अमेरिका-ईरान के बीच फिर से जंग छिड़ने से ग्लोबल स्तर पर डर का माहौल बन चुका है. कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर ऊपर जाने लगी हैं और अब 80 डॉलर के करीब पहुंच गई है. एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली है. अमेरिकी मार्केट भी गिरावट का संकेत दे रहा है.
ग्लोबल स्तर पर यह गिरावट होर्मुज पर संशय को लेकर है. अमेरिका कह रहा है कि होर्मुज खुला हुआ है, उधर ईरान ने शिपिंग को रोकने का ऐलान किया है. इस बीच, ब्लूमबर्ग ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका और ईरान जंग के बीच जहाजों का आवागमन गुप्त तरीके से हो रहा है.
ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए केप्लर डेटा के अनुसार, रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी छह मालवाहक जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद करके इस रास्ते को पार किया. पिछले तीन दिनों में दिखाई देने वाले जहाजों की तुलना में डार्क क्रॉसिंग जहाजों की संख्या अधिक थी.
सोमवार की सुबह होर्मुज से कोई जहाज गुजरता हुआ नहीं दिखाई दिया. हालांकि, हाल के दिनों में होर्मुज के दोनों ओर फारस की खाड़ी या ओमान की खाड़ी में ऐसे जहाज दिखाई दिए हैं, जिन्होंने अपना स्टेटस दूसरी ओर से दिखाया. इससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने ट्रांसपोंडर चालू किए बिना होर्मुज से निकल रहे हैं.
क्यों गुप्त रास्ता अपना रहे जहाज?
अमेरिका-ईरान के बीच जंग के कारण जहाज मालिक अब कोई भी रिक्स नहीं लेना चाहते हैं. उनको डर है कि अगर उनके जहाजों का स्टेट्स दिखाई देता है तो जहाजों पर अटैक हो सकता है. ऐसे में वे स्मार्ट तरीका अपनाते हुए अपने ट्रांसपोंडर को बंद कर रहे हैं, ताकि वे गुप्त तरीके से होर्मुज को पार कर सकें.
क्यों ईरानी वाले रास्ते से ही गुजर रहे जहाज?
हालांकि, रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका सपोर्टिव ओमान तट के साउथ एरिया से होकर गुजरने वाली आवाजाही पूरी तरह से रुक गई है और इस रास्ते से आखिरी आवाजाही बुधवार को हुई थी. वहीं ईरान के हिस्से यानी उत्तरी मार्ग पर शनिवार तक कुछ हद तक आवाजाही देखी गई.
ओमान कॉरिडोर का उपयोग करने वाले जहाजों पर ईरानी हमलों के कारण जहाजों का यातायात प्रभावित हुआ है. जहाज मालिकों के पास दूसरा विकल्प उत्तरी मार्ग का उपयोग करना है, लेकिन इससे उन्हें ईरान द्वारा लगाए गए शुल्कों के साथ-साथ अमेरिका से जुर्माने के जोखिम का भी सामना करना पड़ेगा.
कबसे गुप्त रास्ते से जा रहे जहाज?
होर्मुज खाड़ी से गुप्त रूप से तेल निकालना सबसे पहले अप्रैल के मध्य में आम हो गया, जब संयुक्त अरब अमीरात ने उन टैंकरों के माध्यम से फारस की खाड़ी से अपना तेल निकालना शुरू किया जो पहले बंद पड़े थे. इस कदम से आंशिक रूप से यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध के दौरान तेल की कमी उतनी गंभीर क्यों नहीं थी जितनी संघर्ष के शुरुआती दिनों में आशंका जताई गई थी.