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EPFO में बड़ा बदलाव, बिना वजह बताए निकलेगा 100% PF का पैसा, ये होगी शर्त

ईपीएफओ के तहत पीएफ के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है. 100 फीसदी तक पीएफ क्‍लेम किया जा सकता है, लेकिन यह अमाउंट विशेष परिस्थितियों में ही निकाली जा सकती है.

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इन शर्तों में 100 फीसदी पीएफ निकालने की अनुमति. (File Photo: ITG)
इन शर्तों में 100 फीसदी पीएफ निकालने की अनुमति. (File Photo: ITG)

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों के लिए नया और बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत क्‍लेम और विड्रॉल के नियम को आसान बनाया गया है. खास बदलावों में एक बदलाव यह है कि सदस्‍य कुछ स्‍पेशल सिचुएशन में विड्रॉल की वजह बताए बिना ही 100% तक PF का पैसा निकाल सकते हैं. 

यह कदम ईपीएफओ द्वारा सदस्यों की सुविधा में सुधार लाने और कस्‍टमर्स को उनकी रिटायरमेंट सेविंग तक पहुंचने में अधिक लचीलापन पेश करने के प्रयासों का हिस्सा है. 

पहले के नियमों में क्या प्रावधान थे?
पिछली व्यवस्था के तहत, सदस्य असाधारण परिस्थितियों जैसे कि लंबे समय तक बेरोजगारी, तालाबंदी, कंपनी का बंद होना, महामारी या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अपनी पूरी ईपीएफ राशि निकाल सकते थे. हालांकि, ग्राहकों को निकासी का सटीक कारण बताना और सहायक दस्तावेज जमा करना आवश्यक था. कई मामलों में, दावों को इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि सदस्य द्वारा बताए गए कारण ईपीएफओ द्वारा अप्रूव कटैगरी से मेल नहीं खाते थे, जिससे देरी और शिकायतें हुईं. 

क्‍या 100 फीसदी निकासी की अनुमति है? 
EPFO कुछ खास परिस्थितियों में फ्यूचर फंड की सेविंग की पूरी विड्रॉल की अनुमति देता है.यह एक ऐसा मामला तब होता है, जब कोई संस्‍थान 15 दिनों से ज्‍यादा समय तक तालाबंदी या बंद रहता है और कर्मचारी बिना वेतन के बेरोजगार रहते हैं या जब दो महीने से ज्‍यादा समय तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया हो, बशर्ते कि देरी या हड़ताल के कारण न हो. ऐसे मामले में कंपनी को फॉर्म A और फॉर्म B में सर्टिफिकेट पेश करना आवश्‍यक है. 

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जिन सदस्‍यों को सर्विसफ्री कर दिया गया है, बर्खास्‍त कर दिया गया है या छंटनी कर दी गई है और जिन्‍होंने कोर्ट में इस कार्रवाई को चुनौती दी है, वे भी पूरी निकासी के लिए योग्‍य हैं. उन्‍हें कोर्ट में दायर याचिका की एक प्रति और मामले की देरी होने की लंबित होने की पुष्टि करने वाला प्रमाण पत्र जमा करना होगा. 

एक अन्‍य योग्‍यता के तहत, जब कोई संस्‍थान छह महीने से ज्‍यादा समय तक बंद रहता है और कर्मचारी बेरोजगार रहते हैं. ऐसे मामलों में कंपनी सर्टिफिकेट जरूरी होते हैं. सदस्‍य या परिवार के सदस्‍यों के मेडिकल इलाज के लिए 100 फीसदी अमाउंट निकालने की अनुमति है. इस तरह के क्‍लेम के लिए कंपनी और उपचार करने वाले डॉक्‍टर दोनों की ओर से साइन डॉक्‍यूमेंट की आवश्‍यकता है. 

नए नियमों के तहत क्या बदलाव हुए हैं?
13 अक्टूबर, 2025 की सरकारी अधिसूचना के अनुसार, EPFO ने विशेष परिस्थितियों वाले कैटेगरी के तहत निकासी के कारण को स्पष्ट करने की सदस्यों की आवश्यकता को हटा दिया है. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पहले विशेष परिस्थितियों के तहत सदस्‍य को आंशिक निकासी के कारणों को स्‍पष्‍ट करना आवश्‍यक था. इससे अक्‍सर क्‍लेम रिजेक्‍ट और शिकायतें रहती थीं. अब सदस्‍य इस कैटेगरी के तहत बिना कोई कारण बताए आवेदन कर सकता है. इसका मतलब यह है कि पात्र कस्‍टमर बिना किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण के इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे प्रक्रिया सरल और तेज हो जाती है. 

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सामान्य परिस्थितियों में निकासी?
इस नई छूट का मतलब यह नहीं है कि सदस्य अपनी मर्जी से अपना पूरा ईपीएफ बैलेंस निकाल सकते हैं. सामान्‍य परिस्थितियों में कस्‍टमर्स को योग्‍य राशि का सिर्फ 75 फीसदी तक ही निकालने की अनुमति होगी. 15 अक्टूबर, 2025 को जारी ईपीएफओ की एक अन्य लेटर के अनुसार, अब पात्र राशि का 75% तक बिना किसी दस्तावेज के कभी भी निकाला जा सकता है. हालांकि, पूरी ईपीएफ राशि की निकासी विशेष परिस्थितियों तक ही सीमित है. नए सुधारों से बाधाओं को कम करने, दावों को रिजेक्‍शन को कम करने और ईपीएफ कस्‍टमर्स को अपनी बचत पर ज्‍यादा कंट्रोल पेश करने की उम्मीद है.

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