म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में पैसे बनाने का एक बेहतरीन और लोकप्रिय विकल्प बन चुका है. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसी पारंपरिक बचत योजनाओं में पैसा सुरक्षित तो रहता है. लेकिन वहां मिलने वाला रिटर्न महंगाई की दर को मात देने के लिए हमेशा काफी नहीं होता है. ऐसे में म्यूचुअल फंड में लगातार निवेशित रहने से ज्यादा रिटर्न हासिल करने की उम्मीद बनी रहती है.
Paisabazaar के CEO संतोष अग्रवाल के मुताबिक शेयर बाजार में हमेशा उतार-चढ़ाव बना रहता है. ब्याज दरों के बदलाव और फंड के प्रदर्शन का सीधा असर आपके निवेश पर पड़ता है. ऐसे में बिना किसी रणनीति के निवेश करने के बजाय, अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर एक मजबूत पोर्टफोलियो बनाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आप ये 4 आसान तरीके अपना सकते हैं.
1. लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार एसेट एलोकेशन तय करें
अक्सर नए निवेशक सिर्फ पिछले एक-दो साल के सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड देखकर पैसा लगा देते हैं. यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि जो फंड कल अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, जरूरी नहीं कि वह आगे भी वैसा ही प्रदर्शन करे या आपकी जरूरत के हिसाब से सही हो.
सबसे पहले तय करें कि आपके पैसों का कितना हिस्सा शेयर बाजार (इक्विटी), सुरक्षित विकल्पों (डेट) या गोल्ड में जाना चाहिए. इसे एसेट एलोकेशन कहते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य जोखिम को नियंत्रित रखते हुए अच्छा रिटर्न पाना है. सही एसेट एलोकेशन आपकी उम्र, महीने की बचत, लक्ष्य के लिए बचे साल और आपकी रिस्क क्षमता पर निर्भर करता है.
2. निवेश में विविधता (Diversification) रखें
एक ही जगह सारा पैसा लगाने से नुकसान का डर ज्यादा रहता है. अलग-अलग संपत्तियां बाजार के बदलावों पर अलग-अलग तरह से काम करती हैं. जब शेयर बाजार गिरता है, तो डेट या गोल्ड आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं,
मल्टी-एसेट अप्रोच: पूरे पैसे इक्विटी में लगाने के बजाय डेट, हाइब्रिड या गोल्ड ETF में भी बांटें.
मार्केट कैप संतुलन: शेयर बाजार में निवेश करते समय लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप का सही तालमेल अपने पोर्टफोलियो में रखें.
ग्लोबल निवेश: बच्चों की विदेश में पढ़ाई जैसे लंबे लक्ष्यों के लिए इंटरनेशनल फंड्स का सीमित उपयोग किया जा सकता है. किसी एक सेक्टर या थीम (जैसे सिर्फ बैंकिंग या आईटी) वाले फंड्स में बहुत ज्यादा पैसा लगाने से बचें.
3. बाज़ार गिरने पर भी SIP जारी रखें
जब बाजार में गिरावट आती है, तो बहुत से निवेशक घबराकर अपनी SIP रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं. दरअसल में, बाज़ार की गिरावट ही SIP निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अवसर लेकर आती है, जिसे रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee-Cost Averaging) कहते हैं.
जब आप हर महीने निश्चित रकम निवेश करते हैं, तो बाजार गिरने पर म्यूचुअल फंड की यूनिट्स (NAV) सस्ती हो जाती हैं और आपको उसी पैसे में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. जब बाजार दोबारा ऊपर आता है, तो वही यूनिट्स तेजी से मुनाफा बनाती हैं. इससे आपके निवेश की औसत खरीद लागत अपने आप कम हो जाती है. गिरावट में SIP जारी रखना ही लंबी अवधि में बड़ा वेल्थ बनाने की कुंजी है.
4. पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा और रीबैलेंसिंग करें
एक बार निवेश शुरू करने के बाद उसे भूल जाना सही नहीं है. साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की जांच करें. बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपका तय किया गया एसेट एलोकेशन बदल सकता है. ऐसे में मुनाफे को सुरक्षित एसेट्स में शिफ्ट करके अपने मूल अनुपात को दोबारा संतुलित (Rebalance) करते रहें. क्या आप अपने किसी खास वित्तीय लक्ष्य (जैसे रिटायरमेंट या बच्चों की शिक्षा) के आधार पर एसेट एलोकेशन का सटीक अनुपात तय करना चाहते हैं?