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सड़क चलते करोड़पति का कत्ल, संत रमताराम पर इल्जाम... सीसीटीवी ने खोला अनोखे कत्ल का राज, हैरान कर देगी कहानी

चित्तौड़गढ़ के अमीर कारोबारी और बीजेपी नेता रमेश ईनाणी की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में कथित संत रमताराम पर हत्या की साजिश रचने के आरोप सामने आए हैं. जिसका खुलासा खुद शूटर मनीष दुबे ने किया है. पढ़ें इस अनोखे कत्ल की पूरी कहानी.

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रमताराम ने कत्ल की सुपारी बनारस के शूटर मनीष दुबे को दी थी (फोटो-ITG)
रमताराम ने कत्ल की सुपारी बनारस के शूटर मनीष दुबे को दी थी (फोटो-ITG)

राजस्थान पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की कुछ तस्वीरें देखीं. तस्वीरों में एक भीड़ भरी सड़क नजर आती है. जिंदगी अपनी रफ्तार पर है. लोग अपने-अपने काम से जा रहे हैं. लेकिन तभी बीच सड़क पर कुछ ऐसा होता है, जिसके कुछ ही देर बाद पूरा शहर दहल जाता है.

11 नवंबर 2025, सुबह करीब साढ़े 11 बजे
सड़क पर लोगों की आवाजाही के बीच एक शख्स दूर से स्कूटी पर सवार होकर चला आ रहा है और जैसे ही वो कैमरे के फ्रेम में आता है, पीछे से बाइक पर आ रहा एक शख्स बहुत पास आकर उस स्कूटी सवार को कुछ कहता या करता हुआ दिखता है. और फिर लहरिया कट लगाते हुए वो बाइक सवार, स्कूटी वाले से आगे निकल जाता है. पहली नजर में ऐसा लगता है कि शायद बाइक से आगे निकलने वाले आदमी ने स्कूटी वाले को इशारे से कुछ बताने की कोशिश की है.

बाइक के आगे निकलते ही स्कूटी सवार थोड़ी देर के लिए बीच सड़क पर रुक जाता है. और फिर दोबारा आगे बढ़़ने की कोशिश करता है. लेकिन इसके बाद जो कुछ होता है, वो बिल्कुल अप्रत्याशित है. वो चंद कदम आगे बढ़ते ही अपनी स्कूटी समेत लड़खड़ाते हुए मुंह के बल सड़क पर गिर पड़ता है. आस-पास के लोग मदद के लिए पास आते हैं. पहले तो लोगों को माजरा समझ ही नहीं आता, लेकिन फिर जिस्म से रिसते खून और सड़क पर गिरे शख्स की हालत देख कर ये क्लियर हो जाता है कि वो किसी बीमारी या एक्सीडेंट की वजह यहां नहीं गिरा, बल्कि उसे गोली मारी गई है. जी हां, गोली.

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यकीनन मामला अजीब है. बीच सड़क पर चलती बाइक से कोई चलती स्कूटी सवार को अपनी गोलियों का निशाना बना ले. ऐसा आम तौर पर देखने को नहीं मिलता. लेकिन जो देखने को नहीं मिला, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में 11 नवंबर 2025 को कुछ ऐसा ही हुआ. आनन-फानन में सड़क पर गिरे शख्स को उठा कर अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद डॉक्टर से उसे मुर्दा करार देते हैं. 

ये शख्स कोई और नहीं बल्कि शहर के अमीर कारोबारी और बीजेपी लीडर रमेश ईनाणी थे. जी हां, वो रमेश ईनाणी जिन्हें पूरा शहर उनके नाम से जानता था. लेकिन फिर सबसे बड़ा सवाल यही था कि आकिर रमेश ईनाणी की हत्या हुई क्यों? किसी ने क्यों बीच सड़क पर पीछा करते हुए घात लगा कर उन पर गोलियां चलाईं? आखिर उन्हें शूट करने वाला कातिल कौन था?

चित्तौड़गढ़ पुलिस ने अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही कातिल की तलाश शुरू कर दी. इत्तेफाक से पुलिस को इस संदिग्ध कातिल के कुछ और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे. जिसमें वो शूटआउट से पहले एक शराब के ठेके के पास बाइक लगा कर शराब खरीदता हुआ दिख रहा था. अब पुलिस के हाथ उसे लेकर कुछ क्लू लग चुके थे. आखिरकार पुलिस की कोशिश रंग लाई और सात से आठ घंटे गुजरते-गुजरते पुलिस ने रमेश ईनाणी को बीच सड़क पर गोली मारने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया. 

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शूटर का नाम था मनीष दुबे. मनीष चित्तौड़गढ़ से दूर बनारस का रहने वाला था. अब सवाल यही था कि आखिर मनीष की यूपी से दूर राजस्थान के एक कारोबारी से ऐसी क्या दुश्मनी थी? तो जब पुलिस ने उससे इसे लेकर सवाल जवाब किए, तो उसने पुलिस को अजीबोगरीब कहानी सुनाई. मनीष ने कहा कि किसी मोड़ पर रमेश ईनाणी ने उसका अपमान किया था, जिसका बदला लेने के लिए उसने रमेश ईनाणी का क़त्ल कर दिया. हालांकि पुलिस को उसकी इस कहानी पर यकीन नहीं था.

उधर, पुलिस ने शूटर को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मरने वाले कारोबारी के घर वाले लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि इस कत्ल में गिरफ्तार शूटर तो सिर्फ एक मोहरा भर है. उनका कहना था कि चूंकि रमेश ईनाणी का करीब 20 सालों से जमीन के एक बड़े हिस्से को लेकर रमताराम नाम के एक तथाकथित संत से विवाद चल रहा था, तो उन्हें इस बात का शक है कि इस वारदात में रमताराम का हाथ हो सकता है. रमताराम जो उन दिनों चित्तौड़गढ़ में रामद्वारा का प्रमुख था और रामस्नेही संप्रदाय से जुड़ा हुआ था. मगर, दिक्कत ये थी कि पुलिस के पास रमताराम के खिलाफ तब कोई सबूत नहीं थे.

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हालांकि, जब पुलिस ने अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाई, तो पुलिस को इस सिलसिले में कई डिजिटल सबूत मिले और कई नए चेहरों का पता चला. इन्हीं में एक चेहरा था भजनाराम, जो उन दिनों रामद्वारा से जुड़ा हुआ था. असल में पुलिस को पता चला कि कत्ल से पहले इस भजनाराम से शूटर मनीष की बातचीत हो रही थी. लेकिन इस कहानी में अभी असली खुलासा होना बाकी था. पुलिस ने जब भजनाराम और शूटर को आमने सामने बिठा कर पूछताछ की, तो जो पता चला वो शॉकिंग था. अब ये क्लियर हो गया कि क़त्ल की ये सारी साजिश तथाकथित संत रमताराम ने ही रची थी. 

रमताराम यानी एक ऐसा शख्स ने जो दुनिया भर में घूम-घूम कर भजन प्रवचन किया करता था, दुनिया को आध्यात्मिक ज्ञान की घुट्टी पिलाता था और जिसके चाहने वाले लाखों में थे. अब कहानी तो तकरीबन साफ हो चुकी थी. लेकिन जिस तथाकथित संत पर इस साजिश में शामिल होने का इल्जाम था, अब पुलिस उससे पूछताछ करना चाहती थी. लेकिन पुलिस को तब जोर का झटका लगा, जब पूचताछ के लिए बुलाए जाने पर रमताराम थाने पर हाजिर होने की जगह ऐसे गायब हो गया, जैसे गधे के सिर से सींग.

इसके बाद एक वो दिन था एक आज का दिन. रमताराम के बारे में पुलिस को करीब छह महीने तक कुछ पता ही नहीं चला. कत्ल के आरोपी संत को ढूंढते ढूंढते अब पुलिस हलकान हो चुकी थी. पहले उसके नाम पर 10 हजार का ईनाम रखा गया, फिर 25 हजार का और फिर 50 हजार का. लेकिन रमताराम का कोई पता नहीं चला. लेकिन छह महीने बाद कहानी ने करवट बदली और रमताराम के चित्तौड़गढ़ के ही एक मंदिर में छुपे होने का पता चला. जिसके बाद आखिरकार पुलिस उसे दबोचने में कामयाब हो गई.

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अब जानिए कि धर्म की व्यास पीठ पर बैठ कर लोगों को सदाचार की सीख देने वाले उस फर्ज़ी संत आखिर ये साजिश रची कैसे? असल में रामद्वारा नाम की संस्था और ईनाणी परिवार के बीच करोड़ों की जमीन को लेकर चित्तौड़गढ़ में एक पुराना विवाद चला आ रहा था. इसी विवाद के सिलसिले में रमेश ईनाणी पर पहले भी एक बार जानलेवा हमले की कोशिश हुई थी. लेकिन तब रमेश ईनाणी बच गए थे. लेकिन चूंकि तमाम कानून लड़ाई के बावजूद उस जमीन पर रमताराम कब्जा नहीं कर पा रहा था, तो फिर आखिरकार रमताराम ने रमेश ईनाणी के नाम की सुपारी ही दे डाली.

फिलहाल, पुलिस को इस केस में उन लोगों की तलाश है, जिन्होंने छह महीने तक छुपने में एक फर्जी संत की मदद की. पुलिस का मानना है कि कत्ल की इस साजिश में कुछ और भी बड़े और हाई प्रोफाइल लोग शामिल हो सकते हैं, जिन्हें जल्द ही क़ानून की जद में लाया जाएगा. फिलहाल, छह महीने बाद ही सही एक अमीर कारोबारी के कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का मास्टरमाइंड तो गिरफ्तार हो गया है, लेकिन एक संत के क़ातिल बनने की इस कहानी ने लोगों को एक बार फिर से हैरान जरूर कर दिया है.

(चित्तौड़गढ़ से ओम प्रकाश का इनपुट)

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