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India-US Trade: कुछ एग्री और मेडिकल पर '0' टैरिफ लगाएगा भारत, ट्रंप के करीबी का दावा

अमेरिका से ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी व्‍यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर का कहना है कि अमेरिका के ज्‍यादातर उत्‍पाद पर टैरिफ घटकर शून्‍य होने जा रहा है. यह हमारे लिए एक बड़ी जीत है.

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भारत और अमेरिका के बीच व्‍यापार समझौता. (Photo: ITG)
भारत और अमेरिका के बीच व्‍यापार समझौता. (Photo: ITG)

अमेरिकी ट्रेड डील से जुड़ एक अधिकारी ने भारत के टैरिफ को लेकर बड़ा दावा किया है. मंगलवार को एक इंटरव्‍यू में अमेरिकी व्‍यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि भारत ने अमेरिकी निर्यात की एक बड़ी चेन पर टैरिफ को 13.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने पर सहमति जताई है. हालांकि भारत ने कुछ ए्ग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स पर टैरिफ को बनाए रखा है और अपने एग्री उत्पादों को सुरक्षित रखा है. 

ग्रीर ने सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स को बताया कि एक तरफ, हम भारत के खिलाफ 18% का टैरिफ स्तर बनाए रखेंगे, क्योंकि हमारा उनके साथ बहुत बड़ा व्यापार घाटा है. इसके साथ ही वे हमारे लिए कई एग्रीकल्‍चर उत्‍पादों, मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोड्क्‍टस, केमिकल्‍स, मेडिकल इक्विपमेंट आदि पर टैरिफ कम करने पर सहमत हो गए हैं. 

टैरिफ के सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी इंडस्ट्रियल चीजों पर औसत टैरिफ फिलहाल करीब 13.5 फीसदी है और यह घटकर लगभग सभी वस्‍तुओं पर '0' प्रतिशत हो जाएगा. उन्‍होंने दावा किया कि लगभग 98 से 99 फीसदी चीजों से टैरिफ 0 हो जाएगा. 

इन चीजों पर शून्‍य टैरिफ! 
अमेरिकी व्‍यापार प्रतिनिधि ने कहा कि भारत ने अमेरिका से आने वाली कई चीजों पर टैरिफ कम कर दिया है, लेकिन अमेरिका की तरह ही कुछ चुनिंदा सेक्‍टर्स में संरक्षणवादी नीति अपनाई है. उन्‍होंने आगे कहा कि एग्री उत्‍पादों  की एक बड़ी चेन है,  इसलिए बहुत सी चीजों पर उपलब्‍धता शून्‍य हो जाएगी. भारत ने US समेत दुनिया के हर देश की तरह, कुछ प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा व्‍यवस्‍था लागू की थी, जिसे वे नियंत्रण बनाए रखेंगे. हालांकि कई चीजों जैसे कि मेवे, शराब, स्पिरिट, फल, सब्जियां आदि की उपलब्धता शून्य हो जाएगी. यह एक बड़ी जीत है. 

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ज्‍यादातर टैरिफ बाधाओं को खत्‍म करेगा अमेरिका
इसके अलावा, जैमीसन ग्रीर ने  उल्‍लेख किया कि भारत नॉन-टैरिफ बाधाओं को भी काफी हद तक कम कर रहा है. व्यापार में तकनीकी बाधाओं से संबंधित कई मुद्दों पर भारतीयों के साथ हमारी समझ और समझौता है. ऐसे क्षेत्र जहां उन्होंने अमेरिकी मानकों को स्वीकार नहीं किया है. 

उन्‍होंने कहा कि हम जानते हैं कि अमेरिकी सामान सुरक्षित हैं और प्रभावी हैं. उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ अमेरिकी मानकों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर असहमति है और भारतीयों के पास उन्हें स्वीकार करने के लिए 'अपने स्वयं के राजनीतिक विचार' और प्रक्रियाएं हैं.

भारत खोल देगा अमेरिका के लिए बाजार 
इसके अलावा, ग्रीर ने कहा कि व्‍यापार समझौता के तहत भारत 'एक अरब से ज्‍यादा लोगों का बाजार' अमेरिकी सामानों के लिए खोल देगा. जब उनसे भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने वास्तव में 2022-23 तक मॉस्को से अपनी तेल और ऊर्जा आवश्यकताओं का उतना आयात नहीं किया था, लेकिन जब वेनेजुएला जैसे अन्य तेल उत्पादक देशों पर प्रतिबंधों के कारण रूसी कच्चे तेल का व्यापार छूट पर हो रहा था, तब से उसने ऐसा करना शुरू कर दिया. 

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अमेरिका से तेल खरीद रहे हैं भारतीय
उन्‍होंने कहा कि ट्रंप ने बिल्कुल सही तरीके से भारतीयों को यह चेतावनी दी कि अमेरिका इसे रूसी युद्ध का समर्थन मानते हैं. पिछले साल के अंत में ही भारतीयों ने रूसी तेल की खरीद कम करना शुरू कर दिया था. हम इस बात पर नजर रख रहे हैं कि वे अमेरिका से ऊर्जा की खरीद में विविधता ला रहे हैं. सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि गैस, प्रोपेन और अन्य चीजें भी खरीद रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के अलावा भारत तेल खरीद में विविधता लाने के लिए वेनेजुएला या खाड़ी देशों की ओर भी देख सकता है. अंत में उन्होंने कहा कि ऐसा करने के कई अवसर हैं. भारतीय सही चुनाव कर रहे हैं.

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