई के अगले दिन की टेंशन कई युवाओं के लिए आम अनुभव हो सकती है.
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जेन जी में क्यों दिखता है ये एहसास?
जेन जी के लिए काम और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस काफी मायने रखता है. ऐसे में पूरा वीकेंड अपने लिए बिताने के बाद मंडे की रूटीन में लौटना थोड़ा मुश्किल लग सकता है.
ऑफिस की अधूरी जिम्मेदारियां, आने वाली मीटिंग्स, काम का दबाव और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत भी इस बेचैनी को बढ़ा सकती हैं. खासकर जब किसी को अपने काम को लेकर पहले से तनाव हो, तो संडे की शाम यह और बढ़ सकता है.
संडे की शाम क्यों होती है भारी?
सुबह तक दिमाग छुट्टी के मूड में रहता है. लेकिन शाम होते-होते मंडे की टेंशन बढ़ने लगती है. ऑफिस के मैसेज देखना, अगले दिन के कपड़े निकालना या अलार्म लगाना भी कुछ लोगों को काम पर लौटने की याद दिला सकता है.
इस परेशानी को समझने के लिए ये देखना जरूरी है कि स्ट्रेस की वजह क्या है. अगर टेंशन अधूरे कामों की वजह से है, तो उनकी छोटी-सी लिस्ट बनाकर जरूरी काम पहले तय किए जा सकते हैं. अगले दिन के कपड़े और जरूरी सामान पहले से तैयार रखने से सुबह की भागदौड़ भी कम हो सकती है. संडे शाम को थोड़ा वक्त अपनी पसंद के कामों के लिए रखना भी मददगार हो सकता है.
संडे स्केयरीस का मतलब ये नहीं कि कोई अपनी जॉब से नफरत करता है. कई बार ये सिर्फ आराम से काम के मोड में लौटने की बेचैनी होती है. लेकिन अगर हर हफ्ते ये स्ट्रेस बहुत ज्यादा महसूस हो, तो काम के दबाव और अपनी रिटीन पर ध्यान देना जरूरी है.