रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को कहा कि कोई बैंक जिसने वसूली प्रक्रिया के तहत किसी मामले में अचल संपत्ति का अधिग्रहण किया है, वह उसे डिफॉल्ट यूजर्स या संबंधित पक्षों को वापस नहीं बेच सकता है. आरबीआई ने आगे कहा कि सामान्य तौर पर बैंकों से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वे अपने नियमित लोन देने की कामों के बदले NPA पर रिकवरी पर ज्यादा फोकस करें.
आरबीआई ने बैंक द्वारा अलग-अलग तंत्रों के माध्यम से वसूले गए अचल संपत्ति को लेकर नए मानदंड जारी करते हुए कहा कि असाधारण मामलों में, जहां देनदारियां NPA हो जाती हैं और कानूनी उपायों का सहारा लिया जाता है, बैंक वसूली रणनीति के हिस्से के तौर पर सुरक्षा के रूप में दी गई अचल संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त कर सकते हैं.
केंद्रीय बैंक ने कहा कि एक बैंक को अपनी नीति में सेटलमेंट की अधिकतम अवधि के भीतर, अधिकतम सात वर्षों की सीमा के तहत गैर-वित्तीय परिसंपत्ति का निपटान करना होगा. बैंक ने आगे कहा कि बैंकों को सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से जल्द से जल्द NPA का सेटलमेंट करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए.
केंद्रीय बैंक ने कहा कि कर्जदाता आम तौर पर अचल संपत्तियों में लेन-देन अपने मुख्य व्यवसाय के हिस्से के रूप में नहीं करते हैं, सिवाय इसके कि जब ऐसी संपत्तियां उधारकर्ताओं के दावों की पूर्ति के लिए अधिग्रहित की जाती हैं. नए नियम ऐसे प्रॉपर्टी पर क्लियरेंस जारी की जाती है. निर्देशों के अनुसार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (SNFAs) का अधिग्रहण केवल तभी किया जा सकता है जब बैंक का उधारकर्ता के प्रति लोन NPA के तौर पर क्लियरिफिकेशन किया गया हो. अधिग्रहण बकाया लोन के पूरे या आंशिक सेटलमेंट के बदले गैर-रिकोर्स आधार पर हो सकता है. आंशिक निपटान के मामलों में, बाकी लोन को पुनर्गठित लोन माना जाएगा और उस पर नए नियम लागू होंगे.
आरबीआई ने वित्तीय संस्थाओं को दिए निर्देश
आरबीआई ने बैंकों, एसएफबी और एनबीएफसी को SNFAs के अधिग्रहण और निपटान को कवर करने वाली बोर्ड-अप्रूव पॉलिसी बनाने का भी निर्देश दिया है. इन नीतियों में कुल परिसंपत्तियों के हिस्से के रूप में ऐसी परिसंपत्तियों की सीमा, पात्रता मानदंड, अधिग्रहण से पहले वसूली के प्रयास और सात साल की अधिकतम सेटलमेंट समय होनी चाहिए.
30 सितंबर तक लागू रहेंगे नियम
आरबीआई ने आगे कहा कि 30 सितंबर, 2026 तक बकाया एसएनएफए को 30 सितंबर, 2027 तक नए मानदंडों का अनुपालन करना होगा. निर्देशों में इन संपत्तियों के लिए अलग-अलग आवश्यकताओं को भी तय किया गया है. कुल एनपीए, नेट एनपीए, संकटग्रस्त लोन या प्रावधान कवरेज अनुपात का हिस्सा नहीं होंगे और इसके बजाय बैंकों, लघु वित्त बैंकों और एनबीसीएफसी की बैलेंस शीट में अलग-अलग हेडलाइन के साथ दिखाए जाएंगे.