दिवाली और छठ पर बिहार लौटने वाले लाखों प्रवासियों के लिए इस बार घर पहुंचना आसान नहीं है. दिल्ली, मुंबई, गुजरात और दक्षिण भारत के शहरों से बिहार आने वाली नियमित ट्रेनों में सीटें भर चुकी हैं. कई ट्रेनों में वेटिंग लंबी हो गई है, तो कुछ में नई बुकिंग बंद है. फ्लाइट का किराया 25 से 35 हजार रुपये तक पहुंच रहा है. बसें विकल्प तो हैं, लेकिन लंबी दूरी और महंगे किराये ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है.
दिवाली 8 नवंबर को है और छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी. बिहार के लाखों लोग रोजगार और कामकाज के सिलसिले में दिल्ली, मुंबई, गुजरात, और दक्षिण भारत के अलग-अलग शहरों में रहते हैं. हर साल छठ के मौके पर ये लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर लौटते हैं. लेकिन हर बार की तरह इस बार बिहार पहुंचने की राह आसान नहीं दिख रही है. नियमित ट्रेनों में सीटें नहीं बची हैं. तत्काल टिकट पर भी एजेंट्स धावा बोल दे रहे और कंफर्म टिकट के लिए वास्तविक किराये से कई गुना वसूल रहे.
ऐसे में जिन लोगों को ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है, उनके सामने फ्लाइट और बस का विकल्प है. लेकिन इन दोनों माध्यमों से सफर करना भी महंगा साबित हो रहा है. देश के अलग-अलग शहरों से पटना और दरभंगा रूट पर हवाई किराया 25 हजार रुपये से ऊपर पहुंच गया है. दिल्ली से पटना और दरभंगा के लिए हवाई किराया अन्य शहरों की तुलना में कुछ सस्ता है, लेकिन फिर भी इतना है कि आम आदमी इसे अफोर्ड नहीं कर सकता. जबकि लंबी दूरी की बस यात्रा में भी परिवार के साथ आने पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.
ट्रेनों में सीट नहीं, बुकिंग रिग्रेट
दिल्ली से बिहार आने वाली संपूर्ण क्रांति, तेजस राजधानी, मगध एक्सप्रेस और अमृत भारत जैसी ट्रेनों में त्योहार के आसपास सीटों की उपलब्धता नहीं है. नई दिल्ली से राजेंद्र नगर जाने वाली तेजस राजधानी में 5 से 7 नवंबर तक Regret की स्थिति है. वहीं मगध एक्सप्रेस में भी 5, 6 और 7 नवंबर की तारीखों पर नई बुकिंग के लिए सीटें उपलब्ध नहीं हैं. आनंद विहार से दरभंगा जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस में भी स्लीपर क्लास में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है.
मुंबई से बिहार आने वाली ट्रेनों का हाल भी कुछ ऐसा ही है. एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस में 5 से 10 नवंबर तक लगातार Regret दिख रहा है. एलटीटी-भागलपुर एक्सप्रेस में भी कई तारीखों पर वेटिंग और बुकिंग की अनुपलब्धता है. हैदराबाद से दानापुर आने वाले यात्रियों के लिए भी सीमित ट्रेन विकल्प परेशानी बढ़ा रहे हैं. ऐसे में यात्रियों के लिए एक ही ट्रेन के भरोसे बैठना जोखिम भरा हो सकता है.
फ्लाइट का किराया ₹25 से ₹35 हजार पहुंचा
ट्रेन में टिकट नहीं मिलने के बाद यात्रियों के पास हवाई सफर का विकल्प बचता है, लेकिन त्योहार के समय फ्लाइट का किराया भी आम लोगों के बजट से बाहर होता जा रहा है. मुंबई और बेंगलुरु से पटना व दरभंगा आने वाली फ्लाइट का एकतरफा किराया 25 से 26 हजार रुपये तक पहुंच गया है. छठ के नजदीक की कुछ तारीखों पर यह 35 हजार रुपये से भी ज्यादा दिखा रहा है. महाराष्ट्र और गुजरात के शहरों से बिहार आने वाली उड़ानों में भी किराया इसी रेंज में है.

दिल्ली से पटना के लिए भी 5 से 7 नवंबर के बीच फ्लाइट का किराया करीब 8,000 से 9,500 रुपये तक है. वहीं हैदराबाद से पटना आने वाली फ्लाइट का किराया कुछ तारीखों पर 23 हजार रुपये से ज्यादा है. इस महंगाई का असर उन परिवारों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिनमें दो या तीन सदस्यों को एक साथ सफर करना होता है. अगर चार लोगों का परिवार मुंबई या बेंगलुरु से फ्लाइट से बिहार आता है, तो सिर्फ आने का खर्च ही एक लाख रुपये के आसपास या उससे ज्यादा हो सकता है.

बसें विकल्प पर लंबी दूरी और किराया चुनौती
ट्रेन और फ्लाइट के बाद बसें यात्रियों के लिए तीसरा विकल्प हैं. हालांकि, बसों का विकल्प हर यात्री के लिए सुविधाजनक नहीं है. दक्षिण भारत और महाराष्ट्र से बिहार आने वाले लोगों के लिए 1,500 से 2,000 किलोमीटर या उससे अधिक की बस यात्रा काफी थकाने वाली हो सकती है. वहीं अगर परिवार के तीन-चार सदस्य साथ सफर कर रहे हैं तो आने का कुल खर्च भी हजारों रुपये पहुंच जाता है. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने दिवाली और छठ को देखते हुए 5 से 20 नवंबर के बीच करीब 200 विशेष बसें चलाने की तैयारी की है. इन बसों के लिए टिकट बुकिंग भी शुरू कर दी गई है. ये बसें बिहार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और झारखंड से जोड़ेंगी.
यात्रियों के लिए एसी सीटर, एसी स्लीपर, सेमी-स्लीपर और नॉन-एसी बसों की व्यवस्था की गई है. हालांकि, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत से बिहार आने के लिए प्राइवेट बसें ही सहारा हैं, जिनका प्रति व्यक्ति किराया 3000 से अधिक है. सरकारी बसों से आना है तो ब्रेक जर्नी करनी पड़ेगी, जो बहुत थकाऊ साबित होगी. आदमी परिवार के साथ ऐसी यात्रा करना टालता है. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से एसी सीटर और एसी स्लीपर बसों के टिकट पर 30 प्रतिशत से अधिक की सब्सिडी भी दी जा रही है. यात्री निगम की आधिकारिक वेबसाइट BSRTC की वेबसाइट पर जाकर टिकट बुक कर सकते हैं.

रेलवे की स्पेशल ट्रेनें भी रहीं नाकाफी
त्योहारों पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने भी विशेष ट्रेनों का इंतजाम किया है. बिहार के अलग-अलग शहरों के लिए चंडीगढ़, फिरोजपुर, आनंद विहार, दिल्ली और ऋषिकेश जैसे स्टेशनों से पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारतीय शहरों से भी बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं. लेकिन इन ट्रेनों में भी सभी यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहा. त्योहार के दौरान यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि स्पेशल ट्रेनें भी सभी लोगों की जरूरत पूरी नहीं कर पातीं. यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेनों के अलावा अन्य विकल्पों पर भी लगातार विचार करना पड़ रहा.
कार पूल सर्विस विकल्प, पर काफी नहीं
बिहार के 1000 से 1200 किलोमीटर के रेंज में रहने वाले लोगों के लिए ब्ला-ब्ला (Bla-Bla) जैसी कार पूल सर्विस या ओला (Ola), उबर (Uber) जैसी टैक्सी प्रोवाइड करने वाली कंपनियां एक विकल्प हो सकती हैं. हालांकि, ये भी एक महंगा विकल्प है और ऐसी सेवाओं की संख्या बहुत सीमित है. फिर भी जिन यात्रियों को बिहार जाना है वे एकबार इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं. उन्हें पर व्यक्ति 2000 से 2500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. ब्ला-ब्ला में भी दिवाली और छठ के आसपास की तारीखों पर सीटें खाली नहीं हैं.
प्रवासी यात्रियों के पास अब क्या विकल्प?
बिहार लौटने वाले यात्रियों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बजट और समय के बीच संतुलन बनाने की है. ट्रेन में टिकट नहीं मिलने पर वे दूसरी तारीख, आसपास के स्टेशन या स्पेशल ट्रेन का विकल्प देख सकते हैं. बस से सफर करने वालों के लिए सरकारी बस सेवा एक अपेक्षाकृत किफायती विकल्प हो सकती है. लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत से आने वाले लोगों के लिए बस की लंबी यात्रा बड़ी परेशानी है.
फ्लाइट से सफर करना समय बचाने वाला विकल्प जरूर है, लेकिन बढ़े हुए किराये के कारण हर परिवार इसे वहन नहीं कर सकता. दरअसल, छठ बिहार के लोगों के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार के साथ घर लौटने का बड़ा मौका भी है. ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लाखों प्रवासी अपने घर पहुंचने की कोशिश में हैं, लेकिन ट्रेन में सीटों की कमी, फ्लाइट के महंगे टिकट और लंबी दूरी की बस यात्रा ने उनके सामने मुश्किल खड़ी कर दी है.