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अमेरिका ने माना- 2000 करोड़ रुपये का MQ-4C ट्राइटन क्रैश, ईरान की जंग में कुल 25 ड्रोन गिरे

अमेरिका ने पर्सियन गल्फ में 2000 करोड़ रुपये का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन खो दिया है. 9 अप्रैल 2026 को ड्रोन क्रैश हो गया. शुरू में ईरान पर हमला करने का आरोप था, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की कि यह क्रैश था. कोई जवान घायल नहीं हुआ. इसी दौरान 24 MQ-9 रीपर ड्रोन्स भी खोए, जिनकी कीमत 6727 करोड़ रुपये है.

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ये है अमेरिकी नौसेना का एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन जो फारस की खाड़ी में क्रैश हुआ है. (Photo: US Navy)
ये है अमेरिकी नौसेना का एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन जो फारस की खाड़ी में क्रैश हुआ है. (Photo: US Navy)

अमेरिका ने अपने सबसे महंगे निगरानी ड्रोनों में से एक को खो दिया है. 9 अप्रैल 2026 को पर्सियन गल्फ में अमेरिकी नौसेना का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन क्रैश हो गया. अमेरिकी नौसेना सुरक्षा कमांड ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. ड्रोन की कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये है. शुरू में खबरें आई थीं कि ईरानी सेना ने इसे मार गिराया, लेकिन अमेरिका ने साफ कहा है कि ड्रोन क्रैश हो गया है. कोई जवान घायल नहीं हुआ.

9 अप्रैल को MQ-4C ट्राइटन ड्रोन पर्सियन गल्फ के ऊपर उड़ान भर रहा था. अचानक यह फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया. अमेरिकी नौसेना सुरक्षा कमांड की रिपोर्ट में लिखा है – 9 अप्रैल 2026 (स्थान गोपनीय – ऑपरेशनल सिक्योरिटी) MQ-4C क्रैश; किसी को चोट नहीं आई. इस घटना को क्लास A मिसहैप माना गया है, यानी 25 लाख डॉलर से ज्यादा का नुकसान होने पर इसे इस श्रेणी में रखा जाता है. 

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US confirms loss

जब ड्रोन गायब हुआ तो कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरानी बलों ने इसे मार गिराया. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इलाके में दोनों देशों के बीच तनाव बहुत ज्यादा था. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने अब साफ कर दिया है कि यह क्रैश था, न कि कोई हमला. फिर भी इलाके की स्थिति को देखते हुए लोग अब भी सवाल पूछ रहे हैं कि क्या तकनीकी खराबी हुई या कोई और वजह थी.

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MQ-4C ट्राइटन ड्रोन क्या है?

यह ड्रोन नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन कंपनी ने बनाया है. यह RQ-4 ग्लोबल हॉक का समुद्री वर्जन है. यह हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) कैटेगरी का ड्रोन है. यानी यह 50,000 फीट से ऊपर उड़ता है. 24 घंटे से ज्यादा हवा में रह सकता है. 7400 समुद्री मील तक की दूरी तय कर सकता है. इसका मुख्य काम समुद्र पर निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाना और खतरे का पता लगाना है. इसमें 360 डिग्री मल्टी-इंटेलिजेंस सेंसर लगे हैं जो बड़े क्षेत्र को एक साथ देख सकते हैं.

US confirms loss

यह ड्रोन रीयल टाइम में डेटा दूसरे सैन्य जहाजों और विमानों को भेजता है. इससे अमेरिकी सेना को समुद्री इलाकों में लगातार नजर रखने में मदद मिलती है. नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के अनुसार, यह दूसरे ड्रोनों से चार गुना ज्यादा क्षेत्र कवर करता है. उड़ान के घंटे 60 प्रतिशत कम लगते हैं और लागत आधी होती है.

6727 करोड़ रुपये के 24 MQ-9 रीपर ड्रोन्स भी खोए

इसी दौरान एक और चौंकाने वाली खबर आई. चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने CBS न्यूज के हवाले से बताया कि अप्रैल के पहले हफ्ते से अब तक अमेरिका ने ईरान के साथ तनाव में 24 MQ-9 रीपर ड्रोन्स खो दिए हैं. इनकी कुल कीमत करीब 720 मिलियन डॉलर यानी 6727 करोड़ रुपये है. ये ड्रोन्स न सिर्फ निगरानी करते हैं बल्कि सटीक हमले भी कर सकते हैं.

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US confirms loss

240 मिलियन डॉलर का एक ट्राइटन ड्रोन और 720 मिलियन डॉलर के 24 रीपर ड्रोन्स – कुल मिलाकर अमेरिका को एक हफ्ते में ही अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. ये ड्रोन्स अमेरिकी सेना की आंख और कान माने जाते हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे समुद्री रास्ते पर इनकी निगरानी बहुत जरूरी है. जहां तेल का सबसे बड़ा व्यापार होता है.

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इस घटना से पर्सियन गल्फ में तनाव और बढ़ सकता है. अमेरिका अब अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने की कोशिश करेगा. वहीं ईरान इस क्षेत्र में अपनी मजबूती दिखाने की कोशिश कर रहा है. दोनों देशों के बीच युद्धविराम चल रहा है, लेकिन ऐसे नुकसान से नई उलझनें पैदा हो सकती हैं.

अमेरिकी नौसेना ने अभी क्रैश की असली वजह नहीं बताई है. जांच चल रही है. लेकिन इतना साफ है कि समुद्री इलाके में अमेरिका की ड्रोन ताकत पर बड़ा झटका लगा है. आने वाले दिनों में इस इलाके की सुरक्षा स्थिति पर इस घटना का असर जरूर दिखेगा.

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