अमेरिका के साथ युद्ध की आग में झुलसते ईरान की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. देश की करेंसी क्रैश हो चुकी है, महंगाई की मार आम जनता पर साफ दिख रही है और उसकी तेल आधारित इकोनॉमी ध्वस्त हो गई है. इन सबसे बीच अब 60 से ज्यादा देशों ने एक साथ मिलकर ईरान को बड़ा झटका देते हुए उसकी टेंशन बढ़ा दी है.
दरअसल, इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर टोल और शुल्क लगाने का विरोध एकजुट होकर किया है और ईरान के इन प्रयासों के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया है कि अब होर्मुज पर टोल नहीं. बता दें कि यूरोपीय संघ द्वारा तेल आयात के लिए दुनिया के लिए सबसे जरूरी समुद्री रूट Hormuz Strait पर सोमवार को यह घोषणा जारी की गई है, जहां ईरान ने जहाजरानी पर अपना कंट्रोल कर लिया है और डिमांड रखी है कि इससे गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को टोल देना होगा.
ईरान के उठाए कदमों के खिलाफ एक्शन
ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और सिंगापुर समेत 33 अन्य देशों के साथ ही सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के समर्थन वाले इस संकल्प का मकसद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नेविगेशन की आज़ादी की रक्षा करना है. यह उन कदमों के खिलाफ भी चेतावनी देता है जो अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली जल-संधियों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को रोक सकते हैं.
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने घोषणा करते हुए कहा कि देशों को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट को कमाई या राजनीतिक दबाव बनाने के जरिये में बदलने की कोशिशों का विरोध करना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में लिखा, 'अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन सभी के लिए ओपन रहना चाहिए, न कि सिर्फ उनके लिए जो पैसे दे सकते हैं. आज, 60 देशों ने हमारे 'No Fee, No Toll' ग्लोबल संकल्प में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर टोल या फीस का विरोध करने का वादा किया है.'
60 देशों का साथ इन देशों के लिए मैसेज
काजा कल्लास ने कहा ईरानी कंट्रोल वाले प्रमुख समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के टोल-फीस वसूलने की खिलाफत में 60 देशों का एक साथ आना उन सभी लोगों के लिए एक साफ कूटनीतिक संकेत है, जो अपने फायदे के लिए समुद्री रूट्स पर कब्जा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि, 'मैं उन सभी देशों का शुक्रिया करना चाहती हूं, जिन्होंने इस पर साइन किए हैं और दूसरों को भी हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करती हूं.'
EU की घोषणा में कहा गया, 'हम ऐसे किसी भी उपाय का विरोध करते हैं, जिसमें गैर-कानूनी शुल्क, टोल, भेदभावपूर्ण प्रतिबंध, पहले से मंजूरी लेने की जरूरतें या अन्य शर्तें शामिल हैं. जो अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेट से कानूनी नेविगेशन में बाधा डालें या उसे नुकसान पहुंचाएं.'

दुनिया के लिए क्यों जरूरी ये होर्मुज?
यूरोपीय यूनियन की ये घोषणा इसलिए भी अहम है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पानी के वे संकरे रास्ते हैं, जो बड़े समुद्रों और महासागरों को जोड़ते हैं. ये ग्लोबल ट्रेड के लिए बहुत जरूरी हैं, क्योंकि जहाज इनका इस्तेमाल देशों के बीच तेल, नेचुरल गैस, भोजन और अन्य सामान लाने-ले जाने के लिए करते हैं.
Hormuz Strait इन रूट्स में रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है. ईरान और ओमान के बीच स्थित यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. बीते 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहली बार ईरान पर स्ट्राइक शुरू की थी, तब से दुनिया की कुल तेल जरूरत का लगभग 20% पूरा करने के लिए जिम्मेदार ये रूट बाधित है. होर्मुज से Oil-Gas के जहाजों की आवाजाही पर रोक का सीधा असर एनर्जी सप्लाई, परिवहन लागत और मध्य पूर्व से कहीं दूर तक फैली इंटरनेशनल सप्लाई चेन पर पड़ा. इसका खामियाजा भी तेल-गैस आयात पर निर्भर देशों ने भुगता.
Iran की ये है डिमांड
ईरान का कहना है कि उसका होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल है. इसके साथ ही उसने डिमांड रखी है कि इस रूट से गुजरने के लिए पेमेंट किया जाए. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर के सलाहकार मोहम्मदरेजा नकदी ने कहा है कि ओमान तट के पास दक्षिणी रास्ते समेत जिन रास्तों को ईरान गैर-कानूनी मानता है, उन्हें जल्द ही बंद कर दिया जाएगा.
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि होर्मुज बंद है और आईआरजीसी का इस पर पूरा कंट्रोल है. यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक ईरान की जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं. Hormuz Closure के असर को देखें, तो अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत से पहले, हर दिन लगभग 125 बड़े कमर्शियल जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, लेकिन ताजा शिपिंग डेटा के अनुसार बीते 6 अक्टूबर को सिर्फ 7 तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही देखी गई.