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पेट्रोल-डीजल नहीं, फिर कैसे चलेगी आपकी कार-बाइक, अचानक क्‍यों फ्यूल चेंज की हो रही बात?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल-डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन को बदलने की बात कही है. साथ ही ऑटो कंपनियों और वाहन चालकों को चेतावनी भी दी है कि पेट्रोल-डीजल भारत के लिए फ्यूचर ईंधन नहीं है.

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न‍ितिन गडकरी ने कहा कि अब पेट्रोल-डीजल फ्यूचर ईंधन नहीं है. (Photo: File/ITG)
न‍ितिन गडकरी ने कहा कि अब पेट्रोल-डीजल फ्यूचर ईंधन नहीं है. (Photo: File/ITG)

पेट्रोल-डीजल को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने ऑटोमेकर्स को बड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल का अब कोई फ्यूचर नहीं है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री का कहना है कि वाहन निर्माता कंपनियों को दूसरे विकल्‍प की ओर देखना चाहिए. 

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अगर आप ईंधन में बदलाव नहीं करने वाले हैं, तो सावधान हो जाइए. पेट्रोल और डीजल का कोई अच्छा भविष्य नहीं है. गडकरी ने बसवर्ल्ड इंडिया 2026 शिखर सम्मेलन में बोलते हुए ऑटो सेक्‍टर की कंपनियों और वाहन खरीदारों को हाइड्रोजन, इथेनॉल, सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन जैसे विकल्पों पर फोकस होने के लिए कहा. 

नितिन गडकरी के इस बयान के बाद भारत में फ्यूल को लेकर चर्चा होने लगी है और कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. इसमें से एक सवाल तो यह है कि पेट्रोल-डीजल को चेंज करने की अचानक से बात क्‍यों होने लगी है और क्‍या पेट्रोल-डीजल को मेन व्‍हीकल एनर्जी स्‍ट्रक्‍चर से बाहर करना आसान होगा? आइए जानने की कोशिश करते हैं... 

क्‍यों होने लगी ईंधन चेंज की बात? 
दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव ने पूरी दुनिया के लिए एनर्जी संकट पैदा कर दिया है. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कच्‍चे तेल का आयात प्रभावित हुआ है. भारत में ईंधन की कीमतें भले ही नहीं बढ़ी हैं, लेकिन ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में बाधा आने से भारत में ईंधन को चिंताएं पैदा तो हो ही गई हैं. 

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भारत जीवाश्‍म ईंधन (पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल) के आयात पर ज्‍यादा निर्भर है. ऐसे में जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर संकट की स्थिति आ सकती है. साथ ही आयात पर ज्‍यादा निर्भर होना भारत के तेजी से बढ़ते इकोनॉमी के लिए भी अच्‍छे संकेत नहीं हैं. यही सब कारण है कि भारत अन्‍य एनर्जी विकल्‍पों की ओर देख रहा है और फ्यूल चेंज की भी बातें होने लगी हैं. 

हाइड्रोजन बेस्‍ड बसों का ट्रायल 
गडगरी का दावा है कि अभी हाइड्रोजन फ्यूल को लेकर पायलट प्रोग्राम शुरू किया गया है और कई कंपनियां इसके परीक्षण में भाग ले रही हैं. अब हम 10 मार्गों पर हाइड्रोजन बसें और हाइड्रोजन ट्रक चला रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, टाटा मोटर्स, वोल्वो, अशोक लेलैंड और महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत कई भारतीय कंपनियां इस परीक्षण में शामिल हैं. 

इथेनॉल को लेकर क्‍या प्‍लान? 
नितिन गडकरी ने कहा कि कच्‍चे तेल पर निर्भरता कम करने और घरेलू ईंधन बनाने की कोशिश जारी है और अभी हम पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिला रहे हैं और अब इसे और बढ़ाने की योजना चल रही है. गडकरी ने कहा कि अब हम फ्लेक्सिबल इंजन बनाने के प्रॉसेस में हैं. टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन और कई घरेलू निर्माताओं समेत कई कंपनियां इसपर काम कर रही हैं. 

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ईवी पर भी फोकस 
गडकरी ने कहा कि अकेले इलेक्ट्रिक बसों की मांग अगले तीन सालों में 1.5 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है, जबकि अभी उत्पादन क्षमता सालाना लगभग 70,000 बसें हैं. उन्होंने कंपनियों से उत्पादन क्षमता को कम से कम तीन गुना बढ़ाने और गुणवत्ता, सुरक्षा और आराम पर फोकस करने के लिए कहा. इसके अलावा, ईवी स्‍कूटर और ईवी कार की डिमांड भी तेजी से देश में बढ़ रहा है.  

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