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अमिताभ-आमिर से लेकर मोहनलाल तक की फिल्मों में की एक्टिंग, 12 साल तक फरार सजायाफ्ता कैदी की कहानी

वो जेल से पेरोल पर बाहर आया. फिर 12 साल तक फरार रहा. इसके बाद हत्या का दोषी हेमंत मोदी उर्फ ट्विंकल दवे बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में एक्टिंग करता रहा. अमिताभ बच्चन, आमिर खान, रणवीर सिंह और मोहनलाल की फिल्मों में काम करने वाले इस आरोपी की कहानी हैरान करने वाली है.

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ये सजायाफ्ता मुजरिम 12 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा (फोटो-ITG)
ये सजायाफ्ता मुजरिम 12 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा (फोटो-ITG)

कत्ल करने के इल्जाम में एक मुजरिम को अदालत उम्रकैद की सजा सुनाती है. सजा के बीच उस मुजरिम को पेरोल मिलती है और उसी दौरान वो फरार हो जाता है. पुलिस उसे तलाश करती है. मगर वो हाथ नहीं आता. इसी तरह से पूरे 12 साल बीत जाते हैं. हालांकि इस दौरान वो मुजरिम छिपकर नहीं रहता है, बल्कि अमिताभ बच्चन, आमिर खान, मोहनलाल, रणवीर सिंह और इमरान हाशमी जैसे बॉलीवुड सितारों के साथ फिल्मों में काम करता है. इसी बीच एक दिन पुलिस के पास एक मुखबिर का कॉल आता है. इसके बाद खुलता है ठग ऑफ हिंदुस्तान का पूरा राज.  

साल 2018 में एक फिल्म आई थी ठग्स ऑफ हिंदुस्तान. बड़े बजट की इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे बड़े सितारे थे. हालांकि ये फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कोई कमाल नहीं कर पाई थी. पर जब ये फ़िल्म बनी तब ख़ुद इस फ़िल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और यहां तक कि अमिताभ बच्चन और आमिर ख़ान तक को ये पता नहीं था कि ठग्स ऑफ हिंदुस्तान में सचमुच का एक ठग काम कर रहा है. इस फ़िल्म के चार साल बाद रणवीर सिंह और बोमन ईरानी स्टारर एक और फ़िल्म जयेश भाई जोरदार आई. 2022 में आई इस फ़िल्म में भी वो ठग काम कर रहा था. पर किसी को उसके बारे में ज़रा भी भनक नहीं लगी.

साल 2025 में एक और फ़िल्म आई. मेट्रो इन दिनों. आदित्य रॉय कपूर, सारा अली ख़ान और पंकज त्रिपाठी जैसे स्टार के साथ बनी इस फ़िल्म के गाने काफ़ी मशहूर हुए. डायरेक्टर अनुराग बसु की इस फ़िल्म में भी वो ठग काम कर रहा था. पर क्या मजाल जो कोई उसकी असलियत जान पाता. उसी साल यानि 2025 में साउथ के दिग्गज सुपरस्टार मोहनलाल की एक फ़िल्म आई. एल 2 एम्पूरान. इस फ़िल्म में भी वो ठग मौजूद था. पर कोई उसकी असलियत पहचान नहीं पाया. 

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सनी देओल के आनी वाली फ़िल्म लाहौर 1947 की भी वो शूटिंग कर चुका है. सोनाक्षी सिन्हा स्टारर 'तू है मेरी किरण' फ़िल्म में भी उसकी झलक जल्द ही देखने को मिलने वाली है. यहां तक की इसी साल नेटफ्लिक्स पर आई चर्चित वेब सीरीज़ तस्करी में भी वो इमरान हाशमी के साथ काम कर चुका है. पर इन लोगों को भी उसकी कहानी नहीं पता. यक़ीन मानिए नटवर लाल ज़िंदा होता तो ख़ुद इस शातिर शख्स का फ़ैन हो जाता. फ़िल्मी पर्दे और वेब सीरीज़ के ज़रिए इस अदाकार को देश भर में करोड़ों लोगों ने तो देखा ही होगा. 

पर इन करोड़ों निगाहों से ग़ुजरने के बावजूद गुरुवार 21 मई से पहले ख़ुद अहमदाबाद पुलिस की नज़रें कभी इसे पहचान नहीं पाईं. इस ठग अदाकार की तारीफ़ तो बहुत हो गई अब तार्रुफ़ भी करा देते हैं. हम बात कर रहे हैं हेमंत नगीन दास पुरुषोत्तम दास मोदी. यानी हेमंत मोदी यानी स्पंदन मोदी या यूं कहें कि ट्विंकल दवे. इतने नामों वाला वो शख़्स, इतने फ़िल्मी चेहरों वाला ये शख़्स जानते हैं कौन है? एक क़ातिल. जिसे क़त्ल के इल्ज़ाम में 18 साल पहले उम्रक़ैद की सज़ा दी गई थी. लेकिन सज़ा पूरी करने से पहले ही वो जेल से ऐसा भागा कि अहमदाबाद पुलिस उसे ढूंढ ही नहीं पाई और कमाल ये कि वो छुपा भी नहीं. बल्कि फ़िल्मी पर्दों और टीवी के पर्दों पर बार-बार अपना चेहरा अलग-अलग किरदारों में दिखाता रहा. पर कोई उसे पहचान ही नहीं पाया. 

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अहमदाबाद के डीसीपी क्राइम ब्रांच अजीत राजियान ने खुद इस ठग की जिंदगी और करतूतों को तफ्सील से बताया.

बात 2005 की है. तब हेमंत मोदी अहमदाबाद में रहा करता था. कॉलेज में पढ़ रहा था. जर्नलिस्ट बनना चाहता था. कुछ दिक्कते आईं तो वकील बनने की सोची. पर इत्तेफ़ाक से इसी दौरान नरेंद्र उर्फ नानो यशवंत कांबले नाम के एक शख़्स से झगड़ा हुआ. इस झगड़े के दौरान हेमंत मोदी, उसके भाई सचिन मोदी और 5 दूसरे लोगों ने नरेंद्र का क़त्ल कर दिया. बाद में सातों पकड़े गए. 

27 अगस्त 2008 को अहमदाबाद की एक अदालत ने नरेंद्र कांबले के क़त्ल के इल्ज़ाम में हेमंत समेत सभी 7 आरोपियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुना दी. इन सभी को अहमदाबाद के ही साबरमती जेल भेज दिया गया. बाद में वहां से इनको महसाना जेल में ट्रांसफ़र कर दिया गया. सज़ा सुनाए जाने के बाद हेमंत मोदी क़ैदी नंबर 31146 बन गया. जेल गए हुए अब सभी आरोपी को 9 साल हो चुके थे. 

9 साल जेल में रहने के बाद 25 जुलाई 2014 को गुजरात हाईकोर्ट ने हेमंत मोदी को 30 दिनों की पेरोल पर रिहा कर दिया. बस यहीं से हेमंत की असली कहानी शुरु होती है. 24 अगस्त 2014 को पेरोल ख़त्म होते ही हेमंत को वापस जेल लौटना था. लेकिन वो जेल लौटा ही नहीं. उसकी तलाश के बाद अहमदाबाद पुलिस ने हेमंत को बेल जंपर करार देते हुए उसे भगौड़ा घोषित कर दिया. अब हेमंत की तलाश शुरु हुई लेकिन वो पुलिस को मिला ही नहीं. 

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धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और पुलिस भी उसे भूलती गई. हेमंत को जेल से पेरोल पर भागे अब 12 साल हो चुके थे. साल 2026 आ चुका था. तभी 21 मई 2026 यानि गुरुवार के दिन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को एक मुखबिर से एक ख़बर मिलती है. ख़बर ये थी कि पिछले 12 साल से फरार उम्रक़ैद की सज़ा पाया एक आरोपी अहमदाबाद में एक घर में रह रहा है. मुख़बिर की ख़बर पर पुलिस ने उस घर में दबिश दी और घर में मौजूद एक शख़्स को कस्टडी में ले लिया. 

शुरुआती पूछताछ और उसी पुरानी तस्वीरों से उसके नए हुलिए का जब मिलान किया गया तो सारी सच्चाई सामने आ गई. हिरासत में लिया गया शख़्स कोई और नहीं 12 साल पहले जेल से भागा उम्रक़ैद की सज़ा पाने वाला हेमंत मोदी था. जिसका अब नया नाम था टि्वंकल दवे. अब पुलिस की बारी हेमंत मोदी उर्फ़ ट्विंकल की कहानी सुनने की थी. कहानी पिछले 12 सालों की. वो पूरी कहानी कुछ यूं थी. 

पेरोल जंप करने के बाद हेमंत सबसे पहले पाटन गया. अगले एक साल तक यानि 2015 तक वो पाटन में छुपा रहा. एक साल बाद 2015 में उसने अपना नया नाम रखा ट्विंकल मुकुंद दवे. इसके बाद वो अहमदाबाद आ गया. अहमदाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरु कर दी. वहीं पेइंग गेस्ट के तौर पर रहने लगा. दो साल उसने अहमदाबाद में ही गुज़ार दिए. दो साल बाद अचानक उसे अहसास हुआ कि उसे कुछ नया करना है. 

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इसी के बाद वो थिएटर से जुड़ गया. थिएटर में कुछ प्ले किए और फिर 2017 में मुंबई आ गया. छोटे मोटे सपोर्टिंग रोल उसे फ़िल्मों में मिलने लगे. बड़ी बजट की पहली फ़िल्म 2018 में ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान मिली. जेल से भागने के बाद हेमंत ने अपना पूरा हुलिया चेंज कर लिया था ताकि कोई उसे पहचान ना पाए. धीरे-धीरे उसे फ़िल्में मिलने लगीं और फ़िल्मों के साथ साथ वो वेब सीरीज़ में भी काम करने लगा.

दरअसल, इन 12 सालों में हेमंत ने अपनी पहचान से जुड़ी हर पहचान मिटा दी थी. जेल से भागने के बाद उसने अपने परिवार से पूरी तरह दूरी बना ली. पत्नी को तलाक दे दिया. तमाम दोस्तों को छोड़ दिया. अपने घर की तरफ कभी गया नहीं. यहां तक की मोबाइल, सोशल मीडिया हर चीज़ से दूरी बनाकर रखी. अब चूकि 12 साल बीत चुके थे. नाम, हुलिया, शक्ल सब बदल चुका था. लिहाज़ा, हेमंत को लगा कि अब पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाएगी. इसी के बाद वो कुछ दिन पहले अहमदाबाद आया. 

लेकिन अहमदाबाद में वो जहां रुका था, वहां एक शख्स उसे देखकर पहचान गया. और उसी ने पुलिस को ख़बर दी. यानि कायदे से अगर वो गुमनाम शख्स उसे नहीं पहचानता तो पुलिस कभी इस ठग ऑफ हिंदुस्तान को पकड़ ही नहीं पाती. इस कहानी का एक दूसरा पहूलू ये है कि हेमंत के भाई समेत बाकी जिन 6 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी वो सभी अपनी अपनी सजा पूरी कर अब एक आजाद जिंदगी जी रहे हैं. लेकिन हेमंत को अब अपनी बाकी की सजा काटने के लिए वापस जेल जाना होगा. क्या पता इतनी फ़िल्मों और वेब सीरीज़ में काम कर चुके हेमंत मोदी पर ही कोई फ़िल्म बना दे.

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