पैसा, रुतबा और आलीशान जिंदगी, दुनिया के रईसों के पास वो सब कुछ है जिसकी एक आम इंसान केवल कल्पना ही कर सकता है. लेकिन आज के दौर में एक बेहद हैरान करने वाला ट्रेंड देखने को मिल रहा है.
Henley Private Wealth Migration Report 2026 में दावा किया गया है कि इस साल दुनिया भर में रिकॉर्ड 1.65 लाख करोड़पति अपना घर-बार और देश छोड़कर दूसरे देशों में शिफ्ट होने वाले हैं. ज्यादातर रईसों की पहली पसंद UAE बना हुआ है.
दरअसल, ये दौलतमंद लोग अब सिर्फ अपनी लग्जरी लाइफ का लुत्फ नहीं उठा रहे हैं, बल्कि तेजी से अपना देश और घर-बार छोड़कर भाग रहे हैं. 'हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2026' के ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस साल अमीरों के पलायन ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.
टूटे पलायन के सारे रिकॉर्ड!
वैश्विक स्तर पर करोड़पतियों के माइग्रेशन में जबरदस्त उछाल आया है. अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ये ग्राफ लगातार ऊपर की तरफ भाग रहा है. आंकड़ों के मुताबिक-
2026 (अनुमान): इस साल रिकॉर्ड 1.65 लाख करोड़पति अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में सेटल होने जा रहे हैं.
2025: पिछले साल 1.42 लाख अमीरों ने अपना मुल्क छोड़ा था.
2024: साल 2024 में यह आंकड़ा 1.34 लाख पर था.
2013 से तुलना: अगर हम एक दशक पहले यानी साल 2013 से तुलना करें, तो तब महज 51 हजार अमीर माइग्रेट हुए थे. उसके मुकाबले आज यह संख्या तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ चुकी है.
क्यों बदला अमीरों का मिजाज?
विशेषज्ञों के मुताबिक अमीर परिवारों के देश छोड़ने की वजहें अब काफी बदल चुकी हैं. पहले जहां मुख्य फोकस सिर्फ 'टैक्स छूट' पाना होता था, वहीं अब अमीर परिवार स्थिरता, सुरक्षा, बेहतर लाइफस्टाइल और सुरक्षित निवेश के लिए दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं. इस वैश्विक बदलाव के बीच कुछ देश 'ग्लोबल वेल्थ हब' बनकर उभरे हैं.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यह देश 85.3 के सबसे ऊंचे वेल्थ मोबिलिटी स्कोर के साथ दुनिया भर के रईसों की पहली पसंद बना हुआ है.
अमेरिका (USA): अमेरिका का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 62.3 है. हैरान करने वाली बात यह है कि यहां से सबसे ज्यादा लोग दूसरी नागरिकता की मांग कर रहे हैं. अमेरिका से आने वाले आवेदनों में से आधे यूरोप के लिए और एक-चौथाई लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों के लिए हैं.
महाशक्तियों को लगा झटका!
रईसों के देश छोड़ने के इस ट्रेंड ने दुनिया की महाशक्तियों को बड़ा झटका दिया है. खासकर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से बाहर जाने वाले रईसों की तादाद तेजी से बढ़ रही है. ब्रिटेन इस वक्त अमीरों के पलायन के मामले में दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सोर्स मार्केट बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन से बाहर जाने के लिए होने वाले आवेदनों में लगभग आधी हिस्सेदारी खुद ब्रिटिश मूल के नागरिकों की है.
क्यों पलायन कर रहे हैं भारतीय अमीर?
इस रिपोर्ट में भारत को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं. भारत का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 56.5 है, जो इसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों वाली कैटेगरी में लाकर खड़ा करता है. भारतीय अमीरों के देश छोड़ने के पीछे मुख्य रूप से ये दो बड़ी वजहें सामने आई हैं.
- पूंजी पर चुनिंदा लोगों का कंट्रोल.
- और देश के पेचीदा और कड़े टैक्स नियम.
आज के समय में भारतीय अमीर परिवारों के लिए दूसरा घर या विदेशी नागरिकता लेना शौक के साथ ही उनकी 'एस्टेट प्लानिंग' और 'टैक्स स्ट्रक्चरिंग' का एक खास हिस्सा बन चुका है, इसके जरिए वो अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, बिजनेस का ग्लोबल विस्तार और सक्सेशन प्लानिंग को आसान बना रहे हैं.
यूरोपीय देशों में होड़ का किसे मिला फायदा?
दुनियाभर के करोड़पतियों के इस मूवमेंट का कुछ देश भरपूर फायदा उठा रहे हैं. प्रवासी कारोबारी अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को एक बड़े लॉन्चपैड या प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और वहां से दूसरे ग्लोबल विकल्प तलाश रहे हैं. अमीरों के निवेश और नागरिकता के करीब आधे आवेदन पुर्तगाल, इटली और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देशों के लिए आ रहे हैं. हाल ही में स्पेन का 'गोल्डन वीसा' बंद होने और पुर्तगाल में नियमों के सख्त होने के चलते अब ग्रीस को सीधा फायदा मिल रहा है, जहां अमीर तेजी से निवेश कर रहे हैं.