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ईरान से रिलायंस ने खरीदा 50 लाख बैरल तेल? रिपोर्ट पर कंपनी का आया ये जवाब

रिलायंस इंडस्‍ट्रीज ने ईरानी तेल खरीद पर बड़ी जानकारी दी है. आज सुबह ये दावा किया गया था कि रिलायंस ने ईरान से 50 लाख बैरल तेल प्रीमियम प्राइस पर खरीदा है, जिसे लेकर कंपनी ने साफ तौर पर इनकार किया है.

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रिलायंस ने नहीं खरीदा ईरानी तेल. (Photo: Reuters)
रिलायंस ने नहीं खरीदा ईरानी तेल. (Photo: Reuters)

संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका ने ईरानी तेल को लेकर 30 दिनों की छूट दी है. इस बीच, रॉयटर्स का दावा था कि भारत की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने 50 लाख बैरल कच्‍चा तेल ईरान से खरीदा है और वह भी प्रीमियम पर. हालांकि, अब मुकेश अंबानी की कंपनी इससे इनकार किया है. 

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) का कहना है कि उसने ईरान से 50 लाख बैरल तेल नहीं खरीदा है, जबकि मंगलवार की सुबह रॉयटर्स ने बताया कि RIL ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि तेल की डिलीवरी कब होगी. 

रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि कच्‍चा तेल नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से खरीदा गया था, और कच्चे तेल की कीमत IEC ब्रेंट फ्यूचर की तुलना में करीब 7 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर तय की गई थी. इस खरीद से पहले यह भी खबर थी कि ईरान ने भारत को प्रीमियम पर तेल ऑफर किया था, जबकि भारत ने रुपये में खरीद की शर्त रखी थी. 

अमेरिका ने दी है 30 दिनों की छूट 
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ट्रंप सरकर ने 30 दिनों की छूट का ऐलान किया, लेकिन सिर्फ समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद की अनुमति दी गई. यह छूट 20 मार्च या उससे पहले लोड किए गए और 19 अप्रैल तक उतारे गए तेल पर लागू होती है. इसमें वो भी जहाज शामिल हैं, जो प्रतिबंधों के तहत लागू हैं. इस कदम से खरीदारों के लिए ईरानी कच्चे तेल तक पहुंच बनाने का एक सीमित अवसर मिल गया है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बाजार से काफी हद तक गायब थे. 

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भारत ने रूस से खरीदी बड़ी खेप 
यह भी बता दें कि मई 2019 में अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद से भारत ने ईरानी तेल का आयात नहीं किया है. हाल के सालों में ईरानी कच्‍चे तेल की खरीद चीनी रिफाइनर्स द्वारा की जा रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति की कमी को दूर करने के लिए अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने इस महीने 4 करोड़ बैरल से अधिक रूसी कच्चे तेल की खरीद की है. 

ब्रोकरेज का क्‍या है कहना? 
सोमवार को एनालिटिक्स फर्म केप्लर ने कहा कि अमेरिका द्वारा 30 दिन की छूट देने के फैसले से खरीदारों की संख्या में तत्काल वृद्धि होने की संभावना नहीं है. फर्म ने कहा कि हालांकि अमेरिका द्वारा ज्‍यादातर देशों को ईरानी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने का उद्देश्य कीमतों को कम करना है, लेकिन निकट भविष्य में आपूर्ति पर इसका प्रभाव सीमित हो सकता है.

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