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'यह धार्मिक छूट नहीं, लॉजिकल है...', सिखों को हेलमेट से छूट पर बॉम्बे हाईकोर्ट की मोहर

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने सिख पुरुषों को दोपहिया वाहन चलाते समय पगड़ी पहनने पर हेलमेट पहनने से मिली कानूनी छूट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

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बॉम्बे हाइकोर्ट ने सिखों के हेलमेट न पहनने से जुड़ी याचिका की दलीलें खारिज कर दी हैं
बॉम्बे हाइकोर्ट ने सिखों के हेलमेट न पहनने से जुड़ी याचिका की दलीलें खारिज कर दी हैं

दोपहिया वाहन चलाते समय पगड़ी पहनने वाले सिख पुरुषों को हेलमेट पहनने से मिली कानूनी छूट को चुनौती देने वाली याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने खारिज कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि, यह छूट धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान के तहत किए गए "उचित वर्गीकरण" (Reasonable Classification) के सिद्धांत पर आधारित है. इसलिए इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता.

न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने 23 वर्षीय छात्र कीर्तेश चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 के उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसमें पगड़ी पहनने वाले सिखों को हेलमेट पहनने से छूट दी गई है. उनका तर्क था कि यह प्रावधान संविधान के आर्टिकल 14 के तहत मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है और किसी एक वर्ग को विशेष सुविधा देना संविधान की भावना के खिलाफ है.

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाकर्ता की दलील

हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि याचिका पूरी तरह से गलत धारणा पर आधारित है. संविधान का आर्टिकल 14 केवल मनमाने या भेदभावपूर्ण कानूनों पर रोक लगाता है, लेकिन उचित और तार्किक आधार पर किए गए वर्गीकरण की अनुमति देता है.

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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आर्टिकल 14 'क्लास लेजिस्लेशन' यानी किसी विशेष वर्ग के पक्ष में भेदभावपूर्ण कानून बनाने की अनुमति नहीं देता, लेकिन 'रीज़नेबल क्लासिफिकेशन' यानी उचित वर्गीकरण की इजाजत देता है. अगर सरकार के पास किसी अलग वर्ग के लिए विशेष प्रावधान बनाने का तार्किक आधार और सार्वजनिक हित से जुड़ा उद्देश्य हो, तो ऐसा वर्गीकरण संवैधानिक रूप से वैध माना जाता है.

सिखों की पगड़ी पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिखों को दी गई यह छूट जाति, पंथ या धर्म के आधार पर नहीं है, बल्कि पगड़ी पहनने की उनकी विशिष्ट परंपरा और उससे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखकर दी गई है. इसलिए इसे धार्मिक आधार पर विशेषाधिकार नहीं कहा जा सकता. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 के अनुसार, दोपहिया वाहन चलाने या उस पर सवारी करने वाले हर एक शख्स के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है. हालांकि इसी धारा के प्रावधान में यह भी कहा गया है कि पगड़ी पहनने वाले सिख व्यक्तियों पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह छूट संविधान के अनुरूप उचित वर्गीकरण का उदाहरण है. अदालत ने केंद्र की इस दलील से सहमति जताई और कहा कि हेलमेट संबंधी कानून लोगों की जान की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, लेकिन सिखों को दी गई सीमित छूट किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करती. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.
 

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