ईरान ने पिछले 24 घंटों में अमेरिका को बड़ा झटका दिया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने गुड फ्राइडे को दो अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराए. पहला F-15E स्ट्राइक ईगल था, जिसमें दो क्रू थे. एक पायलट बच गया. दूसरा अभी लापता है. दूसरा विमान A-10 वॉरथॉग था, जिसका पायलट भी सुरक्षित बच गया.
इसके अलावा सर्च एंड रेस्क्यू के लिए भेजे गए दो HH-60W ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलीबारी का शिकार हुए, लेकिन वे सुरक्षित वापस लौट आए. ईरान का दावा है कि उसने एक नई एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया. यह घटना अमेरिका के दावे को झुठला रही है कि उसके विमान ईरानी आसमान पर पूरी तरह काबिज हैं. आराम से एक्शन ले पा रहे हैं.
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ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2026 में अमेरिका के 35 एयरक्राफ्ट नष्ट या क्षतिग्रस्त
28 फरवरी से 3 अप्रैल 2026 तक चले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है. कुल मिलाकर कई तरह के विमान और ड्रोन तबाह या क्षतिग्रस्त हुए. इनकी कीमत करीब 2 बिलियन डॉलर्स यानी 18,596 करोड़ रुपए के आसपास है.
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ये आंकड़े दिखाते हैं कि ईरान ने सिर्फ लड़ाकू विमानों को ही नहीं, बल्कि सपोर्ट एयरक्राफ्ट, टैंकर और ड्रोन को भी निशाना बनाया है.
ईरान की मजीद एयर डिफेंस सिस्टम ने कैसे मारा?
ईरान ने F-15E और A-10 जैसे विमानों को मार गिराने में मजीद (Majid) इंफ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया. यह सिस्टम 2021 से ईरान के पास है. खास बात यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं करता. यह पैसिव इंफ्रारेड डिटेक्शन और प्रॉक्सिमिटी फ्यूज का इस्तेमाल करता है. मतलब यह कोई रडार सिग्नल नहीं भेजता, इसलिए अमेरिकी विमान पहले से इसे डिटेक्ट नहीं कर पाते.

मजीद की रेंज 8 किलोमीटर दूर तक और 6 किलोमीटर ऊंचाई तक है. इसके इंफ्रारेड सेंसर्स 15 किलोमीटर तक टारगेट देख सकते हैं. इसे काशेफ-99 फेज्ड-एरे सिस्टम से जोड़ा गया है, जो ट्रैकिंग को 30 किलोमीटर तक बढ़ा देता है. एक साथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है.
इसमें 8 मिसाइलें तैयार रहती हैं. F-35, F-15E और A-10 जैसे विमान कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे, इसलिए मजीद ने उन्हें आसानी से निशाना बनाया. F-35 का गर्म इंजन भी इसका कमजोर पॉइंट बना.
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कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें और वर्बा मैनपैड्स

ईरान ने कुछ मामलों में कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें (MANPADS) भी इस्तेमाल कीं. हाल ही में ईरान ने रूस से 500 Verba MANPADS हासिल किए थे. ये दुनिया की सबसे एडवांस्ड शॉर्ट-रेंज सिस्टम हैं. ये बैकग्राउंड हीट के बीच भी टारगेट ढूंढ सकती हैं. ये मिसाइलें मोबाइल हैं. आसानी से जगह बदल सकती हैं. डिटेक्ट करना मुश्किल है.
चाइनीज HQ-9B और मोबाइल लॉन्चर की रणनीति
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान चाइनीज HQ-9B लंबी दूरी की मिसाइल सिस्टम भी इस्तेमाल कर रहा है. इसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों गाइडेंस हैं, जो स्टेल्थ विमानों को भी निशाना बना सकती है. इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बच सकती है.
ईरान ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल ली है. पहले की फिक्स्ड एयर डिफेंस साइटों की जगह अब ज्यादातर सिस्टम अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी, सुरंगों और पहाड़ी इलाकों में छिपे हुए हैं. मोबाइल लॉन्चर शूट एंड स्कूट तरीके से काम करते हैं – मिसाइल दागो और तुरंत जगह बदल लो. इसी वजह से अमेरिका-इजरायल के रोजाना हमलों के बावजूद ईरान की आधी से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं.
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ट्रंप के दावे को बड़ा झटका
राष्ट्रपति ट्रंप ने 24 मार्च को कहा था कि हमारे विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं. ईरान कुछ नहीं कर सकता. लेकिन सिर्फ एक हफ्ते बाद ईरान ने साबित कर दिया कि उसकी एयर डिफेंस अभी भी सक्रिय है. ये घटनाएं दिखाती हैं कि ईरान ने असिमेट्रिक वारफेयर में महारत हासिल कर ली है. कम खर्च वाले, रडार-फ्री सिस्टम से वो अमेरिका के महंगे और एडवांस्ड विमानों को नुकसान पहुंचा रहा है.
अभी अमेरिका के लिए एयर कैंपेन ज्यादा खतरनाक हो गई है. F-15E में एक क्रू अभी भी लापता है. ईरानी टीवी ने US पायलटों को जिंदा पकड़ने वाले को इनाम देने का ऐलान किया है. व्हाइट हाउस ने कन्फर्म किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी ब्रीफिंग दी गई है.