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CrPC Section 153: बाटों और मापों का निरीक्षण करने से जुड़ी है सीआरपीसी की ये धारा

सीआरपीसी की धारा 153 (Section 153) के तहत बाटों और मापों का निरीक्षण किए जाने का प्रावधान किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 153 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

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बाटों और मापों का निरीक्षण करना बताती है ये धारा बाटों और मापों का निरीक्षण करना बताती है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बाटों और मापों का निरीक्षण करना बताती है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में अदालत (Court) और पुलिस (Police) से जुड़े कई अहम कानूनी प्रावधान मौजूद हैं. इसी तरह से सीआरपीसी की धारा 153 (Section 153) के तहत बाटों और मापों का निरीक्षण किए जाने का प्रावधान किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 153 इस बारे में क्या प्रावधान करती है? 

सीआरपीसी की धारा 153 (CrPC Section 153)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 153 में दुकानों आदि में इस्तेमाल होने वाले बाटों और मापों का निरीक्षण किए जाने की प्रक्रिया को समझाया गया है. CrPC की धारा 153 के अनुसार-

(1) कोई पुलिस थाने (Police station) का भारसाधक अधिकारी (officer in charge) उस थाने की सीमाओं के अंदर किसी स्थान में, जब कभी उसके पास यह विश्वास करने का कारण (reason to believe) है कि ऐसे स्थान में कोई बाट, माप या तोलने के उपकरण (weights, measuring or measuring instruments) हैं जो खोटे (false) हैं, वहां प्रयुक्त या रखे हुए किन्हीं बाटों या मापों या तोलने के उपकरणों (instruments of weights or measures) के निरीक्षण या तलाशी के प्रयोजन (purpose of inspection or search) के लिए वारंट के बिना (without warrant) प्रवेश कर सकता है.

(2) यदि वह उस स्थान में कोई ऐसे बाट, माप या तोलने के उपकरण (weights, measuring or measuring instruments) पाता है जो खोटे हैं तो वह उन्हें अभिगृहीत (axiom) कर सकता है और ऐसे अभिग्रहण की इत्तिला (information of seizure) अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट (magistrate) को तत्काल देगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 152: सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान होने से रोकना बताती है धारा 152 

क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC)
दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. CrPC में अब तक कई बार संशोधन (Amendment) भी किए जा चुके हैं.

खराब व्यवहार की इजाजत नहीं देता कानून
कुछ प्रकार के मानव व्यवहार (Human behavior) ऐसे होते हैं जिसकी कानून इजाजत (Permission) नहीं देता. ऐसे व्यवहार करने पर किसी व्यक्ति को उसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं. खराब व्यवहार को अपराध या गुनाह (Crime or offense) कहते हैं. और इसके नतीजों को दंड यानी सजा (Punishment) कहा जाता है.

 

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