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Rajesh Export Scam: ₹15.15 लाख करोड़ का खेल... LIC का भी राजेश एक्‍सपोर्ट में मोटा निवेश, क्‍या फंस गया पैसा?

राजेश एक्‍सपोर्ट पर सेबी ने बड़ा एक्‍शन लिया है. इस कंपनी पर सेबी ने 15.15 लाख करोड़ रुपये फर्जी एक्‍सपोर्ट का आरोप लगाया है. खबर आते ही इस कंपनी के शेयर में लोअर सर्किट लगा है.

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एलआईसी में राजेश एक्‍सपोर्ट की बड़ी हिस्‍सेदारी. (Photo: File/ITG)
एलआईसी में राजेश एक्‍सपोर्ट की बड़ी हिस्‍सेदारी. (Photo: File/ITG)

सेबी ने राजेश एक्‍सपोर्ट को लेकर बड़ा खुलासा किया है. सेबी का आरोप है कि इस कंपनी ने फर्जी तरीके से 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू दिखाया है. अब एक और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है.

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास ज्‍वेलरी बनाने वाली इस कंपनी में मार्च 2026 की तिमाही तक 10.80 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. यह जानकारी कंपनी के नए स्‍टॉक होल्डिंग पैटर्न से पता चलता है. 

ट्रेंडलाइन के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले तीन वर्षों में राजेश एक्सपोर्ट्स में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है. मार्च 2023 में FII की हिस्सेदारी 17.6 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 तक घटकर लगभग 14.3 प्रतिशत रह गई.

विदेशी निवेशकों में ब्रिज इंडिया फंड की कंपनी में 8.46 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि मार्च 2026 की तिमाही तक श्वाब फंडामेंटल इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी ईटीएफ के पास 2.70 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. स्‍टॉक होल्डिंग पैटर्न से पता चला कि धीरजलाल जेरामभाई ढाकन के पास इसी अवधि के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स में 4.81 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. वहीं दूसरी ओर, प्रमोटर ग्रुप के पास कंपनी में 54.55 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. 

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इस बीच, आभूषण निर्माता कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयर गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 5 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गए. इस स्तर पर, पिछले छह महीनों में शेयर की कीमत में 44.63 प्रतिशत की गिरावट आई है. 

सेबी ने लगाया गंभीर आरोप
शेयर की कीमत में आई तेज गिरावट भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद हुई, जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने पांच साल की अवधि में अपने लगभग पूरे राजस्व को गलत तरीके से पेश किया और आवश्यक अप्रूवल और खुलासे के बिना कंपनी के पैसे का दुरुपयोग किया. 

एक अंतरिम आदेश में सेबी ने राजेश एक्‍सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता को अपनी जांच पूरी होने तक शेयर बाजार में एंट्री करने से रोक दिया है. राजेश एक्‍सपोर्ट्स ने इस मामले पर अभी तक कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. 

99 फीसदी सहायक कंपनियों से मिला रेवेन्‍यू 
सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स के समेकित राजस्व का लगभग 97-99 प्रतिशत हिस्सा उसकी विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित वैलकैम्बी एसए से प्राप्त हुआ था. हालांकि, कंपनी पर आरोप है कि उसने अपनी सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरणों को पब्लिक नहीं किया. नियामक ने पाया कि हालांकि वैलकैम्बी एसए को ग्रुप की प्रमुख परिचालन इकाई के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन इसके वित्तीय विवरणों में कोई रेवेन्‍यू नहीं दिखाया गया. 

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सेबी ने आरोप लगाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2025 के बीच अपनी सहायक कंपनियों द्वारा रेवेन्‍यू के 99.80 प्रतिशत यानी लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये का गलत विवरण दिया. बाजार नियामक ने एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लेन-देन पर भी आपत्ति जताई. आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने एफ्लुएंस के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद की सूचना दी. 

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