आईआईटी की डिग्री, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए और अपनी कंपनी को 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,700 करोड़ रुपये) में बेच दिया. कागज पर तो यह एक सपनों जैसा करियर लगता है. लेकिन गोल्डकास्ट के सह-संस्थापक पलाश सोनी के अनुसार, सफलता डिग्री से कम और उन जोखिमों को उठाने से अधिक मिली जिन्हें दूसरे नहीं देख सकते थे. क्रिएटर विराज अला की ओर से इंस्टाग्राम पर लिए इंटरव्यू में सोनी ने एक छात्र से उद्यमी बनने तक की अपनी पूरी जर्नी के बारे में बात की. इसके अलावा उन्होंने फंडिंग संबंधी परेशानियों, नेतृत्व, छंटनी और उस मानसिकता के बारे में खुलकर बात की जिसने उन्हें गोल्डकास्ट बनाने में मदद की, जो एक एआई-संचालित बी2बी वीडियो प्लेटफॉर्म है जिसे दिसंबर 2025 में ब्लैकस्टोन को बेच दिया था.
कैसा रहा है IIT कानपुर से हार्वर्ड का सफर?
जब इंटरव्यू के दौरान अला ने उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो सोनी ने बताया कि उन्होंने IIT कानपुर से ग्रेजुएशन किया और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से MBA का पढ़ाई की है. गोल्डकास्ट शुरू करने से पहले भी उनके पास टेक्नोलॉजी और बिजनेस का अच्छा अनुभव था. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech-MTech की डुअल डिग्री ली थी. इसके बाद क्वालकॉम और बोइंग जैसी कंपनियों में इंटर्नशिप भी की थी.
पढ़ाई के बाद बेंगलुरु में की नौकरी
गोल्डकास्ट शुरू करने से पहले सोनी ने बेंगलुरु की एक कंपनी इनमोबी में प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में काम किया और अकिता नाम के एक ग्राहक के साथ मिलकर CRM स्टार्टअप शुरू किया. हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने 2020 में किशोर कोथंदरमन और आशीष श्रीनिवास के साथ गोल्डकास्ट की शुरुआत की. कंपनी ने 40 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटाई, कई बड़ी कंपनियों के साथ काम किया और बाद में बड़ा अधिग्रहण हासिल किया.
अभी-अभी अपनी कंपनी बेच दी
जब इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि नब आजकल क्या करते हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुआ कहा कि हाल ही में अपनी कंपनी बेच दी है. गोल्डकास्ट के बड़े अधिग्रहण पर बात करते हुए उन्होंने इसे एक शानदार सौदा बताया. सोनी का कहना है कि सिर्फ डिग्री से सफलता नहीं मिलती. उनके मुताबिक, जीवन में आगे बढ़ने के लिए नए काम करने की हिम्मत, गलतियों से सीखना और लगातार कोशिश करना जरूरी है. उन्होंने कॉलेज के दिनों में गेम खेलने का उदाहरण देते हुए बताया कि शुरुआत में वह अनुभवहीन थे, लेकिन कोशिश करते रहे कि गलतियों से सीख सकें. उनकी यही सोच उनके काम आए.
कम संसाधन बनी बड़ी ताकत
सोनी ने आगे बताया कि गोल्डकास्ट के पास शुरुआत में ज्यादा पैसा या संसाधन नहीं थे. लेकिन इसी कमी ने उन्हें ज्यादा फोकस के साथ काम करने के लिए मजबूर किया और यही आगे चलकर उनकी ताकत बन गई. उन्होंने कहा कि कई निवेशक शुरुआत में उनके आइडिया पर भरोसा नहीं करते थे, लेकिन टीम को अपने विजन पर पूरा विश्वास था. सोनी के मुताबिक, दूसरों को जो चीज नजर नहीं आई, उस पर भरोसा रखना ही गोल्डकास्ट की सबसे बड़ी ताकत बनी.
उठा छंटनी का मुद्द
बातचीत के दौरान छंटनी का मुद्दा भी उठा. जब सोनी से पूछा गया कि उन्होंने लोगों और नेतृत्व के बारे में क्या सीखा, तो उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपनी टीम के लिए उपलब्ध रहने की कोशिश करते थे. गोल्डकास्ट में 150 लोगों की टीम होने के बावजूद उन्होंने हर व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से जुड़ने की कोशिश की. सोनी के मुताबिक, सफल लोगों की सबसे बड़ी खासियत बौद्धिक ईमानदारी होती है. उनके लिए कंपनी बनाना सिर्फ बड़ी डिग्री या प्रतिभा का नहीं, बल्कि सही सोच, अपने फैसलों पर विश्वास और लगातार मेहनत का नतीजा है.