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CrPC Section 158: मजिस्ट्रेट को कैसे दी जाएंगी रिपोर्ट, यही बताती है धारा 158

सीआरपीसी की धारा 158 (Section 158) में पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी भी मामले की रिपोर्ट कैसे दी जाएंगी, यह बताया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 158 इस बारे में क्या प्रावधान बता रही है?

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 पुलिस के रिपोर्ट दाखिल करने से संबंधित है ये धारा पुलिस के रिपोर्ट दाखिल करने से संबंधित है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुलिस के रिपोर्ट दिए जाने से संबंधित है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में पुलिस (Police) और अदालत (Court) के काम से जुड़े कई प्रावधान मिलते हैं. ऐसे ही सीआरपीसी की धारा 158 (Section 158) में पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी भी मामले की रिपोर्ट कैसे दी जाएंगी, यह बताया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 158 इस बारे में क्या प्रावधान बता रही है? 

सीआरपीसी की धारा 158 (CrPC Section 158)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 158 में मजिस्ट्रेट के समक्ष (Before a magistrate) पुलिस द्वारा रिपोर्ट दिए जाने का प्रावधान (Reporting provision) किया गया है. CrPC की धारा 158 के मुताबिक-

(1) धारा 157 के अधीन मजिस्ट्रेट (Magistrate) को भेजी जाने वाली प्रत्येक रिपोर्ट (Every report), यदि राज्य सरकार (State government) ऐसा निदेश (directions) देती है, तो पुलिस (Police) के ऐसे वरिष्ठ अधिकारी (Senior officer) के माध्यम से दी जाएगी, जिसे राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश (General or special order) द्वारा इस निमित्त नियत (Intended) करे.

(2) ऐसा वरिष्ठ अधिकारी  (Senior officer) पुलिस थाने (Police Station) के भारसाधक अधिकारी (Officer in charge) को ऐसे अनुदेश (Instruction) दे सकता है जो वह ठीक समझे और उस रिपोर्ट पर उन अनुदेशों को अभिलिखित करने के पश्चात (after recording) उसे अविलंब मजिस्ट्रेट (Magistrate) के पास भेज देगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 157: जांच के लिए प्रक्रिया बताती है सीआरपीसी की धारा 157 

क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC)
दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. 

CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. CrPC में अब तक कई बार संशोधन (Amendment) भी किए जा चुके हैं.

 

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