ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों में क्लस्टर बम (क्लस्टर मुनिशन्स) का इस्तेमाल अब एक आम हथियार बना लिया है. जून 2025 के 12 दिन के युद्ध में यह सिर्फ कुछ मिसाइलों में था, लेकिन मार्च 2026 के मौजूदा संघर्ष में ईरान ने अब तक करीब 300 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से लगभग आधी यानी 50 प्रतिशत में क्लस्टर वॉरहेड लगे थे.
यह एक बड़ा बदलाव है. इजरायल की सेना (IDF) ने पुष्टि की है कि ईरान अब क्लस्टर बम वाले वॉरहेड को लगभग रोजाना इस्तेमाल कर रहा है, जिससे नागरिक इलाकों में छोटे-छोटे बम बिखर रहे हैं. मार्च 2026 में इन हमलों से कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं.
यह भी पढ़ें: 13 साल से कोमा में हरीश राणा... कैसे पूरी होगी 'मृत्यु की इच्छा'?

खोर्रमशहर-4 जैसी मिसाइलों में 50 से 80 छोटे सबमुनिशन्स पैक किए जा सकते हैं, जो 10 किलोमीटर तक के दायरे में फैल जाते हैं. क्लस्टर बम क्या हैं, ये कैसे काम करते हैं, ईरान ने इन्हें कब-कैसे इस्तेमाल किया और अब 2026 में नई स्थिति क्या है.
क्लस्टर बम क्या हैं?
क्लस्टर बम एक ऐसा हथियार है जो हवा में फटकर दर्जनों या सैकड़ों छोटे-छोटे बमों यानी सबमुनिशन्स को बिखेर देता है. ये छोटे बम एक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं. घनी आबादी वाले इलाकों या सैन्य ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचाते हैं. इन्हें वाइड-एरिया डिस्पर्सल वेपन्स भी कहा जाता है क्योंकि ये एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं.
यह भी पढ़ें: क्या ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछा दिए बारूदी सुरंग... आने-जाने वाले जहाजों पर बड़ा खतरा
ईरान की मिसाइलों में इस्तेमाल हुए सबमुनिशन्स का वजन लगभग 2.5 किलोग्राम या उससे ज्यादा होता है. हर एक में छोटे रॉकेट जैसी विस्फोटक शक्ति होती है. ये बम हल्के होते हैं लेकिन उनकी संख्या और फैलाव उन्हें बेहद खतरनाक बना देते हैं.
क्लस्टर बम कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे विस्फोटक, आग लगाने वाले या एंटी-टैंक, लेकिन ईरान वाली मिसाइलों में ज्यादातर विस्फोटक प्रकार के सबमुनिशन्स हैं जो नागरिक क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. 120 से ज्यादा देशों ने इन हथियारों पर बैन लगा रखा है, लेकिन ईरान और इजरायल दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
क्लस्टर बम कैसे काम करते हैं?
क्लस्टर बम एक बड़े बम या मिसाइल के अंदर पैक किए जाते हैं. जब मिसाइल अपने लक्ष्य के पास पहुंचती है तो उसका वॉरहेड हवा में, आमतौर पर 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर फट जाता है. इससे छोटे-छोटे बम निकलते हैं जो एक बड़े क्षेत्र में बिखर जाते हैं. फिर गुरुत्वाकर्षण की वजह से जमीन पर गिरकर विस्फोट करते हैं.
यह भी पढ़ें: ईरान ले आया बैटरी वाला ड्रोन, इजरायल के खिलाफ करेगा इस्तेमाल... जानिए नए वैरिएंट की खासियत
खोर्रमशहर-4, सेज्जिल-2, एमाद और गद्र जैसी ईरानी मिसाइलें अब क्लस्टर वॉरहेड ले जा सकती हैं, जिनमें 50 से 80 सबमुनिशन्स तक फिट हो जाते हैं. वॉरहेड डिजाइन विशेष रूप से बनाया जाता है जिसमें दर्जनों छोटे बम एक कंटेनर में रखे होते हैं जो हवा में खुल जाता है.

मिसाइल में सेंसर या टाइमर होता है जो तय ऊंचाई पर वॉरहेड को फटने का निर्देश देता है. छोटे बम बिना किसी नियंत्रण के फैलते हैं. जमीन पर गिरते ही फटने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. हालांकि कई बार तकनीकी खराबी से कुछ बम नहीं फटते जो लंबे समय तक खतरा बने रहते हैं. 2026 के हमलों में ये बम बिना गाइडेंस के थे जिससे वे और भी अनियंत्रित हो गए. इजरायल की एयर डिफेंस को भी चुनौती दी.
यह भी पढ़ें: ड्रोन-मिसाइलें और धुआं-धुआं आसमान...देखिए अंतरिक्ष से कैसी दिख रही ईरान की जंग
ईरान ने क्लस्टर बम का इस्तेमाल कैसे किया?
19 जून 2025 को ईरान ने इजरायल पर करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से कम से कम एक में क्लस्टर बम का वॉरहेड था. यह मिसाइल गुश दान क्षेत्र के ऊपर फटी और लगभग 20 छोटे बम बिखेर दिए जो 8 किलोमीटर के दायरे में फैल गए. उस समय 89 लोग घायल हुए थे लेकिन मौत नहीं हुई थी. अमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि 2025 के युद्ध में ईरान ने क्लस्टर मुनिशन्स का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए किया.
अब 2026 के मौजूदा युद्ध में स्थिति और गंभीर हो गई है. ईरान ने अब तक 300 से ज्यादा मिसाइलें दागी हैं. आधी में क्लस्टर वॉरहेड थे. मार्च 2026 में हाल के हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, दो गंभीर रूप से घायल हुए और पहले एक हमले में 12 लोग घायल हुए थे.

1 मार्च 2026 को सेंट्रल इजरायल में सबमुनिशन्स गिरे और 9 मार्च को एक और हमला हुआ जिसमें क्लस्टर बमों ने कई जगहों पर असर दिखाया. इजरायल की होम फ्रंट कमांड ने चेतावनी दी है कि कई बम नहीं फटे हैं. लोग इनसे दूर रहें. खोर्रमशहर-4 मिसाइल को इन हमलों में खासतौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्लस्टर बम क्यों हैं इतने खतरनाक?
क्लस्टर बम अपनी अंधाधुंध प्रकृति और लंबे समय तक खतरे के कारण बहुत विवादास्पद हैं. अब 2026 में इनका इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि एक मिसाइल से बिखरे छोटे बम 10 किलोमीटर के दायरे में फैल सकते हैं जिससे नागरिक और सैन्य लक्ष्य दोनों प्रभावित होते हैं. गुश दान और सेंट्रल इजरायल जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ये बहुत घातक साबित हो रहे हैं.
यह भी पढ़ें: ... वो 13 देश जिन्होंने वॉर में जानमाल का नुकसान झेला, जानिए कहां गिरीं ड्रोन-मिसाइलें
क्लस्टर बम सटीक निशाना नहीं लगाते इसलिए ये बिना किसी भेदभाव के घरों, अस्पतालों और सड़कों को नुकसान पहुंचाते हैं. सबसे बड़ा खतरा न फटने वाले बम यानी डड्स से है. कई सबमुनिशन्स जमीन पर गिरने के बाद भी नहीं फटते और सालों तक खतरा बने रहते हैं.
इन हथियारों से अब मौतें भी हो रही हैं, जो 2025 से ज्यादा गंभीर है. अंतरराष्ट्रीय संगठन इनके इस्तेमाल की निंदा कर रहे हैं क्योंकि ये लंबे समय तक निर्दोष लोगों को खतरे में डालते हैं. यह पूरी स्थिति दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में क्लस्टर बम जैसे हथियार कितने अनियंत्रित और मानवीय संकट पैदा करने वाले हो गए हैं.