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CrPC Section 156: संज्ञेय मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति बताती है ये धारा

सीआरपीसी की धारा 156 (Section 156) में संज्ञेय मामलों (cognizable cases) की जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति का प्रावधान (Provision) किया गया है. चलिए जान लेते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 156 इस बारे में क्या कहती है?

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जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति से जुड़ी है ये धारा जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में अदालत (Court) और पुलिस (Police) की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम कानूनी प्रावधान मौजूद हैं. इसी प्रकार से सीआरपीसी की धारा 156 (Section 156) में संज्ञेय मामलों (cognizable cases) की जांच के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति का प्रावधान (Provision) किया गया है. चलिए जान लेते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 156 इस बारे में क्या कहती है? 

सीआरपीसी की धारा 156 (CrPC Section 156)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 156 में संज्ञेय मामले की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति को परिभाषित किया गया है. CrPC की धारा 156 के मुताबिक-  

(1) कोई पुलिस थाने (Police station) का भारसाधक अधिकारी (officer in charge) मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना (without the order of a magistrate) किसी ऐसे संज्ञेय मामले (cognizable case) का अन्वेषण (Investigation) कर सकता है, जिसकी जांच या विचारण करने की शक्ति (Power of trial) उस थाने की सीमाओं के अंदर के स्थानीय क्षेत्र (Local area) पर अधिकारिता (Jurisdiction) रखने वाले न्यायालय (Court) को अध्याय 13 के उपबंधों के अधीन है.
 
(2) ऐसे किसी मामले में पुलिस अधिकारी (Police officer) की किसी कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम (Process) में इस आधार पर प्रश्नगत (in question) न किया जाएगा कि वह मामला ऐसा था जिसमें ऐसा अधिकारी (Officer) इस धारा के अधीन अन्वेषण (Investigation) करने के लिए सशक्त (strong) न था.

(3) धारा 190 के अधीन (Under section 190) सशक्त किया गया कोई मजिस्ट्रेट पूर्वोक्त प्रकार (Aforesaid type) के अन्वेषण का आदेश (Order of investigation) कर सकता है.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 155: असंज्ञेय मामलों की जानकारी और जांच से जुड़ी है सीआरपीसी की धारा 155 

क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC)
दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. 

CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. CrPC में अब तक कई बार संशोधन (Amendment) भी किए जा चुके हैं.

 

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