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ITR AY 2026-27: दो घर और रेंट इनकम पर नए नियम लागू, रिटर्न भरने से पहले जानें ये बदलाव

इन बदलावों का उद्देश्य कुछ क्षेत्रों में रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है, तो वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और रिपोर्टिंग की सटीकता को बढ़ाना है.

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टैक्सपेयर्स के लिए बदले ये नियम (Photo-ITG)
टैक्सपेयर्स के लिए बदले ये नियम (Photo-ITG)

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर ITR-1, ITR-2 और ITR-4 के ऑनलाइन फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटीज को चरणबद्ध तरीके से जारी करना शुरू कर दिया है. इन यूटिलिटीज के उपलब्ध होने के साथ ही, टैक्सपेयर्स फाइनेंशियल ईयर  2025-26 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना शुरू कर सकते हैं.

हालांकि, सालाना टैक्स फाइलिंग की यह प्रक्रिया देखने में सामान्य लग सकती है, लेकिन इस साल ITR फॉर्म और डिस्क्लोजर नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. ये बदलाव आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों, मकान मालिकों और छोटे कारोबारियों द्वारा रिटर्न फाइल करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं. 

किराए से आमदनी कमाने वाले करदाताओं के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए, ITR-1 और ITR-4 फॉर्म में अब एक विशेष कॉलम जोड़ा गया है, जिसका शीर्षक है - "वह किराये की राशि जिसे प्राप्त नहीं किया जा सका. यह प्रावधान उन मकान मालिकों के लिए लाया गया है जो वित्तीय वर्ष के दौरान किरायेदारों से किराया वसूल करने में असमर्थ रहे थे. इससे पहले, अप्राप्त किराए की जानकारी देने के लिए कोई अलग कॉलम नहीं होता था, जिससे रिपोर्टिंग में पारदर्शिता की कमी रहती थी.

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इस नए कॉलम के जुड़ने से स्पष्टता बढ़ने की उम्मीद है और इससे करदाताओं को अपनी किराये की आय और उस पर मिलने वाली छूट की सटीक जानकारी देने में मदद मिलेगी.

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वहीं इस साल सबसे बड़ी राहत उन लोगों के लिए है जो दो आवासीय संपत्तियों के मालिक हैं. करदाता अब पात्रता शर्तों के अधीन रहते हुए, ITR-1 और ITR-4 जैसे सरल रिटर्न फॉर्म का उपयोग जारी रखते हुए दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं. इससे पहले, दो घरों वाले कई करदाताओं को अक्सर अधिक जटिल रिटर्न फॉर्म का विकल्प चुनना पड़ता था, जिससे उनके लिए कागजी कार्रवाई बढ़ जाती थी.

यह बदलाव विशेष रूप से उन नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास एक खुद के रहने का घर है और साथ ही एक अतिरिक्त आवासीय संपत्ति भी है.

पुराना कैपिटल गेन्स (Old Capital Gains)

सरकार ने नवीनतम ITR फॉर्मों में कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को सरल बना दिया है. असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 के लिए, केंद्रीय बजट में किए गए बदलावों के कारण करदाताओं को 23 जुलाई, 2024 से पहले और बाद में किए गए लेन-देन से होने वाले कैपिटल गेन्स की अलग-अलग रिपोर्टिंग करनी पड़ी थी.

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अलग-अलग अवधियों के लिए अलग-अलग टैक्स दरें लागू थीं, जिससे कई निवेशकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. टैक्स प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के अनुसार, लिस्टेड इक्विटी शेयरों पर लागू होने वाली पुरानी कैपिटल गेन्स टैक्स दरें शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) के लिए 15% और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के लिए 10% अब फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 की रिपोर्टिंग के लिए प्रासंगिक नहीं हैं.

इसके परिणामस्वरूप, उन पुरानी दरों से जुड़े अलग रिपोर्टिंग कॉलम को संबंधित ITR फॉर्म से हटा दिया गया है, जिससे निवेशकों के लिए रिटर्न दाखिल करना आसान हो गया है.

अनिवार्य डिस्क्लोजर (Mandatory disclosure)

ITR-4 दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए एक नया अनुपालन नियम पेश किया गया है. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए, ITR-4 के तहत अनुमानित कराधान योजना का विकल्प चुनने वाले व्यक्तियों को अब निम्नलिखित विवरणों का खुलासा करना अनिवार्य होगा.

  • निवेश (Investments)
  • बैंक बैलेंस (Bank balances)

माना जा रहा है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और टैक्स अधिकारियों को करदाताओं की वित्तीय स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी. अनुमानित कराधान व्यवस्था का उपयोग करने वाले करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके वित्तीय रिकॉर्ड अपडेटेड हों.
 
धारा 89A (Section 89A) के तहत राहत

एक और उल्लेखनीय बदलाव विदेशी सेवानिवृत्ति खातों को रखने वाले करदाताओं से संबंधित है, धारा 89A योग्य भारतीय निवासियों को निर्दिष्ट विदेशी सेवानिवृत्ति लाभ खातों में जमा होने वाली आय पर दोहरे कराधान से राहत का दावा करने की अनुमति देती है.

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ITR यूटिलिटीज (utilities) के उपलब्ध होने के साथ ही, करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने से पहले संशोधित फॉर्मों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी चाहिए. मकान मालिकों, निवेशकों, अनुमानित करदाताओं और टैक्स छूट का दावा करने वाले व्यक्तियों को विशेष रूप से इन नए डिस्क्लोज नियमों पर ध्यान देना चाहिए.

 पूरे दस्तावेजों के साथ रिटर्न फाइल करने और सही ITR फॉर्म के तहत अपनी पात्रता की जांच करने से बाद में आने वाले आयकर नोटिस, प्रोसेसिंग में होने वाली देरी या टैक्स छूट के बेमेल होने जैसी दिक्कतों से बचा जा सकता है.


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