भारतीय रेलवे की खूब तारीफ हो रही है, वैसे तो वंदे भारत ट्रेन हाईटेक फीचर्स और हाई स्पीड के लिए जानी जाती हैं. लेकिन पहली बार वंदे भारत ट्रेन ने एक इंसान को नया जीवन देने के लिए अद्भुत काम कर दिखाया है.
दरअसल, पहली बार सूरत से अहमदाबाद के बीच एक 'लाइव मानव हृदय' यानी दिल को ट्रांसप्लांट के लिए वंदे भारत ट्रेन के जरिए सफलतापूर्वक पहुंचाया गया. भारतीय रेलवे के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है.
वंदे भारत ट्रेन के नाम बड़ी उपलब्धि
दिल के ट्रांसप्लांटेशन में सबसे बड़ी चुनौती समय का ध्यान रखना होती है. शरीर से अलग होने के बाद किसी भी मानव हृदय को नया जीवन देने के लिए बहुत ही कम समय मिलता है. ऐसे में भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस की मदद से धड़कता दिल सूरत और अहमदाबाद पहुंचाने का काम किया है.
पहली बार 20901 मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से सूरत से अहमदाबाद तक धड़कता दिल (Live Heart) का सफलतापूर्वक पहुंचाया गया, यह हार्ट यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर अहमदाबाद में ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाया गया और फिर वहां भर्ती मरीज का सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट कर दिया गया. ये ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ती है. हार्ट को पहुंचाने में करीब 229 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2.5 घंटे वक्त लगा.
रेलवे स्टेशन से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर
इसके लिए अस्पताल से सूरत रेलवे स्टेशन तक 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया, ताकि ट्रैफिक में एक सेकंड का भी देरी न हो. वंदे भारत ट्रेन में जैसे मेडिकल टीम लाइव हार्ट को लेकर पहुंची, चंद सेकंड देरी किए बिना ट्रेन फुल रफ्तार से भागने लगी. इस दौरान ट्रेन में आवश्यक मेडिकल प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया.
उसके बाद ट्रेन जैसे ही अहमदाबाद स्टेशन पर पहुंची, RPF और स्थानीय पुलिस की टीम पहले से ही वहां मुस्तैद थी. स्टेशन से अस्पताल तक एक बार फिर ग्रीन कॉरिडोर के जरिये बिना देरी दिल को ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचा दिया गया.
बता दें, अभी तक ऐसी आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्टेशन के लिए हवाई मार्ग या एम्बुलेंस का उपयोग किया जाता रहा है. लेकिन पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस की स्पीड का लाभ उठाते हुए भारतीय रेलवे ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया है.