अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर को ISI का जंतर-मंतर प्रदर्शन से कनेक्शन बताना महंगा पड़ गया. पंजाब सरकार ने आईपीएस गुरप्रीत भुल्लर को कमिश्नर के पद से हटा दिया. ये मामला अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. चलिए आपको विस्तार से बताते हैं, कैसे एक बयान दो दिनों में कमिश्नर भुल्लर के हटाए जाने की वजह बन गया.
पंजाब पुलिस ने पहले दावा किया था कि कथित ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल के सदस्य जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन स्थल की रेकी कर चुके थे. लेकिन अगले ही दिन पुलिस ने इस बयान पर सफाई जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने पुलिस कमिश्नर के बयान के चुनिंदा हिस्से काटकर और भ्रामक कैप्शन के साथ वायरल कर दिए, जिससे पूरे बयान का गलत मतलब निकाला गया. पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोपी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और उनका जंतर-मंतर आंदोलन से कोई संबंध नहीं था. पुलिस के मुताबिक, उनकी कथित साजिश प्रदर्शनकारियों को पेट्रोल बम से निशाना बनाने की थी.
पंजाब पुलिस ने यह भी कहा कि पुलिस कमिश्नर के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है. इस मामले में भ्रामक वीडियो और पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई. इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब अमृतसर के पुलिस कमिश्नर (CP) का तबादला कर दिया गया है, जिसके बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं.
4 अगस्त 2026, पंजाब पुलिस का दावा
पंजाब पुलिस ने 4 अगस्त को बड़ा दावा करते हुए बताया था कि अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहे दो सीमा पार आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में चार नाबालिगों समेत कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इनके कब्जे से तीन अवैध पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस, चार पेट्रोल बम और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद हुई.
गिरफ्तार आरोपियों में वंश कुमार, अनमोल सिंह उर्फ साहिल, हरमन सिंह उर्फ हम्मू, सुखदेव सिंह, सुखमन सिंह और चार किशोर शामिल हैं. डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी विदेश में बैठे ISI हैंडलर्स के निर्देश पर युवाओं की भर्ती, अवैध हथियार जुटाने, सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने और पंजाब में शांति भंग करने की साजिश रच रहे थे.
जांच में यह भी पता चला कि रेलवे ट्रैक के पास निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और उनकी फुटेज विदेशी हैंडलर्स तक भेजी जा रही थी. पुलिस के मुताबिक इन कैमरों की फंडिंग अमृतसर सेंट्रल जेल में बंद सुखदेव सिंह ने, जेल में बंद हरमन सिंह उर्फ हम्मू के कहने पर, पेटीएम के जरिए की थी. दोनों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर इस मामले में गिरफ्तार किया गया है.
मुख्य आरोपी अनमोल सिंह, उसके साथियों और रेलवे ट्रैक के पास लगाए गए कैमरों से जुड़ी जांच अब सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को सौंप दी गई है. पुलिस इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और अन्य आतंकी गतिविधियों से जुड़े संबंधों की भी जांच कर रही है. हरमन और सुखदेव पहले भी राजासांसी थाने में दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले में चार ग्लॉक पिस्तौल बरामद होने के केस में आरोपी हैं.
पुलिस ने एक अन्य खुफिया सूचना के आधार पर अलग अभियान चलाकर दो नाबालिगों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से एक देसी पिस्तौल, दो पेट्रोल बम और एक लाइटर मिला. पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे अपने दो अन्य साथियों सुखमन सिंह और एक अन्य किशोर के साथ मिलकर कई बार साजिश को अंजाम देने की कोशिश कर चुके थे. इसके बाद पुलिस ने दोनों अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. इस पूरे मामले में पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कर आगे की जांच जारी है.
6 अगस्त 2026, पंजाब पुलिस की सफाई
इसके बाद फिर से पंजाब पुलिस ने 6 अगस्त को नया बयान जारी किया और बताया कि उनके 4 अगस्त के खुलासे को गलत तरीके से बताया गया है. पुलिस के मुताबिक कहानी कुछ यूं थी. पंजाब पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि 4 अगस्त को अमृतसर पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो को कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने एडिट करके भ्रामक तरीके से पेश किया है.
पुलिस के मुताबिक, वीडियो के कुछ हिस्सों को काटकर और उनके साथ ऐसे कैप्शन जोड़कर यह गलत संदेश देने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से संबंध था. पुलिस ने साफ कहा कि ऐसा कोई दावा उसकी ओर से नहीं किया गया था.
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि 4 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल यह कहा गया था कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी जंतर-मंतर गए थे, वहां रेकी की थी और पेट्रोल बम के जरिए प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे. पुलिस ने कभी यह नहीं कहा कि आरोपी प्रदर्शन में शामिल थे या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का इस आतंकी मॉड्यूल से कोई संबंध था. यानी प्रदर्शनकारी और गिरफ्तार आरोपी दोनों को जोड़कर देखना पूरी तरह गलत है.
पंजाब पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो की बैकग्राउंड फुटेज बदलकर, चुनिंदा हिस्से दिखाकर और भ्रामक कैप्शन लगाकर लोगों के बीच गलत धारणा बनाने की कोशिश की गई. हालांकि वीडियो की ऑडियो या मूल बयान से छेड़छाड़ नहीं की गई, लेकिन उसकी प्रस्तुति इस तरह की गई कि लोग वास्तविक बयान का गलत मतलब निकालें. पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है.