जंग के दौरान भी सोने की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. डॉलर के मजबूत होने के साथ ही सोना उतनी तेजी से नीचे नहीं आया है, जितनी चांदी टूटी है. जनवरी से अभी तक देखें तो चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से 2 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है, जबकि सोना 35 से 40 हजार रुपये ही सस्ता हुआ है. यह दिखाता है कि चांदी की तुलना में सोना ज्यादा स्थिर है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्थिरता के पीछे असली खेल केंद्रीय बैंकों द्वारा किया जा रहा है. खासकर चीन, जो काफी समय और तेजी से सोने का भंड़ार बढ़ा रहा है. इसी रेस में यूरोप का एक छोटा सा देश पोलैंड भी शामिल हो चुका है, जो आक्रामक तरीके से सोने की खरीद कर रहा है.
केंद्रीय बैंकों की मांग सोने की कीमतों को मजबूत आधार पेश किया है, जिससे हालिया अस्थिरता के बावजूद येलो मेटल को लॉन्गटर्म सपोर्ट लेवल बनाए रखने में मदद मिली है. कोबेसी लेटर के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने फरवरी में 19 टन सोने की खरीद की, जो लगातार 23वां महीना है जब शुद्ध खरीद हुई है. जनवरी में 6 टन की अतिरिक्त खरीद के बाद, इस साल अब तक कुल खरीद 25 टन हो गई है.
सबसे ज्यादा इस छोटे से देश ने की खरीदारी
पोलैंड के नेशनल बैंक ने फरवरी में 20 टन सोने की खरीदारी की है, जिससे उसका कुल गोल्ड रिजर्व 570 टन हो गया. यह अब उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 31% है, जो रिजर्व असेट के तौर पर सोने की ओर रणनीतिक बदलाव को दिखाता है. उज्बेकिस्तान भी सक्रिय रहा है, जिसने 8 टन सोने की खरीद की है और इसका भंडार 407 टन तक पहुंचा गया है.

चीन भी तेजी से जोड़ रहा सोना
फरवरी में चीन द्वारा सोने की खरीद में मामूली तेजी, सिर्फ 1 टन दर्ज की गई, लेकिन अब फिर से सोने की खरीद में तेजी ला रहा है. पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के अपडेट आंकड़ों से पता चलता है कि हाल ही में इसने 5 टन सोना खरीदा है, जो फरवरी 2025 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मंथली खरीद है. इस खरीद के साथ ही चीन लगातार 17 महीनों से सोना खरीदने की परम्परा को जारी रखे हुए है. इसका कुल गोल्ड रिजर्व 2,313 टन हो गया, जो इसके विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 10% है.
क्यों धीरे-धीरे सोना बढ़ा रहा चीन?
विश्लेषकों का मानना है कि चीन द्वारा निरंतर खरीदारी करना अमेरिकी डॉलर से दूरी बनाने और युआन को संभावित ग्लोबल रिजर्व करेंसी के रूप में मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. गौरतलब है कि पिछले महीने सोने की कीमतों में 11.5% की गिरावट के बावजूद यह खरीदारी जारी रही, जिससे पता चलता है कि केंद्रीय बैंक शॉर्टटर्म अस्थिरता पर प्रतिक्रिया देने के बजाय प्राइस में सुधार के दौरान अवसरवादी रूप से खरीदारी करते हैं.
सबसे ज्यादा सोना बेच रहा ये देश
जब दुनिया के ज्यादातर देश सोना खरीदने में जुटे हुए हैं, तो एक छोटा सा देश सोना बेच रहा है. तुर्की ने फरवरी में सबसे ज्यादा सोना बेचा है. इसके केंद्रीय बैंक ने हाल के महीनों में 118 टन से अधिक की गिरावट दर्ज की है, जिसमें पिछले महीने 69.1 टन की भारी बिकवाली की थी, जो 2013 की सबसे बड़ी सेलिंग थी.

सोने को लेकर आगे क्या होगा?
बीच-बीच में होने वाली बिकवाली के बावजूद, चीन और पोलैंड जैसी प्रमुख अर्थवस्थाओं द्वारा निरंतर खरीदारी सोने की कीमतों के लिए सपोर्ट का काम कर रही है. यह खरीद रिस्क के दौरान भी सोने की मांग को बनाए रखे है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे चलकर केंद्रीय बैंकों की मांग सोने के लिए एक प्रमुख आधार बनी रहेगी, खासकर भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रा परिवर्तन और महंगाई संबंधी चिताओं के बीच इसकी ज्यादा डिमांड रहेगी. इस माहौल में सोने को लेकर मजबूती और तेजी बने रहने की संभावना है.