अमेरिका और ईरान में युद्ध एक बार फिर भीषण (US-Iran War) हो गया है और ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. इस युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आग लग गई है और इनमें तगड़ा उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 फीसदी से ज्यादा, तो WTI Crude Price 4 फीसदी से अधिक उछाल के साथ कारोबार कर रहा है.
अमेरिका के ईरान पर ताबड़तोड़ स्ट्राइक और ईरान के हमलों के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा है. इसके चलते तेल की कीमतों में आए इस उछाल ने दुनिया में फिर महंगाई का खौफ पैदा कर दिया है, ठीक वैसा ही जैसे US-Iran के बीच नाकाम हुए सीजफायर से पहले करीब 100 दिनों के लंबे युद्ध के दौरान देखने को मिला था.
तेल की कीमतों में अचानक उबाल
जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में जंग तेज होती जा रही है, वैसे-वैसे कच्चे तेल की कीमतें उछलती जा रही है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत (Brent Crude Price) करीब 5 फीसदी की उछाल के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के बिल्कुल करीब पहुंच गई.
इसके अलावा डब्ल्यूटीआई क्रूड प्राइस (WTI Crude Oil Price) भी 4 फीसदी अधिक की तेजी लेकर 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता हुआ नजर आया. बात करें, मर्बन क्रूड प्राइस की (Murban Crude Price) की इसे 5.50 फीसदी की बढ़ोतरी अचानक देखने को मिली है औऱ ये भी 75 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा है.
कहीं $120 पर न पहुंच जाए तेल?
तेल की कीमतों में आग में पहले भी दुनिया के तमाम देश झुलसे हैं, यहां तक की अमेरिका में भी महंगाई का बम फूट चुका है. बता दें कि बीते 28 फरवरी को पहली बार अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी और उसके बाद ईरानी सेना ने पलटवार किया, जबकि Hormuz Strait को बंद कर दिया था. ईरान के इस कदम ने दुनियाभर में तेल-गैस का संकट चरम पर पहुंचा दिया था.
दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर के करीब तक पहुंच गई थी और इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश, साउथ कोरिया, ब्रिटेन से लेकर भारत तक में कोहराम मच गया था. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी, तो एलपीजी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा था. अब एक बार फिर से कुछ ऐसे ही हालात बनते दिख रहे हैं.
कच्चे तेल का महंगाई से कनेक्शन
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से दुनिया का डरना लाजिमी भी है, क्योंकि ये सीधे महंगाई बढ़ाने का जरिया बन जाता है. इसे भारत के लिहाज से समझें, तो एक्सपर्ट कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 1 डॉलर प्रति बैरल की तेजी से पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Rates) में 50-60 पैसे प्रति लीटर का उछाल देखने को मिल सकता है. हालांकि, फ्यूल प्राइस क्रूड के अलावा भी कई अन्य कारकों पर निर्भर करते हैं, लेकिन कच्चे तेल का रोल अहम होता है.
तेल कंपनियों द्वारा जब महंगा क्रूड खरीदा जाता है, तो होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए आम जनता पर बोझ डाला जाता है, जैसा कि बीते मई महीने में देखने को भी मिला, देश में चार साल स्थिरता के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने अचानक पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक का बम फोड़ा और चार बार में इनकी कीमतों में करीब 7 रुपये की बढ़ोतरी कर डाली. ऐसे में अगर जंग बढ़ती है और होर्मुज में रुकावट जारी रहती है, तो महंगाई का बम फूटने का डर न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के तमाम तेल आयात पर निर्भर देशों में गहराने लगा है.