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EPFO New Scheme: ईपीएफओ की नई स्कीम, सिर्फ 6 महीने के लिए ओपन, जानें किसे मिलेगा फायदा

EPFO New Scheme: श्रम और रोजगार मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी करते हुए नई योजना के बारे में बताया है. इस EPFO Amnesty Scheme को छह महीने के लिए लागू किया गया है.

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ईपीएफओ स्कीम के संबंध में श्रम मंत्रालय ने रविवार को जारी किया बयान. (Photo: ITG)
ईपीएफओ स्कीम के संबंध में श्रम मंत्रालय ने रविवार को जारी किया बयान. (Photo: ITG)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) नई योजना शुरू की है.  ये छह महीने की माफी योजना-2026 (EPFO Amnesty Scheme) है, जिसके तहत पीएफ ट्रस्टों का संचालन करने वाले इंस्टीट्यूशन या कंपनियों को ईपीएफ और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत अपनी स्थिति को नियमित करने का वन-टाइम मौका दिया गया है. 

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने रविवार को इस योजना के संबंध में जारी एक बयान में कहा कि EPFO Amnesty Scheme उन इंस्टीट्यूशंस के लिए है, जिनके पीएफ ट्रस्ट आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त हैं और संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें संबंधित सरकार की ओर से अभी तरह औपचारिक छूट का नोटिफिकेशन नहीं मिला है. मंत्रालय के मुताबिक,  नियोक्ताओं, हितधारकों और आम जनता को इस योजना पर फोकस करना चाहिए, जो छह महीने के लिए खुली रहेगी.

स्कीम में किन्हें मिलेगी छूट? 
EPFO की ये योजना फाइनेंशियल एक्ट-2026 में किए गए तमाम बदलावों के अनुरूप है, जो मान्यता प्राप्त भविष्य निधि को नियंत्रित करने वाले आयकर इंफ्रास्ट्रक्चर को ईपीएफ एक्ट के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के साथ आते हैं. संशोधित ढांचे के तहत इनकम टैक्स एक्ट के तहत मान्यता अब सिर्फ उन प्रोविडेंट फंड को ही उपलब्ध होगी, जिन्होंने ईपीएफ अधिनियम की धारा-17 के अंतर्गत छूट प्राप्त की है.

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कौन आवेदन कर सकता है?
लेबर मिनिस्ट्री के अनुसार, यह ईपीएफओ योजना उन इनस्टीट्यूशनों पर लागू है जो आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार से औपचारिक डिस्काउंट नोटिफिकेशन नहीं है. इस योजना को नोटिफिकेशन 29 जून 2026 को जारी किया गया था और अब लागू होने के छह महीने तक ये ओपन रहेगी. 

दो कैटेगरी की गई हैं तय
इस EPFO 6-Month Amnesty Scheme के तहत पात्रों को दो कैटेगरी में बांटा गया है. इनमें पहली में वे इंस्टीट्यूशन आते हैं, जो पहले से ट्रस्ट रेग्युलाइजेशन की मांग कर रहे हैं और जिन्होंने पहले ही नॉन-डिस्काउंटेड इंस्टीट्यूशन के रूप में अनुपालन शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी कैटेगरी में सोशल सिक्योरिटी संहिता, 2020 के तहत छूट प्राप्त इंस्टीट्यूशन के रूप में परिचालन जारी रखते वाले आते हैं. 

नई योजना का क्या-क्या असर? 
EPFO की यह योजना ट्रस्ट की स्थापना से लेकर एक निर्धारित समय सीमा तक छूट की स्थिति और ट्रस्ट की मान्यता देकर रेग्युलाइजेशन की सुविधा देती है. इसके साथ ही यह सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 के तहत कुछ आवश्यकताओं को भी माफ करती है, जिसमें न्यूनतम कर्मचारी संख्या, फंड के आकार को लेकर  तय नियम, 3 साल पहले अनुपालन की जरूरत शामिल हैं. 

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इसके अलावा बकाया, हर्जाना और ब्याज से संबंधित लंबित आकलन वापस ले लिए जाएंगे और माफ कर दिए जाएंगे. बशर्ते सदस्य खातों में वैधानिक दरों के बराबर या उससे बेहतर अंशदान और ब्याज प्राप्त हुआ हो. 

आवेदन कैसे करना होगा? 
योजना के तहत पात्र इंस्टीट्यूशनों को संबंधित ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय के पास ईमेल के जरिए केंद्र सरकार को औपचारिक आवेदन करना होगा. वे अभिरुची (rc.exemption@epfindia.gov.in) पर भेज सकते हैं. मंत्रालय ने कहा कि आवेदकों को अपने वित्तीय खातों का ऑडिट एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से करवाना होगा, जबकि ईपीएफओ अधिकारियों द्वारा निर्देशित कोई भी विशेष या अनुपालन ऑडिट आवेदन जमा करने के 3 महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए.

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