ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई थी. पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के ठिकानों पर मिसाइल और एयर स्ट्राइक्स किए. यह ऑपरेशन न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति का प्रतीक बना, बल्कि एक साल बाद भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारियों को पूरी तरह नई ऊंचाई पर ले गया है.
इस एक साल में भारत ने रक्षा खरीद, तकनीकी उन्नति और रणनीतिक बदलावों में अभूतपूर्व प्रगति की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और सामरिक स्वायत्तता का उदाहरण बताया. आइए विस्तार से समझते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत की रक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत हुई.
नई डॉक्ट्रिन और तकनीकी आत्मनिर्भरता
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की नई डॉक्ट्रिन को जन्म दिया - आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते. इसका मतलब है कि आतंक के किसी भी हमले का भारत निर्णायक जवाब देगा. इस सिद्धांत को मजबूत करने के लिए सेनाओं ने अपनी क्षमताएं बढ़ाईं.
यह भी पढ़ें: होर्मुज पर ईरान का खेल खराब करने की तैयारी, पोर्ट से पाइपलाइन तक इन विकल्पों पर काम कर रहे खाड़ी देश

कोविड के बाद भारत आत्मनिर्भरता की राह पर था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को गति दी. रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन युद्ध, लेयर्ड एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में रिकॉर्ड खरीदारी की. ऑपरेशन के तुरंत बाद भारतीय सेना ने सैकड़ों नए ड्रोन खरीदे, जिनमें कामिकेज और एफपीवी ड्रोन शामिल हैं. इससे सेना की लड़ाकू क्षमता कई गुना बढ़ गई.
सेना का पुनर्गठन: नई टैक्टिकल फॉर्मेशन्स
ऑपरेशन सिंदूर के बाद थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना में नई फोर्स मल्टीप्लायर्स बनाने की घोषणा की. इनमें रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी, भैरव बटालियन और स्पेशलाइज्ड ड्रोन यूनिट्स (अश्नि प्लाटून) शामिल हैं. उत्तरी सीमाओं पर इन नई इकाइयों को तैनात किया गया है. नई पीढ़ी के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाया गया. उत्तरी क्षेत्रों में सड़क, कनेक्टिविटी और सैनिकों के रहने की सुविधाएं भी काफी सुधारी गईं. ये बदलाव सेना को और तेज, स्मार्ट और तैयार बनाते हैं.
यह भी पढ़ें: प्रचंड गर्मी ने पैदा किया 149 साल पहले आए 'मेगा अल नीनो' का खौफ, 4% आबादी का हो गया था सफाया
तीनों-सेनाओं का बेहतर समन्वय
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला. यह संयुक्त कार्रवाई कई सालों की तैयारी का नतीजा थी. ऑपरेशन के बाद तीनों सेनाओं का पश्चिमी सीमा पर कई अभ्यास हुए, जिनमें एक्सरसाइज त्रिशूल सबसे महत्वपूर्ण था. इसमें सभी सेनाओं के हथियार और सैनिक एक साथ लड़े. यह ऑपरेशन का सबसे बड़ा सबक है. अब भारतीय सशस्त्र बल भविष्य की किसी भी लड़ाई में पूर्ण रूप से संयुक्त होकर काम करेंगे.
मिशन सुदर्शन चक्र: रक्षा में नई पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा की. इसका मकसद दुश्मन की घुसपैठ को रोकना और भारत की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाना है. इस मिशन के तहत 2035 तक पूरे देश में सुरक्षा कवच फैलाया जाएगा. इससे हर सार्वजनिक जगह सुरक्षित होगी. यह मिशन भारत की सामरिक स्वायत्तता को मजबूत करेगा और किसी भी खतरे का तेज, सटीक और शक्तिशाली जवाब देगा.
DAC की प्रमुख मंजूरियां
ऑपरेशन सिंदूर के बाद डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने रक्षा खरीद में रिकॉर्ड काम किया. पिछले साल कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर हुए. जुलाई 2025 में 1.05 लाख करोड़ रुपये के 10 प्रस्ताव पास हुए, जिनमें आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम और सरफेस-टू-एयर मिसाइल शामिल हैं.
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक साल में भारत ने अपने वेपन सिस्टम में कितने हथियार जोड़े, कितने मॉडिफाई किए? पूरी लिस्ट
अगस्त में 67,000 करोड़ रुपये, अक्टूबर में 79,000 करोड़ रुपये और दिसंबर में फिर 79,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पास हुए. इनमें नाग मिसाइल, लोइटर म्यूनिशन, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 मेंटेनेंस और कई ड्रोन सिस्टम शामिल हैं. ये सभी खरीद स्वदेशी हैं.

रिकॉर्ड डिफेंस बजट और नया प्रोक्योरमेंट मैनुअल
2025-26 में रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल से 9.53 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें 1.80 लाख करोड़ रुपये कैपिटल खरीद के लिए हैं. 75 प्रतिशत बजट स्वदेशी खरीद के लिए रखा गया. अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 जारी किया, जो नवंबर से लागू हुआ. इससे 1 लाख करोड़ रुपये की रेवेन्यू खरीद आसान हो गई.
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट और ड्रोन निर्माण
किसी भी कमी को दूर करने के लिए 2025 में दो चरणों में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट की मंजूरी दी गई. 13 स्कीम्स पर 1,958 करोड़ रुपये खर्च किए गए. ड्रोन, काउंटर ड्रोन, प्रिसीजन एम्यूनिशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे क्षेत्रों में 29 स्कीम्स पहले ही लागू हो चुकी हैं.
यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों के लिए एडवाइजरी जारी, लारक द्वीप से दूर रहें
सेना के 515 आर्मी बेस वर्कशॉप और कई अन्य यूनिट्स ने स्वदेशी ड्रोन बनाने की क्षमता विकसित की. ऑपरेशन के 8 महीनों में 819 ड्रोन (सर्विलांस, कामिकेज और एफपीवी) बनाए गए. हर सैनिक को ट्रेनिंग दी जा रही है.
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रेड लाइन तय कर दी और आत्मनिर्भरता की राह तेज की. आक्रामक खरीद, नई तकनीक और संयुक्त तैयारियों से सेना अब पहले से ज्यादा तेज, स्मार्ट और निर्णायक जवाब देने को तैयार है. अब कोई भी दुश्मन सोच-समझकर ही कदम बढ़ाएगा.