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Hindu Dharam: क्या भगवान विष्णु शिवजी से 5 बार हारे थे? जानते हैं इसके पीछे की अद्भुत कथाएं

Hindu Dharam: भगवान शिव और भगवान विष्णु में कोई भेद नहीं है. दोनों एक ही परम सत्य के अलग-अलग रूप हैं, जिन्हें हरि-हर कहा जाता है. कभी भगवान विष्णु की महिमा दिखती है, तो कभी शिव की शक्ति. लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही है सृष्टि का संतुलन और मानव कल्याण.

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भगवान शिव या विष्णु जी, कौन है सर्वोच्च? (PC- Pixabay)
भगवान शिव या विष्णु जी, कौन है सर्वोच्च? (PC- Pixabay)

Hindu Dharam: अक्सर यह सवाल उठता है कि भगवान विष्णु अधिक शक्तिशाली हैं या भगवान शिव? भगवान विष्णु के पास सुदर्शन चक्र है, तो शिव जी के पास त्रिशूल. भगवान विष्णु माया के स्वामी हैं, तो शिव जी के पास तीसरी आंख की दिव्य शक्ति है. भगवान विष्णु पालन करते हैं, जबकि शिव जी संहार करते हैं. लेकिन क्या सच में कोई एक दूसरे से श्रेष्ठ है? आज हम आपको कुछ ऐसी पौराणिक कथाएं बताएंगे, जिनमें भगवान शिव की शक्ति के सामने स्वयं भगवान विष्णु भी झुकते नजर आते हैं.

नरसिंह और शरभ अवतार की कथा

हिरण्यकश्यप के वध के बाद भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार अत्यंत उग्र हो गया था. उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था और पूरे ब्रह्मांड में भय फैल गया था. देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की. तब शिव ने शरभ (शरभेश्वर) का भयानक रूप धारण किया था. यह अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य प्राणी था. दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ. अंततः शरभ अवतार ने नरसिंह के क्रोध को शांत किया और ब्रह्मांड में संतुलन स्थापित किया था.

अनंत ज्योतिर्लिंग का रहस्य

एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु में विवाद हुआ कि कौन श्रेष्ठ है. तभी एक अनंत अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ. भगवान विष्णु वराह बनकर नीचे गए और ब्रह्मा हंस बनकर ऊपर, लेकिन कोई भी उसका अंत नहीं खोज पाया. तब भगवान शिव प्रकट हुए और बोले, 'मैं ही आदि हूं, मैं ही अंत हूं.' इस घटना के बाद भगवान विष्णु ने शिव जी की महानता स्वीकार की.

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दक्ष यज्ञ और वीरभद्र का प्रकोप

राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया था. यह अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने आत्मदाह कर लिया था. क्रोधित होकर शिव जी ने वीरभद्र को उत्पन्न किया था. वीरभद्र ने यज्ञ का विनाश कर दिया था. कहा जाता है कि इस प्रकोप के सामने कोई भी देवता, यहां तक कि विष्णु जी भी, उसे रोक नहीं पाए थे.

वृषभ अवतार और विष्णु के पुत्र

एक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के कुछ पुत्रों ने लोकों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया था. देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने वृषभ (बैल) का रूप लिया और उन्हें पराजित किया. जब भगवान विष्णु स्वयं युद्ध के लिए आए, तब भी वे शिव जी के इस रूप को पहचानकर शांत हो गए और उन्होंने विनम्रता से प्रणाम किया.

सुदर्शन चक्र और शिव जी की शक्ति

देवताओं के बीच यह चर्चा हुई कि क्या सुदर्शन चक्र को कोई रोक सकता है. परीक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र शिव पर छोड़ा. शिव जी ने बिना किसी प्रयास के उस चक्र को अपने मुख में समाहित कर लिया और फिर वापस लौटा दिया था. इससे स्पष्ट हुआ कि शिव की शक्ति असीम है.

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हरि और हर का अद्भुत संबंध

इन कथाओं के अलावा भी कई प्रसंग हैं- जैसे भगवान शिव का गोपी रूप धारण कर कृष्ण की रासलीला में शामिल होना. हनुमान जी (जिन्हें शिव का अंश माना जाता है) द्वारा सुदर्शन चक्र को निगल लेना. 

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