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महिला पुलिसकर्मियों के उस सीक्रेट ऑपरेशन की कहानी, जिससे खुली TCS में 'धर्म परिवर्तन रैकेट' की पोल

नासिक के TCS BPO कैंपस में कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के मामले में अब नया मोड आ गया है. इस मामले की SIT जांच में इंटरनेशनल कनेक्शन सामने आया है. साथ ही WhatsApp चैट और कई आरोपियों की भूमिका सामने आई है. पढ़ें पूरी कहानी.

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3D render of a crime scene tape against defocussed background
3D render of a crime scene tape against defocussed background

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के BPO कैंपस कथित तौर पर धर्म परिवर्तन, यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव का बड़ा नेटवर्क चलने की आशंका जताई जा रही है. इस मामले ने कॉर्पोरेट वर्कप्लेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह सिर्फ एक सामान्य उत्पीड़न का मामला नहीं बल्कि संगठित गतिविधियों का हिस्सा हो सकता है. अहम बात ये है कि इस मामले की शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया है, जिससे केस और संवेदनशील हो गया है.

इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में दावा किया गया कि कंपनी में काम करने वाली एक हिंदू महिला रमज़ान के रोज़े रख रही थी. इस जानकारी के आधार पर पुलिस को शक हुआ और उन्होंने गुप्त ऑपरेशन शुरू किया. यह ऑपरेशन धीरे-धीरे एक बड़े खुलासे में बदल गया, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.

पुलिस ने गुप्त जांच के तहत महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी के अंदर तैनात किया. इन अधिकारियों ने कैंपस के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी और कई अहम सबूत जुटाए. इस दौरान यह संकेत मिले कि कुछ टीम लीडर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे. जांच में सामने आया कि कर्मचारियों को निशाना बनाकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था.

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विदेशी कनेक्शन की पड़ताल
जांच के दौरान WhatsApp चैट से यह भी खुलासा हुआ कि मलेशिया से जुड़े एक संदिग्ध उपदेशक इरमान का नाम सामने आया है. आरोप है कि वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को उससे मिलवाया जाता था. इससे यह शक और गहरा गया कि यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. जांच एजेंसियां अब इस विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं.

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के अनुसार अब तक कम से कम 12 पीड़ितों की पहचान हो चुकी है. पहले यह संख्या 9 थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ और लोग सामने आए हैं. अब तक 9 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें 8 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं. इन सभी शिकायतों में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न, बलात्कार और धार्मिक दबाव शामिल हैं.

FIR के अनुसार, आरोपियों ने महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़ की और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. पीड़ितों की उम्र 18 से 25 साल के बीच बताई गई है. ये घटनाएं 2022 से लेकर 2026 तक लगातार चलती रहीं. इससे साफ है कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहा एक पैटर्न था.

पहली FIR में दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आरोप है कि इन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और एक महिला को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए. वहीं दूसरी FIR में रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप हैं. पीड़िता का कहना है कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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तीसरी और चौथी FIR में भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं. शफी शेख और तौसीफ अत्तर पर महिला कर्मचारियों को घूरने, अश्लील इशारे करने और निजी जीवन में दखल देने के आरोप लगे हैं. साथ ही धार्मिक भावनाओं को आहत करने के भी आरोप हैं. इससे यह मामला और गंभीर हो गया है. पांचवीं FIR में आरोप है कि कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और मांस खाने का दबाव बनाया गया. साथ ही धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया. 

छठी और सातवीं FIR में भी आरोपियों द्वारा छेड़छाड़, पीछा करने और अश्लील टिप्पणियों के आरोप दर्ज हैं. इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि कई लोग मिलकर इस नेटवर्क को चला रहे थे. आठवीं और नौवीं FIR में भी लगातार उत्पीड़न, शादी का दबाव और मानसिक तनाव देने के आरोप सामने आए हैं. पीड़ितों का कहना है कि आरोपी उन्हें लगातार नजर में रखते थे और डर का माहौल बनाते थे. इससे कई कर्मचारी मानसिक रूप से टूट गए थे.

इस मामले में अब तक जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, शफी शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी, अश्विनी चैनानी और निदा खान शामिल हैं. पुलिस ने अश्विनी चैनानी को हिरासत में लिया है, जबकि निदा खान अभी फरार है. उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

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जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी सर्वर से भेजे गए 78 ईमेल की जांच हो रही है. इसके अलावा अश्विनी चैनानी और तौसीफ अत्तर के बीच 38 बार बातचीत का रिकॉर्ड मिला है. इससे शक है कि कंपनी के अंदर ही एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसे छिपाने की कोशिश की गई.

निदा खान की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद अहम मानी जा रही है. आरोप है कि वह पीड़ित महिलाओं पर धार्मिक दबाव बनाती थी और आरोपियों का साथ देती थी. पुलिस के अनुसार वह WhatsApp ग्रुप का हिस्सा थी, जहां कर्मचारियों को टारगेट करने की रणनीति बनाई जाती थी. कई चैट डिलीट कर दी गई हैं, जिन्हें फोरेंसिक टीम रिकवर करने में जुटी है.

फिलहाल जांच एजेंसियां इस केस में विदेशी फंडिंग, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की गहन जांच कर रही हैं. मलेशिया कनेक्शन और संगठित नेटवर्क के एंगल से यह मामला और गंभीर हो गया है. पुलिस का फोकस अब फरार आरोपियों को पकड़ने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने पर है. आने वाले समय में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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