सोना (Gold) सबसे कीमती एसेट्स में शामिल हैं और बीते कुछ समय में इसकी कीमत ने रिकॉर्ड रफ्तार दिखाई है. सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि सोने पर कर्ज यानी Gold Loan ने भी लोगों की किस्मत को पलटा है और इसका बड़ा उदाहरण हैं, दो भारतीय परिवार जो इस बिजनेस के जरिए अरबपति परिवारों (Billionaires Family) की लिस्ट में शामिल हुए. इनमें पहला परिवार है मुथूट फाइनेंस फैमिली, जबकि दूसरा मन्नपुरम फाइनेंस फैमिली, जिनका गोल्ड लोन का कारोबार अब विशाल साम्राज्य में बदल चुका है. (Photo: AI)
गोल्ड डिमांड और बढ़ती कीमत का कमाल
भारत में सोने के बदले लोन लेना एक पारंपरिक उधारी के सिस्टम से विकसित होकर आज एक बड़ा संगठित Loan Business बन गया है, जिससे प्रमुख ऋणदाताओं से जुड़े परिवारों ने अरबों डॉलर की संपत्ति जुटाई है. मुथूट फाइनेंस और मनप्पुरम फाइनेंस इसके बड़े उदाहरण हैं, जिन्होंने सोने के बदले कर्ज की बढ़ती डिमांड का सबसे ज्यादा लाभ उठाया और आज इस सेक्टर में इनका बड़ा कारोबार है. इन दोनों ही परिवारों ने गोल्ड लोन की मांग और सोने की ऊंची कीमतों (Gold Price) का लाभ उठाते हुए, पारंपरिक स्वर्ण कर्ज को बड़े, सार्वजनिक रूप से लिस्टेड फाइनेंशियल बिजनेस में बदल दिया है. (Photo: Reuters)
Gold Loan देकर बनाई अरबों की दौलत
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुातबिक, Gold Loan बिजनेस मुथूट फाइनेंस के जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट और उनके परिवार ने अनुमानित नेटवर्थ 9.9 अरब डॉलर आंकी गई है, जबकि मनप्पुरम फाइनेंस के चेयरमैन वीपी नंदकुमार की कुल संपत्ति लगभग 1.4 अरब डॉलर है. केरल के कोच्चि हेडक्वार्टर वाली Muthoot Finance की देशभर में बीते साल दिसंबर तक 4,970 ब्रांच थी. तो वहीं Manappuram Finance का मुख्यालय केरल के त्रिशूर में है और कंपनी की 5000 से ज्यादा शाखाएं एक्टिव हैं. (Photo: Pixabay)
मुथूट के गोल्ड लोन साम्राज्य की कहानी
मुथूट फैमिली के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल होने की कहानी पर गौर करें, तो इस फैमिली का बिजनेस 1887 से शुरू हुआ था, लेकिन ये Gold Loan का नहीं था, बल्कि मुथूट नीनन मथाई ने केरल में एक किराना स्टोर शुरू किया था. दुकान चल निकली, तो बिजनेस का विस्तार करते हुए मुथूट ने चिट फंड के माध्यम से बागान श्रमिकों और किसानों को कर्ज देना शुरू कर दिया.
1939 में इस फैमिली ने गोल्ड लोन बिजनेस में एंट्री मारी. इसके करीब चार दशक बाद, व्यवसाय को नीनान मथाई के तीन बेटों के बीच बांट दिया गया. इनमें सबसे बड़े बेटे, मथाई जॉर्ज मुथूट ने कर्ज देने वाली कंपनी की स्थापना की, जो बाद में मुथूट फाइनेंस बनी. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, आज ये देश की सबसे बड़ी Gold Loan कंपनी और देश की 5वीं सबसे वैल्यूएबल नॉन बैंकिंग ऋणदाता है. कंपनी के पास लगभग 210 टन सोना सिक्योरिटी के रूप में है, जबकि जून तक इसके गोल्ड लोन कारोबार में चार गुना बढ़ोतरी हुई और ये 18.5 अरब डॉलर का हो गया. (Photo: File/ITG)
मनप्पुरम का ऐसे बढ़ता गया कारोबार
Manappuram Finance के कारोबार पर नजर डालें, तो वीपी नंदकुमार की करियर जर्नी भी इसी तरह एक पारंपरिक लोन व्यवसाय से शुरू हुई. 32 वर्ष की उम्र में उन्होंने केरल के वलापद में अपने पिता के सामान गिरवी रखने के बदले पैसे उधार देने के कारोबार को संभाला. 1990 के दशक के मध्य तक, यह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो गई थी. इसके बाद में व्यवसाय विस्तार करते हुए नंदकुमार ने गोल्ड लोन पर फोकस किया. 2007 में उन्होंने ICRA से स्पेशिएलिटी हासिल की, जिसने अनुमान लगाया कि भारतीय परिवारों के पास 18,000 टन से 25,000 टन सोना है.
इस बिजनेस में उतरने के लिए मनप्पुरम ने सिकोइया कैपिटल से 14 मिलियन डॉलर जुटाए और Gold Loan Business को आगे बढ़ाया. आज, मनप्पुरम भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण ऋणदाता है, जिसके लगभग 30 लाख ग्राहक और लगभग 6 अरब डॉलर की गोल्ड लोन संपत्ति है. (Photo: File/ITG)
सोने के ऋणों में इतनी वृद्धि क्यों हुई है?
मुथूट और मनप्पुरम दोनों के बिजनेस दर्शाते हैं कि किस प्रकार उधार लेने के एक सदियों पुराने तरीके को आधुनिक फाइनेंस सर्विस मॉडल में परिवर्तित किया गया है. दोनों कंपनियों ने गोल्ड लोन से बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा करके इससे अलग भी कारोबार का विस्तार किया है. जैसे मनप्पुरम ने माइक्रो फाइनेंस, होम फाइनेंस, बिजनेस लोन और ऑटो फाइनेंस जैसे सेक्टर्स में आगे बढ़ा है, जबकि मुथूट फाइनेंस ने भी कई क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ाया है. (Photo: Reuters)