पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखने लगा है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनरॉक (Anarock) के अनुसार, निर्माण लागत में बढ़ोतरी और खरीदारों के बीच कमजोर होते सेंटिमेंट ने बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. स्टील, सीमेंट और पेंट जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में पहले ही भारी उछाल देखा जा चुका है.
हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगर यह व्यवधान लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर प्रोजेक्ट के समय, कीमतों और बाजार की मांग पर पड़ सकता है. निर्माण सामग्री के अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी इस क्षेत्र के लिए चुनौती बन रही हैं, कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा असर लेबर कॉस्ट पर पड़ेगा.
लागत बढ़ने और कीमतों को ज्यादा न बढ़ा पाने की मजबूरी के कारण डेवलपर्स के मुनाफे में कमी आ रही है. शिपमेंट में हो रही देरी से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है.
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खरीदार बना रहे हैं बाजार से दूरी
भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के चलते अब रियल एस्टेट सेक्टर में खरीदार भी पीछे हटते नजर आ रहे हैं. विशेष रूप से घरों जैसे दीर्घकालिक निवेश के फैसलों में देरी होने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द ही थम भी जाता है, तो भी इसका मनोवैज्ञानिक असर बाजार पर बना रहेगा. आर्थिक विकास और आय की स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच खरीदार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना सकते हैं.
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनरॉक (Anarock) के अनुसार, ऐसी स्थितियों में बड़े निवेश या पूंजी लगाने के फैसले फिलहाल रुक जाते हैं, और अभी बाजार इसी दौर से गुजर रहा है. यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब यह सेक्टर पहले से ही सुस्ती के संकेत दे रहा था. साल 2025 में घरों की बिक्री में गिरावट देखी गई थी, जबकि कीमतें बढ़ती रहीं, जिससे आम आदमी के लिए घर खरीदना कठिन (हो गया है.
डेवलपर्स के लिए बढ़ती मुश्किलें
लागत बढ़ने और कीमतें न बढ़ा पाने के कारण डेवलपर्स को इस अतिरिक्त खर्च का बड़ा हिस्सा खुद ही वहन करना होगा. कीमतों में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद, निकट भविष्य में डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ना तय है.