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खामेनेई की मौत... इजरायल ने हमले के लिए ब्लू स्पैरो मिसाइल का किया इस्तेमाल, जानिए ताकत

इजरायल ने ईरान पर हमले में ब्लू स्पैरो एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया, जिससे खामेनेई की मौत हुई. यह मिसाइल 2000 किमी रेंज वाली, अत्यंत सटीक और हाइपरसोनिक क्लास की है. इराक में इसका मलबा मिलने से पुष्टि हुई. शुरू में एरो डिफेंस टेस्ट के लिए बनी, बाद में ऑफेंसिव वॉरहेड के साथ मॉडिफाई की गई.

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ये लाल घेरे में लगी है ब्लू स्पैरो मिसाइल. (Photo: Israeli Defence Ministry)
ये लाल घेरे में लगी है ब्लू स्पैरो मिसाइल. (Photo: Israeli Defence Ministry)

अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच युद्ध का चौथा दिन चल रहा है. इस युद्ध में दोनों तरफ से बहुत खतरनाक मिसाइलों और हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने पूरी दुनिया को हिला दिया है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने खामेनेई को मारने के लिए ब्लू स्पैरो मिसाइल का इस्तेमाल किया. 

यह मिसाइल इतनी सटीक है कि 1000 किलोमीटर दूर से भी छोटे से निशाने को बिल्कुल सही जगह पर मार सकती है. इराक में हमले के रास्ते पर इस मिसाइल का कुछ मलबा मिला है जो इस बात की पुष्टि करता है कि इजरायल ने इसे ईरान पर हमले में इस्तेमाल किया. यह हमला 28 फरवरी 2026 को हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान में बड़े हमले किए.

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ब्लू स्पैरो मिसाइल क्या है और यह कैसे काम करती है?

ब्लू स्पैरो मिसाइल इजरायल की राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स कंपनी ने बनाई है. यह एक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है यानी लड़ाकू विमान से लॉन्च की जाती है. शुरू में यह मिसाइल इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम को टेस्ट करने के लिए टारगेट मिसाइल के रूप में इस्तेमाल होती थी. इसमें ब्लैक स्पैरो, ब्लू स्पैरो और सिल्वर स्पैरो तीन प्रकार की मिसाइलें हैं जो अलग-अलग बैलिस्टिक मिसाइलों की नकल करती हैं. 

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 Blue Sparrow missile

ब्लू स्पैरो की लंबाई लगभग 6.5 मीटर, वजन 1900 किलोग्राम और रेंज 2000 किलोमीटर तक है. यह बहुत तेज स्पीड से उड़ती है. हाई बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर जाती है. बाद में इसे मॉडिफाई करके इसमें वॉरहेड लगाया गया ताकि यह दुश्मन के टारगेट पर हमला कर सके.

इसका गाइडेंस सिस्टम इतना एडवांस्ड है कि यह छोटे से टारगेट जैसे टेबल या कुर्सी को भी सटीक मार सकती है. इजरायल के F-15 लड़ाकू विमान से यह लॉन्च की जाती है. दुश्मन के एयर डिफेंस से बचकर दूर के लक्ष्य पर पहुंचती है.

खामेनेई की मौत कैसे हुई और ब्लू स्पैरो का रोल क्या था?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े हमले किए. इस ऑपरेशन में इजरायल ने तेहरान में खामेनेई के कंपाउंड पर कई प्रिसिजन मिसाइलें दागीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्लू स्पैरो या इसके वेरिएंट जैसे ब्लैक स्पैरो और गोल्डन होराइजन का इस्तेमाल किया गया. 

यह भी पढ़ें: ईरान ने दागी ऐसी मिसाइल जिसे रोकने में इजरायल को भी आई मुश्किल

CIA ने महीनों से खामेनेई की लोकेशन ट्रैक की और जब वे एक जगह पर थे तो इजरायल ने हमला किया. हमले में खामेनेई के साथ उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोग मारे गए जबकि उनके बेटे मोहम्मद को गंभीर चोट आई. 

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इजरायल के लड़ाकू विमानों ने 1000 किलोमीटर से ज्यादा दूर से मिसाइलें दागीं ताकि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम तक न पहुंच सकें. इराक में मिले मलबे से पुष्टि हुई कि ब्लू स्पैरो का इस्तेमाल हुआ क्योंकि इसका बूस्टर और पार्ट्स वही मिले. यह हमला इतना सटीक था कि खामेनेई के कंपाउंड को सीधे निशाना बनाया गया.

 Blue Sparrow missile

यह मिसाइल ईरान पर हमले में क्यों खास है?

ब्लू स्पैरो की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी रेंज और हाई स्पीड है. यह मिसाइल हाइपरसोनिक क्लास के करीब है. दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा दे सकती है. इस युद्ध में इजरायल ने रैम्पेज, रॉक्स, एयर लोरा जैसी अन्य स्टैंड-ऑफ मिसाइलों के साथ ब्लू स्पैरो का इस्तेमाल किया ताकि ईरान के एयर डिफेंस, रडार और कमांड सेंटर को पहले नष्ट कर सके.

इससे बाद के हमले आसान हो गए. ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागीं लेकिन इजरायल का दावा है कि उसने ईरान की कई महत्वपूर्ण जगहों को निशाना बनाया. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का शोक मनाया जा रहा है. नया लीडर चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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युद्ध का असर और आगे क्या होगा?

यह युद्ध अब चौथे दिन में है और दोनों तरफ से मिसाइल हमले जारी हैं. ईरान ने इजरायल, बहरीन, कुवैत जैसे देशों पर मिसाइलें दागीं जिससे कई जगहों पर नुकसान हुआ. अमेरिका और इजरायल ने कहा है कि वे ईरान के रेजीम को कमजोर करने के लिए हमले जारी रखेंगे. 

खामेनेई की मौत से ईरान की लीडरशिप में बड़ा बदलाव आया है. क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है. ब्लू स्पैरो जैसी एडवांस्ड मिसाइलों ने दिखाया है कि इजरायल की तकनीक कितनी मजबूत है. 

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