महाराष्ट्र में पुणे की येरवडा सेंट्रल जेल में सुरक्षा जांच के दौरान एक अंडरट्रायल कैदी की अनोखी तस्करी का खुलासा हुआ है. 21 वर्षीय आरोपी अदालत से सुनवाई के बाद जेल लौट रहा था. सामान्य तलाशी में तो कुछ नहीं मिला, लेकिन मेटल डिटेक्टर बजने पर अधिकारियों को उस पर शक हुआ. पूछताछ के बाद आरोपी ने कबूल किया कि उसने गांजा अपने मलाशय (रेक्टम) में छिपा रखा है.
मेटल डिटेक्टर ने खोला राज
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान हडपसर निवासी निहाल सिंह मुनासिंग टाक के रूप में हुई है. 18 जुलाई को उसे कोर्ट में पेशी के लिए येरवडा जेल से बाहर ले जाया गया था. सुनवाई के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे जब उसे वापस जेल लाया गया तो नियमानुसार उसकी सुरक्षा जांच की गई. पहली शारीरिक तलाशी में कोई प्रतिबंधित वस्तु नहीं मिली, लेकिन जैसे ही वह मेटल डिटेक्टर से गुजरा, मशीन ने अलार्म बजा दिया. दोबारा तलाशी लेने पर भी कुछ नहीं मिला, जिससे जेल अधिकारियों का शक और बढ़ गया.
पूछताछ में कबूल किया सच
बार-बार पूछताछ किए जाने पर आरोपी ने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि उसने गांजा अपने शरीर के अंदर, मलाशय में छिपा रखा है. इसके बाद जेल अधिकारियों ने आगे की जांच की और आरोपी के रेक्टम से करीब 11 ग्राम गांजा बरामद किया. यह गांजा सिल्वर फॉयल पेपर में लपेटकर छिपाया गया था. माना जा रहा है कि इसी फॉयल की वजह से मेटल डिटेक्टर ने सिग्नल दिया और आरोपी की साजिश नाकाम हो गई.
जेल प्रहरी की शिकायत पर FIR
इस मामले में येरवडा जेल के प्रहरी समाधान बाबूराव हलंकर ने येरवडा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी तक गांजा कैसे पहुंचा और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है.
गंभीर मामलों में आरोपी का नाम
पुलिस के अनुसार निहालसिंह टाक एक आदतन अपराधी है. वर्ष 2022 में उसने कथित तौर पर यवत इलाके में क्राइम ब्रांच की टीम पर फायरिंग की थी. इसके अलावा वर्ष 2024 में हडपसर में विवाद सुलझाने पहुंचे एक सहायक पुलिस निरीक्षक (API) पर दरांती से हमला करने के मामले में भी उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था. अब जेल के भीतर प्रतिबंधित नशीला पदार्थ ले जाने की कोशिश ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.