मुंबई में अंडरवर्ल्ड और जबरन वसूली से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के मुंबई जोनल ऑफिस ने छोटा शकील के साले और कथित तौर पर डी-कंपनी से जुड़े सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट के परिवार की संपत्ति अटैच की है.
जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत करीब 4 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. इसमें एक अचल संपत्ति और बैंक खातों में जमा रकम शामिल है. यह कार्रवाई असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में की गई है.
ED ने इस मामले में मुंबई के दादर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 0734/2022 के आधार पर जांच शुरू की थी. यह FIR 22 सितंबर 2022 को दर्ज की गई थी. बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने इस मामले की जांच की.
FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए थे. ED ने इसी FIR में सामने आए तथ्यों और आरोपों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल शुरू की.
जांच के दौरान ED को पता चला कि आरोपियों ने कथित तौर पर साजिश रचकर 'लैंबट बिल्डिंग' नाम की एक अचल संपत्ति को अवैध तरीके से हासिल किया था. इस साजिश में शब्बीर अहमद हसन करोलिया और यूसुफ अहमद हसन करोलिया के नाम सामने आए हैं. एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने संपत्ति के असली मालिक की पहचान का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी दस्तावेज तैयार किए.
इनमें संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़ी एक फर्जी डीड ऑफ कन्वेयंस भी शामिल थी. ED की जांच में आरोप है कि इन दस्तावेजों के जरिए संपत्ति पर अवैध कब्जे और उसके हस्तांतरण का रास्ता तैयार किया गया.
जांच एजेंसी के मुताबिक, असलम अब्दुल रहमान पटनी ने साल 2019 में लैंबट बिल्डिंग में 50 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी. यह हिस्सा यास्मीन मोहम्मद अहमद और दिवंगत शेरजादा जंगरेज खान का था. ED का आरोप है कि पटनी ने यह हिस्सेदारी डी-कंपनी, दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के साले सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट के नाम पर धमकी देकर हासिल की थी.
आरोप है कि यास्मीन और शेरजादा जंगरेज खान को डराया-धमकाया गया और दबाव बनाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा किया गया. इस हिस्सेदारी के बदले मूल मालिकों को कोई रकम भी नहीं दी गई.
ED की जांच में यह भी सामने आया कि असलम पटनी ने बाद में लैंबट बिल्डिंग की संपत्ति सलीम फ्रूट की पत्नी शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम ट्रांसफर कर दी. एजेंसी के मुताबिक, इस लेनदेन के जरिए संपत्ति को सलीम फ्रूट के परिवार के नाम पर रखने की व्यवस्था की गई.
जांच में आरोप है कि संपत्ति को एक के बाद दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने का तरीका अपनाया गया, ताकि उसे वैध लेनदेन का रूप दिया जा सके. ED का कहना है कि इन लेनदेन के जरिए कथित तौर पर जबरन वसूली से हासिल की गई संपत्ति को परिवार के नाम पर बनाए रखा गया.
इसी जांच के आधार पर ED ने अब लैंबट बिल्डिंग को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है. फिलहाल यह संपत्ति शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम पर दर्ज बताई गई है, जो सलीम फ्रूट की पत्नी हैं.
इसके अलावा असलम अब्दुल रहमान पटनी और मामले के अन्य आरोपियों के बैंक खातों में मौजूद रकम भी अटैच की गई है. ED के मुताबिक, अटैच की गई चल और अचल संपत्तियों की कुल कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है. यह कार्रवाई PMLA के प्रावधानों के तहत की गई है.